प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल की सफल योजनाओं में से एक खेलो इंडिया
– जसवंत क्लाडियस
बीसवीं सदी तक खेलकूद में अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की उपस्थिति नहीं के बराबर थी। पूरी दुनिया में इस बात को लेकर जब भी चर्चा होती थी तो हमारे देश की जनसंख्या पर आकर चर्चा थम जाती थी। सभी कहते थे जब भारत की जनसंख्या संसार में चीन के बाद
सबसे ज्यादा है तो क्या वजह है कि भारतीय खिलाड़ी विश्व स्तर की प्रतियोगिता में सफल नहीं हो पाते? 15 अगस्त 1947 को मिली स्वतंत्रता के पश्चात हमारे देश में अधिकांशत: कांग्रेस की सरकार सत्ता में रही। इस दिशा में शोध करने वाले या अध्ययन करने वालों का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर के प्रतिभा सम्पन्न खिलाडिय़ों की पहचान नहीं कर ली जाएगी तब तक खेलकूद के क्षेत्र में भारत को स्थापित होने में समय लगेगा। इसी एक मात्र बिन्दु पर ध्यान केंद्रित करते देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 के अपने पहले कार्यकाल से ही खेल को प्राथमिकता में रखा जो इस प्रमाण से सिद्ध होता है कि भारत में पहली बार खेल मंत्री के रूप में 2004 एथेंस आधुनिक ग्रीष्मकालीन खेलों में निशानेबाजी स्पर्धा के रजत पदक विजेता लेफ्टि. कर्नल राज्यवद्र्धन सिंह राठौर को खेल मंत्रालय का बागडोर सौंपा गया। इसके पश्चात विचार-विमर्श का दौर आरंभ हुआ तब यह तय हुआ कि जब तक ग्रामीण अंचल में प्रतियोगिताओं के माध्यम से खेल प्रतिभाओं की खोजबीन नहीं की जायेगी तथा प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को उचित प्रशिक्षण, अत्याधुनिक खेल सामग्री, पोशाक, भरपूर आहार, आवास की व्यवस्था नहीं की जाएगी तब तक हमारे देश के खिलाड़ी अन्य देशों के मुकाबले विजयी नहीं हो सकते। आखिरकार भारत में खेल संस्कृति की जड़ें मजबूत करने खेलो इंडिया कार्यक्रम का आरंभ हुआ। धीरे-धीरे करके परिस्थितियां बदलती जा रही है। आधुनिक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में 28 खेलों को मुख्य खेल का दर्जा प्राप्त है। खेलो इंडिया कार्यक्रम भारत के बच्चे, किशोर, युवा सभी वर्गों के लिए क्रांतिकारी संदेश लेकर आया है। राष्ट्रीय स्तर की खेलो इंडिया स्पर्धा के अंतर्गत खेलो इंडिया यूथ गेम्स तथा खेलो इंडिया विश्वविद्यालय प्रतियोगिता का आयोजन पिछले पांच-छ: वर्षों से निरंतर हो रहा है। इसके साथ ही खेलो इंडिया विंटर गेम्स, खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स, खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स, खेलो इंडिया पैरा गेम्स का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा विभिन्न राज्य सरकारों को वित्तीय तथा भारतीय खेल प्राधिकरण की ओर से उचित मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है जिसका परिणाम धीरे-धीरे सामने आ रहा है। इसी वजह से अब ओलंपिक चैंपियनशिप में शामिल तीरंदाजी, केनोइंग, सायकलिंग, तलवारबाजी, गोल्फ, जिमनास्टिक्स, जूडो, निशानेबाजी, ताइक्वांडो आदि खेलों में महिला व पुरुष दोनों ही वर्गों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के भारतीय खिलाड़ी उभरकर आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के रजत जयंती वर्ष तक यहां के खेल अधोसंरचना का बहुत विकास हुआ है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय की मदद से अत्याधुनिक खेल एरेना बनाये जा रहे हैं। केंद्र को राज्य सरकार के खेल विभाग द्वारा खेलकूद के लिए उपयुक्त परिसर बनाये जाने का प्रस्ताव दिया जा रहा है। यह एक अच्छी शुरुआत है लेकिन लगभग सभी जिलों में इंडोर स्टेडियम बनाये जाने या फिर पहले से निर्मित इंडोर स्टेडियम को सुधारने की पहल की जा रही है जिसके लिए केंद्र सरकार से राशि भी आ रही है। अब देखना यह है कि इस राशि का खेल के हित में उपयोग हो रहा है या नहीं? दूसरी बात इंडोर स्टेडियम में सिर्फ बैडमिंटन, टेनिस आदि खेल तो नहीं हो रहे हैं। वास्तव में छत्तीसगढ़ में निर्मित किए जा रहे किसी भी इंडोर स्टेडियम का खेल क्षेत्र 130 फुट लंबा, 130 फुट चौड़ा इससे कम नहीं होना चाहिए तथा इस परिसर में जूडो, ताइक्वांडो, तलवाबाजी, भारोत्तोलन, मुक्केबाजी, कुश्ती, जिमनास्टिक्स आदि खेलों के प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। अधोसंरचना के निर्माण के साथ प्रशिक्षक, खान पान विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट व सहयोगी खेल स्टाफ बहुत जरूरी है। अत: छत्तीसगढ़ में बनने वाले खेल एरेना में जब तक उपरोक्त सुविधा नहीं होगी सिर्फ इंडोर स्टेडियम या खुला स्टेडियम बना लेने का कोई लाभ नहीं।

