रायपुर, 10 सितंबर। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर उर्मिला फाउंडेशन द्वारा राजधानी रायपुर में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य वर्तमान समय में बढ़ रहे तनाव, अवसाद और अकेलेपन जैसी समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करना और उससे निपटने के सकारात्मक उपायों पर चर्चा करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत में फाउंडेशन की डायरेक्टर नम्रता सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति किसी न किसी तरह के मानसिक दबाव से गुजर रहा है। पढ़ाई का तनाव, करियर की चिंता, रिश्तों में दूरियां और भविष्य को लेकर अनिश्चितता युवाओं में अवसाद का बड़ा कारण बन रही है। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग अपनी मन की बात किसी से कह नहीं पाते और अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं, जो धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेता है।
नम्रता सिंह ने कहा कि तनाव से बचने का सबसे पहला कदम है अपनी भावनाओं को व्यक्त करना। परिवार, मित्र और भरोसेमंद लोगों से खुलकर बात करना बेहद जरूरी है। उन्होंने उपस्थित सभी महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपने आसपास ऐसे लोगों की पहचान करें जो चुप रहने लगे हैं और उन्हें बातचीत के लिए प्रेरित करें। समय पर बात करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने से कई बड़ी समस्याओं को रोका जा सकता है।
संगोष्ठी के विशेष सत्र में डॉ. विनोद सिंह ने अवसाद से उबरने और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के वैज्ञानिक तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि व्यक्ति का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। केवल भौतिक सुख-सुविधाएं जीवन में स्थायी खुशी नहीं दे सकतीं। खुशहाल जीवन के लिए अच्छे पारिवारिक और सामाजिक संबंध, आपसी सम्मान, भरोसा और सकारात्मक सोच का होना अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करना और हर चीज पाने की होड़ में खुद को भूल जाना भी तनाव को बढ़ाता है। इससे बचने के लिए दिनचर्या में योग, ध्यान, खुलकर बातचीत और अपनी पसंद के कार्यों को समय देना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में उर्मिला फाउंडेशन की सभी महिला पदाधिकारियों और सदस्यों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे रायपुर के विभिन्न वार्डों और बस्तियों में जाकर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों को जागरूक करेंगी और फाउंडेशन के माध्यम से जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा आगे रहेंगी।

