रायपुर, 14 सितंबर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से इंटरव्यू तत्काल स्थगित करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 और 2025 की परीक्षाओं में मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं।
बैज ने कहा कि 2025 में पीएससी ने 265 पदों पर भर्ती निकाली थी। नियम के अनुसार मुख्य परीक्षा में पदों की संख्या के तीन गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना था। इस हिसाब से 795 अभ्यर्थी चयनित होने चाहिए थे, लेकिन केवल 608 को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। कांग्रेस ने आयोग से 187 अभ्यर्थियों के न्यूनतम अंक नहीं ला पाने का आधार सार्वजनिक करने की मांग की है।
बैज ने 2024 की मुख्य परीक्षा की कुछ उत्तर-पुस्तिकाओं का हवाला देते हुए मूल्यांकन में असमानता का आरोप लगाया। उनका दावा है कि समान उत्तरों पर अलग-अलग अंक दिए गए, जबकि कुछ गलत उत्तरों को भी अंक मिले। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू से पहले सभी अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाएं सार्वजनिक की जाएं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 2024 में भी 1:3 के अनुपात का पालन नहीं हुआ था और 95 अभ्यर्थी कम बुलाए गए थे। उन्होंने मूल्यांकनकर्ताओं की योग्यता तय करने, मॉडल उत्तर जारी करने और सभी उत्तर-पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की। बैज ने कहा कि सरकार मामले के निराकरण तक इंटरव्यू रोके और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत 1:3 अनुपात का पालन करे।
तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पर कांग्रेस ने भाजपा को घेरा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि हसदेव अरण्य के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी केंद्र सरकार ने की है, जिसमें ब्लॉक अडानी समूह से जुड़ी कंपनी को मिला है। बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार छत्तीसगढ़ के जल, जंगल और जमीन को निजी हाथों में सौंप रही है।उन्होंने कहा कि साय सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए कोयला मंत्रालय को पत्र लिखा था, जबकि कांग्रेस सरकार ने जून 2023 में तारा समेत नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने की मांग की थी। उन्होंने विधानसभा के प्रस्ताव और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे का भी उल्लेख किया।बैज के मुताबिक तारा ब्लॉक करीब 5000 एकड़ में फैला है, जिसमें 4000 एकड़ से अधिक घना जंगल है। इससे 10 लाख से ज्यादा पेड़ों और हाथियों समेत वन्यजीवों पर खतरा होगा। उन्होंने सरकार से खनन की अनुमति नहीं देने की गारंटी मांगी।

