आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया की पहल से भारतीयों को मिलेगी नई पहचान
मानव सभ्यता के शुरुवात से मनुष्य ने खेलकूद को जीवन का अभिन्न अंग बना लिया है। नई तकनीक नये खोज के कारण खेलों की दुनियां ही बदल गई है। पहले सिर्फ सूखी जमीन पर खेले जाने वाले खेलों को बढ़ावा मिला बाद में
खेल स्पर्धाओं के लिए पानी,बर्फ के सतह और खुले आसमान में होने वाले खेलों ने लोगों के दिलों में जगह बनाने की शुरुवात की। जैसा कि हमें पता है कि खेल प्रतियोगिताएं भूमि, जल, बर्फ वाले सतह और हवा में आयोजित की जा सकती है तो फिर हमें उसके आयोजन के लिए ऐसे ही सतह वाले अधोसंरचना के निर्माण की जरुरत होगी। जमीन की सतह को छोड़कर अन्य माध्यमों के खेल स्पर्धाओं के लिए सही व उचित सतह का निर्माण करना आसान नहीं है। सौभाग्य की बात है कि बर्फ के सतह वाली स्पर्धाओं के लिए ठंडे स्थान स्थित खुले क्षेत्र पहाडिय़ो,मैदानों में चैंपियनशिप कराने लायक सतह के साथ माहौल मिल जाता है। जिससे ओलंपिक खेलों के शीतकालीन खेल संपन्न हो रहे हैं। इन खेलों में मुख्यत: अल्पाइन स्कीइंग, बैथलॉन,बॉबस्लेय, क्रांसकंट्री स्कीइंग, कर्लिंग,फिगर स्केटिंग फ्रीस्टाइल स्कीइंग, आइसहॉकी, लुग, नार्डिक कंबाइंड, लघु ट्रैक स्पीड स्केटिंग,कंकाल,स्की जंपिंग,स्नोबोर्डिंग, स्पीड स्केटिंग आदि स्पर्धाएं होती है। सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि बर्फ में खेले जाने वाले खेलों के लिए तेज और तेज अर्थात रफ्तार का बहुत अधिक महत्व होता है।
भारत जैसे देश में साल भर बर्फ में खेले जाने वाले खेलों के लिए प्राकृतिक अधोसंरचना नहीं के बराबर है और इस खेल में गति तब तेज होती है जब आपके पास अभ्यास करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की अधोसंरचना होती है। इस दिशा में आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और भारतीय ओलंपिक संघ के एक्जीक्यूटिव सदस्य श्री अभिताभ शर्मा द्वारा उत्तराखंड में शानदार पहल की गई जिसकी वजह से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, खेल मंत्री रेखा आर्य तथा उत्तराखंड के खेल संचालक अमित सिन्हा के अमूल्य मागदर्शन व सहोयग से 200 मीटर का आइस स्केटिंग ट्रेक का निर्माण हो सका है। इस तरह के ऐतिहासिक कदम से भारत में शीतकालीन खेलों में भाग ले रहे प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा का संसार में जगह-जगह हो रहे शीतकालीन खेलों में मूल्यांकन करने का अवसर मिलेगा। जिससे हम कह सकते हैं कि इसमें कोई दो मत नहीं कि उत्तराखंड सरकार तथा आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संयुक्त प्रयास का दूरगामी परिणाम 2032,2036 के ओलंपिक खेलों में होगा।
इसी तरह स्केटिंग के माध्यम से खेले जाने वाले विभिन्न खेलों विशेषकर रोलबाल जैसे भारत में जन्म लिए खेल के खिलाडिय़ों को अपनी प्रतिभा को विश्व स्तर पर दिखाने का अवसर मिलेगा। साथ ही इस खेल की खोज करने वाले पुणे के राजू दभाडे जैसे व्यक्तित्व का सपना भी पूरा हो सकेगा।रोलबाल को 2032, 2036 के ओलंपिक खेलों में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है चूंकि यह खेल 21 वीं सदी का सबसे तेज खेल है जो आज विश्वभर के युवाओं की पहली पसंद बनती जा रही है। रोलबाल का खेल धरती और बर्फ की चादर वाली सतह में समान रूप से खेला जा सकता है। अत: उत्तराखंड में निर्मित यह स्केटिंग ट्रेक इस खेल के साथ ऐसे ही समकक्ष अन्य खेलों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

