घर-घर जली ज्योति, बने पारंपरिक पकवान; रक्षाबंधन का रक्षा सूत्र गोगा जी महाराज को किया अर्पित
तिल्दा-नेवरा। राजस्थानी समाज ने लोकदेवता एवं श्रद्धा के प्रतीक गोगा जी महाराज की नवमीं का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और रीति-रिवाजों के साथ मनाया। इस अवसर पर समाज के घरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई और ज्योति प्रज्ज्वलित कर गोगा जी महाराज का स्मरण किया गया।
पर्व की विशेष परंपरा के तहत घरों में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक पकवान तैयार किए गए। वहीं रक्षाबंधन के अवसर पर कलाई में बांधा गया रक्षा सूत्र (राखी) गोगा जी महाराज को अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना की गई।
लोक आस्था और पुरानी परंपरा का पर्व
गोगा नवमीं राजस्थान की लोक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। राजस्थानी समाज में गोगा जी महाराज को श्रद्धा से गोगा जी, गोगा वीर और जाहर वीर के नाम से स्मरण किया जाता है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में पूजा, ज्योति और प्रसाद के माध्यम से लोकदेवता के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।
तिल्दा-नेवरा में भी राजस्थानी एवं मारवाड़ी समाज के परिवार इस परंपरा को आज तक जीवित रखे हुए हैं। बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली के बीच घर-घर में इस पर्व को मनाया जाना नई पीढ़ी के लिए अपनी जड़ों, संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों से जुड़ने का माध्यम बन रहा है।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने की जरूरत
समाज के वरिष्ठजनों का कहना है कि ऐसे पारंपरिक पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी लोक संस्कृति, इतिहास और पारिवारिक संस्कारों की पहचान हैं। नई पीढ़ी को गोगा नवमीं जैसे पर्वों की परंपरा और उनके महत्व की जानकारी देना जरूरी है, ताकि राजस्थान से जुड़ी यह सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके।
गोगा नवमीं के अवसर पर तिल्दा-नेवरा में घर-घर आस्था की ज्योति और पारंपरिक पकवानों की खुशबू ने राजस्थानी संस्कृति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।

