राजिम। राजिम के प्रेमरतन पैलेस में कारीगर समुह की संस्थापक सोमा शर्मा, सह-आयोजक नीरज शर्मा द्वारा आयोजित गरिमामय समारोह में प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय ने मां सरस्वती जी की पूजा अर्चना और दीप प्रज्जवलित कर अपने उदबोधन की शुरूआत राधे-राधे बोलकर शुरू किया। इसके साथ ही राम-राम जय सिया राम बोली। श्रीमती साय ने गणेश जी की स्तुति करते हुए वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभा का वाचन की तो पैलेस का पूरा हॉल तालियो की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होने भारत माता,छत्तीसगढ़ महतारी और भगवान श्री राजीव लोचन के जयकारे के साथ ही बहुत ही सरल और सहज रूप में कहने लगी कि इस मंच पर दो विधायक राजिम और अभनपुर बैठे है। सामने दर्शक दीर्घा में बैठे लोगो से उन्होने पूछ लिया कि इन दोनो विधायको से आप लोग खुश तो है न? यदि खुश है तब बोलुंगी। श्रीमती साय ने अपने उदबोधन के दौरान समूचे लोगो का दिल जीत लिया। कहा कि मीडिया के साथी सामने बैठे हुए है। इनके माध्यम से हमारी कही गई बातें दूर तक जाती है। उन्होने सीधा-सीधा कहा कि हमारी संस्कृति और समरसता के वातावरण को धरोहर के रूप में सजोकर रखना है। शहर से दूर गांवो में आज भी लोग बहुत स्नेह और प्रेम के साथ रहते है। एक दूसरे का सुख-दुख पुछते है। एक-दूसरे का हालचाल जानते है और बहुत ही सभ्यता के साथ रिश्ते-नाते बनाकर रखते है। गांव में किसी का कोई भतीजा होता है तो कोई चाचा। बहनो को दीदी के रूप में ही संबोधित किया जाता है। माताओं को बड़ी मां,छोटी मां के रूप में बोला जाता है। कहा कि गांव में असली प्यार है। कोई आता है तो सबसे पहले उन्हें पानी दी जाती है,खाना के लिए पूछा जाता है। छत्तीसगढ़ के इस संस्कृति के ऊपर हम सबको गर्व करना चाहिए। हर घर में राम हो। बुजुर्ग से स्नेह रखो। कहा कि सम्मान चाहिए तो एक-दूसरे का सम्मान करो। उन्होने प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ के प्रति चिंता जाहिर किया। झाड़ बहुत कट रहे है लिहाजा अधिक से अधिक पेड़ लगाएं ताकि पर्यावरण की रक्षा हो सके। एक पेड़ मां के नाम तो लगाना ही है,दूसरा पेड़ पिता जी के नाम से लगाना है। उन्होने बहुत ही रोचक अंदाज में कहा कि पेड़ लगाने के तत्काल बाद फोटो और सेल्फी मारते है परंतु इसकी सुरक्षा और पानी के ऊपर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। अच्छे से गहराई करे और ठोस रूप में पेड़ लगाएं। धर्म की रक्षा करने सामने आएं। कहा कि नारियो की सम्मान की बात कही जाती है ये अच्छी बात है परंतु पुरूषो का भी सम्मान हो। यदि हमारी कही बात अच्छी लगे तो लेकर जरूर जाइयेगा। कहा कि जिस प्रकार एक माँ अपने बच्चे को स्नेहपूर्वक शिक्षित करती है, और एक गुरु अपने शिष्य को मार्गदर्शन देता है, उसी प्रकार कारीगर टीम बाल प्रतिभाओं को पहचानकर उनके भविष्य को सँवारने का कार्य कर रही है। निस्संदेह यह एक सराहनीय एवं सकारात्मक पहल है।
अपना उदबोधन श्रीमती साय ने हर- हर महादेव बोलकर विराम दिया। श्रीमती साय के उदबोधन को सारे लोगो ने बहुत ध्यान से सुना और सबने इसकी तारीफ की।
संस्कृति और समरसता के वातावरण को धरोहर के रूप में संजोकर रखना है-कौशल्या देवी

