खेती का आधुनिक युगः ‘‘पावर टिलर बना बदलाव का आधार‘‘

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में स्थित दंतेवाड़ा जिला, जो अपनी समृद्ध प्राकृतिक संपदा, उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु के लिए जाना जाता है, अब जैविक खेती में एक नई दिशा की ओर अग्रसर हो चुका है। पारंपरिक कृषि पद्धतियों के साथ-साथ अब आधुनिक यंत्रों का समावेश कर खेती को अधिक आसान और लाभकारी बनाया जा रहा है। इसी क्रम में जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों को पावर टिलर वितरित कर यंत्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए दंतेवाड़ा में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन उसमें सबसे बड़ी चुनौती श्रम और समय की अधिकता रही है। जैविक खादों, प्राकृतिक कीटनाशकों और पारंपरिक तरीकों का उपयोग करने के बावजूद खेत की तैयारी, खरपतवार नियंत्रण और खाद मिलाने जैसी गतिविधियों में काफी मेहनत लगती है। इस चुनौती से निपटने के लिए अब पावर टिलर जैसे उपकरण किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

जिला प्रशासन ने हाल ही में 75 पावर टिलरों का वितरण किया है, जो कि महिला स्व-सहायता समूहों और प्रगतिशील किसानों को प्रदान किए गए हैं। यह वितरण न केवल व्यक्तिगत उपयोग के लिए किया गया है, बल्कि सामूहिक यंत्र उपयोग मॉडल को भी बढ़ावा दिया गया है, जिससे मशीनों का अधिकतम उपयोग हो सके। समूहों के माध्यम से यह पावर टिलर किराए पर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे अन्य किसान भी इसका लाभ उठा सकें।

इसके साथ ही पावर टिलर का उपयोग जैविक खेती में बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। इससे खेत की गहरी जुताई, मिट्टी को बारीक करना और जैविक खादों को समरस रूप से मिलाने में आसानी हो रही है। जहां पहले पारंपरिक हल से खेत की जुताई में दो से तीन दिन लगते थे, वहीं अब यह काम कुछ ही घंटों में पूरा हो रहा है। इसके अलावा पावर टिलर का आकार छोटा और संचालन सरल होने के कारण यह छोटे जोत के किसानों के लिए भी उपयुक्त है।

इस संबंध में हीरानार के किसान लूदरुराम और कासौली के सुरेश नाग बताते हैं कि पावर टिलर के उपयोग से खेती करना अब कहीं ज्यादा आसान हो गया है। उन्हें समय की बचत तो हो ही रही है, साथ ही उत्पादन में भी सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन और कृषि विभाग का  आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मल्टीपरपज मशीन न केवल जुताई के काम आती है, बल्कि मिट्टी पलटने, कतार बनाने, निंदाई-गुड़ाई, खाद मिलाने और ट्रॉली से परिवहन जैसे कार्यों में भी सहायक है। इससे श्रम लागत में भी कमी आई है, जिससे जैविक खेती अब और अधिक टिकाऊ और लाभदायक बन रही है। जिला प्रशासन की यह पहल  कृषि क्षेत्र में तकनीक के समावेश का उत्कृष्ट उदाहरण है। पावर टिलर वितरण के माध्यम से न केवल जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि युवा किसान भी अब आधुनिक कृषि तकनीकों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह पहल दंतेवाड़ा को जैविक कृषि में एक मॉडल जिला बना सकती है, जहां परंपरा और तकनीक का संतुलन एक नई कृषि क्रांति को जन्म देगा।

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