शंकर कुडि़यम बने आत्मनिर्भरता की मिसाल
शासकीय योजना और मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन से 594 किलो मछली का उत्पादन, 95,600 रुपये का शुद्ध लाभ
रायपुर । गांव में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग और शासकीय योजनाओं का सहयोग ग्रामीण परिवारों के लिए आत्मनिर्भरता की राह आसान बना रहा है। बीजापुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र के निवासी शंकर कुडि़यम ने अपने निजी तालाब में मछली पालन को आय का बेहतर साधन बनाकर सफलता की मिसाल पेश की है। मत्स्य पालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और शासकीय योजना से मिले सहयोग के जरिए उन्होंने 594 किलोग्राम मछली का उत्पादन किया और 95 हजार 600 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।
50 प्रतिशत अनुदान से मिला सहयोग
शंकर कुडि़यम ने 0.45 हेक्टेयर के निजी तालाब में मछली पालन शुरू किया। मत्स्य पालन विभाग ने तालाब की तैयारी और मछली पालन की वैज्ञानिक पद्धति के संबंध में उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन दिया। इसके साथ ही मत्स्य पालन प्रसार योजना के तहत 50 प्रतिशत अनुदान पर उन्नत मत्स्य बीज और मछली पकड़ने के लिए आवश्यक जाल सामग्री उपलब्ध कराई गई।
शासकीय सहायता और विभागीय मार्गदर्शन से शंकर ने मछली पालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया। उन्होंने स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए उचित प्रबंधन और वैज्ञानिक पद्धति अपनाई, जिसके परिणामस्वरूप तालाब से अच्छा उत्पादन प्राप्त हुआ।
594 किलो मछली से 95,600 रुपये का लाभ
शंकर कुडि़यम ने अपने तालाब से कुल 594 किलोग्राम मछली का उत्पादन प्राप्त किया। मछली पालन में उनकी कुल लागत लगभग 35 हजार रुपये रही, जबकि मछली बिक्री से उन्होंने 1 लाख 30 हजार 600 रुपये की कुल आय अर्जित की। इस प्रकार उन्हें 95 हजार 600 रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
मछली पालन से प्राप्त अतिरिक्त आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। स्थानीय संसाधन से रोजगार और आय का साधन विकसित होने से शंकर को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।
ग्रामीणों के लिए प्रेरणा बनी सफलता
शंकर कुडि़यम की सफलता यह संदेश देती है कि गांवों में उपलब्ध तालाब और अन्य स्थानीय संसाधनों का योजनाबद्ध तरीके से उपयोग कर अतिरिक्त आमदनी का बेहतर साधन तैयार किया जा सकता है। तकनीकी मार्गदर्शन, शासकीय योजनाओं और मेहनत का समन्वय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप सरकार का प्रयास है कि शासकीय योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और ग्रामीणों को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर मिलें। बीजापुर जिले में भी ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का कार्य निरंतर किया जा रहा है।
शंकर कुडि़यम की कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन और उपलब्ध संसाधनों के सदुपयोग से ग्रामीण परिवार अपनी आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ा सकते हैं।

