मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस बार ‘सुपर अल नीनो’ के कारण गर्मी अपने पिछले 140 सालों के सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। आसान भाषा में जानिए यह क्या है, क्यों इतना खतरनाक है और भारत के मॉनसून व खेती पर इसका क्या असर होगा।
गर्मियों का मौसम आते ही हम सभी चिलचिलाती धूप और पसीने से परेशान होने लगते हैं। लेकिन, इस बार की गर्मी कोई आम गर्मी नहीं होने वाली है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस बार ‘सुपर अल नीनो’ के कारण गर्मी अपने पिछले 140 सालों के सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है और दुनिया के कई हिस्सों में चरम मौसम की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। आखिर यह ‘सुपर अल नीनो’ कैसे असर करता है? यह इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है? और भारत सहित पूरी दुनिया पर इसका क्या असर पड़ने वाला है? आइए समझते हैं।
अल नीनो (El Niño) क्या है?
स्पेनिश भाषा में ‘अल नीनो’ का मतलब ‘छोटा लड़का’ होता है, लेकिन मौसम विज्ञान में इसका असर बहुत विशाल है।
यह प्रशांत महासागर से जुड़ी एक मौसमी घटना है।
सामान्य परिस्थितियों में, समुद्र की सतह का गर्म पानी एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ बहता है।
लेकिन, अल नीनो के दौरान यह चक्र उलटा या कमजोर पड़ जाता है। भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है और यह गर्म पानी दक्षिण अमेरिका की तरफ बहने लगता है।
समुद्र के इस बढ़ते तापमान का असर पूरी दुनिया के मौसम चक्र (हवाओं, बारिश और तापमान) पर पड़ता है।

