कांग्रेस के आदिवासी नेताओं की बैठक संपन्न

12 बिंदुओं का राजनैतिक प्रस्ताव पारित किया गया


रायपुर।
 प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आदिवासी नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू की उपस्थिति में संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन एवं खनिज संसाधनों को बचाने हेतु रणनीति पर चर्चा की गयी। वन अधिकार पट्टा एवं पेसा कानून के क्रियान्वयन की समीक्षा किया गया। आदिवासियों के भूमि अधिग्रहण से लगातार विस्थापित हो रहे आदिवासियों की सुरक्षा व समस्याओं पर चर्चा की गयी। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में भाजपा एवं आरएसएस द्वारा फैलाए जा रहे वैमनस्यता पर चर्चा की गयी। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत बनाने पर चर्चा की गयी।
बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने 12 बिंदुओं का राजनैतिक प्रस्ताव रखा जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि

(12 बिंदु का सामाजिक एवं राजनैतिक प्रस्ताव)

1. हसदेव अरण्य, परसा ईस्ट केते बासन, केते एक्सटेंशन सहित नई खदानों में कोयला खनन, बैलाडीला में आयरन ओर और विभिन्न परियोजनाओं के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा दी गई लाखों पेड़ों की कटाई और हसदेव के 1,742 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की अनुमति तत्काल रद्द करें सरकार।

2. जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जनजाति के लिए 32 प्रतिशत  आरक्षण लागू हो, राजभवन में लंबित नवीन आरक्षण विधेयक की अधिसूचना जारी करे सरकार।

3. 
Forest Rights Act के तहत वनाधिकार पट्टा आवंटित किया जाए।

4. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संघर्ष की चपेट में आकर आम आदिवासी निर्दाेष होते हुए भी नक्सली हिंसा, पुलिस कार्रवाई से दूसरे पड़ोसी राज्यों (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र) में पलायन के लिए मजबूर हुए हैं उन्हें वापस लाया जाए, नक्सल हिंसा और फर्जी एंकाउंटर में पीड़ित परिवारों को मुआवजा दे सरकार।

5. नक्सली सहयोगी होने का आरोप लगाकर हजारों निर्दोष आदिवासियों को जेल भेजा गया है, अब जब पुनर्वास योजना के तहत नक्सलियों को मुख्यधारा में शामिल किया गया है तो ऐसे में सहयोगी होने के आरोपी उन निर्दोष आदिवासियों की भी रिहाई हो। 25 हजार से अधिक आदिवासियों के खिलाफ जारी स्थायी एवं अस्थायी वारंट रद्द किया जाए।

6. आदिवासी समुदाय के प्राचीन परंपराओं की रक्षा सुनिश्चित करें संविधान की पांचवीं अनुसूची (
Fifth Schedule) के तहत अपने स्वशासन, ग्राम सभा की सर्वोच्चता और पारंपरिक कानूनों पैसा कानून और वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों की रक्षा करे।

7. समान नागरिक संहिता (
UCC) के प्रस्तावित कानूनों में आदिवासी समाज को छूट मिले। आदिवासियों की सदियों पुरानी रूढ़िवादी परंपराओं, विवाह पद्धति, और सामाजिक व्यवस्था को  UCC के दायरे से बाहर रखा जाए ताकि विशिष्ट अधिकारों का हनन न हो।

8. स्थानीय रोजगार और सरकारी भर्ती में आदिवासियों को आरक्षण मिले। बस्तर और सरगुजा संभाग) में बंद स्कूल खोल कर विशेष अभियान चलाकर आदिवासी बेरोजगारों की नियुक्ति की जाए।

9. पेसा कानून (
PESA Act) का कड़ाई से पालन हो, पांचवी अनुसूची के क्षेत्र बस्तर और सरगुजा में ग्राम सभा के अधिकारों को बाइपास करना बंद करें सरकार।अनुसूचित क्षेत्रों (Extension of the Panchayats to Scheduled Areas) में पंचायत राज अधिनियम का कड़ाई से पालन हो। किसी भी विकास परियोजना या ज़मीन अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा की सहमति की अनिवार्यता का प्रावधान है, इसका शत प्रतिशत पालन सुनिश्चित हो।

10. आदिवासियों को प्राप्त विशेष संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित हो। संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को निष्ठापूर्वक लागू करे, ताकि जनसांख्यिकी (
 Demography), संस्कृति और सामाजिक ढाँचे को बाहरी हस्तक्षेप से बचाया जा सके।

11. आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी आदिवासियों को ‘वनवासी’ का संबोधन देकर हमारी मूल पहचान नष्ट करने की साजिश रच रही है। हम इसका विरोध करते है। हम आदिवासी है और रहेंगे। हमारी पहचान को वनवासी बताये जाने के प्रयास की हम निंदा करते है।

12. हमारी मांग है कि जनगणना 2026-2027 में आदिवासियों की स्पष्ट पहचान के लिए अलग से कालम निर्धारित किया जाए ताकि हमारी विशेष पहचान और हमारी संख्या भी सामने आये।

बैठक में उपनेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल, पूर्व मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया, आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जनक ध्रुव, विधायक गण विद्यावती सिदार, लालजी सिंह राठिया, फूल सिंह राठिया, अंबिका मरकाम, इंद्र शाह मंडावी, सावित्री मंडावी, पूर्व विधायक गण गुलाब सिंह कमरो, डॉ. प्रीतम राम, विनय भगत, यू.डी. मिंज, डॉ. कृष्णा कुमार ध्रुव, चंदन कश्यप, हृदय राम राठिया, गंगा पोटाई, शंकर सोढ़ी, भानुप्रताप सिंह, रामदेव राम, तेजकुंवर नेताम, अशोक सोम, पुरूषोत्तम कंवर, मोहित केरकेट्टा, लक्ष्मी ध्रुव, विधानसभा पूर्व प्रत्याशी गण राजकुमारी मरावी, डॉ. अजय तिर्की, दुलेश्वरी सिदार, रूपसिंह पोटाई, के. छविन्द्र कर्मा, आदिवासी कांग्रेस राष्ट्रीय समन्वयक गणेश सिंह ध्रुव, आदिवासी सलाहकार परिषद सदस्य गण अर्चना पोर्ते, शशी सिंह, गजमती भानू, प्रदेश उपाध्यक्ष बीरेश ठाकुर, प्रदेश महामंत्री आरती सिंह, महासमुंद पूर्व जिला अध्यक्ष मोहित ध्रुव, कांकेर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हेमंत ध्रुव, राजेश भास्कर, रामजी ध्रुव, कुंदन ठाकुर उपस्थित थे।

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