चयनकर्ताओं में निष्पक्षता व गंभीरता की जरूरत

छत्तीसगढ़ में राज्य खेल पुरस्कार के लिए आवेदन आमंत्रित
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस,वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार , टीवी कमेंटेटर.रायपुर

दूसरों के अलग हटकर कुछ करने वालों के लिए प्रोत्साहन बहुत अर्थ रखता है। जीवन में उपलब्धि का क्षेत्र चाहे जो भी हो, एक खास समय, उपयुक्त दिन अगर उसको पुरस्कार योग्य समझा जाता है तो संबंधित के लिए गर्व की बात होती है। सम्मान मिलने की वजह भी एक कारण है कि खेलकूद का दायरता बढ़ता जा रहा है। प्राचीन खेल, परंपरागत खेल, लुप्तप्राय खेल तथा वर्तमान खेल करके खेल को विभाजित किया गया है। आज की परिस्थति में अलग-अलग देशों में अलग अलग खेल लोकप्रिय है परंतु अगर इस विश्व में खेल सम्राट बनने की सोचे तो अब वही देश यह गौरव पा सकता है जिसके खिलाड़ी ओलंपिक खेलों में सर्वाधिक पदक जीतते हैं। आधुनिक ओलंपिक खेलों की शुरुआत 1886 में हुई तब से लेकर अब तक कभी संयुक्त राज्य अमेरिका, कभी सोनियत संघ, कभी चीन ने ओलंपिक खेलों में प्रथम स्थान पाया है। इसके अलावा जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड जैसे देश भी पहले दस स्थान पर रहे हैं। भारतीय परिदृश्य खेलकूद में प्रोत्साहन और पुरस्कार का विशेष महत्व है। अभिभावक हो या प्रशिक्षक या प्रायोजक सभी चाहते हैं उनके खिलाड़ी जीते। इससे उन्हें आर्थिक, सामाजिक लाभ प्राप्त होता है। छत्तीसगढ़ में भी खिलाड़ियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कृत किया जाता है। इन दिनों छत्तीसगढ़ सरकार के खेल विभाग द्वारा प्रदेश के खिलाडिय़ों को पुरस्कृत करने के लिए पूर्व वर्षों की तरह खेल पुरस्कार के आधार पर आवेदन पत्र आमंत्रित किए गये हैं। छत्तीसगढ़ में खेल पुरस्कारों की घोषणा के पूर्व खिलाडिय़ों द्वारा प्रस्तुत आवेदन की गंभीरता से जांच किए जाने का प्रावधान है। छत्तीसगढ़ के खिलाडिय़ों को शहीद राजीव पांडे, शहीद कौशल यादव, शहीद पंकज विक्रम, वीर हनुमान सिंह, और शहीद विनोद चौबे सम्मान दिया जाता है इसके अलावा मुख्यमंत्री ट्रॉफी दी जाती है। अलग अलग अवार्ड के लिए पृथक पृथक मापदंड निर्धारित किया गया है.
शहीद राजीव पांडे पुरस्कार केवल मान्यता प्राप्त विधाओं के सीनियर वर्ग के प्रतिभावान खिलाडिय़ों को दिया जाता है। शहीद कौशल यादव पुरस्कार केवल जूनियर खिलाडिय़ों को दिया जाता है। शहीद पंकज विक्रम पुरस्कार केवल प्रतिभावान खिलाडिय़ों को अधिकृत राज्य संघ की अनुशंसा से दिया जाता है। शहीद विनोद चौबे पुरस्कार के उन वरिष्ठ खिलाडिय़ों ,सक्रिय खेल हस्तियों को दिया जाता है जिन्होंने खेल में दीर्घकालिक योगदान दिया है। वीर हनुमान सिंह पुरस्कार केवल अर्हता प्राप्त प्रशिक्षकों या रैफरी/निर्णायकों को दिया जाता है। मुख्यमंत्री ट्राफी राष्ट्रीय चैंपियनशिप अथवा राष्ट्रीय खेलों में पदक प्राप्त करने वाले दल या व्यक्तिगत
विधा वाले को दिया जाता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि प्रत्येक पुरस्कार में योग्यता स्पष्ट है इसके बावजूद एक खराब अनुभव छत्तीसगढ़ के खेल व खिलाड़ियों, अभिभावकों को है।इस प्रकार पुरस्कार में योग्यता स्पष्ट है फिर भी लगभग प्रत्येक वर्ष पुरस्कारों को लेकर विवाद होता है। जैसे ही पुरस्कारों की घोषणा होती है आरोप-प्रत्यारोप का दौर आरंभ हो जाता है। यह एक गलत परंपरा है। इसके लिए सीधे तौर पर नियम बनाने वाले नहीं बल्कि चयन करने वाले दोषी हैं। क्योंकि साफ है कि जब भी पुरस्कृत खिलाडिय़ों की घोषणा की जाती है उसके पूर्व उसकी योग्यता की जांच गंभीरता से नहीं की जाती है। खिलाडिय़ों, अभिभावकों, प्रशिक्षकों, निर्णयकों को अपना कामकाज छोड़कर कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाना पड़ता है यह एकदम गलत परंपरा है। स्पष्ट है कि चयनकर्ता किसी न किसी के दबाव में आते हैं और उनकी निष्पक्षता धरी की धरी रह जाती है। इस प्रकार की घटना से हमारे राज्य का नाम पूरे भारत में खराब होता है। जब कभी हमारे खिलाड़ी दसरे राज्य में खेलने जाते हैं तो उनकी हंसी उड़ाई जाती है। इस व्यवस्था से छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना भूल जाते हैं। अत: इस प्रकार के राज्य खेल अलंकरण के लिए चयनित लोगों के नाम उनकी योग्यता एवं उपलब्धि को हर हालत में सही जांचकर ही दिया जाना चाहिए।

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