श्रमिक परिवारों के बच्चे आगे बढ़ेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का सपना होगा पूरा
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
मुख्यमंत्री ने श्रमिक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों का किया सम्मान, उनके साथ बैठकर किया भोजन और साझा किए अपने जीवन के अनुभव
मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा – बड़े सपने देखें, खूब मेहनत करें और देश-प्रदेश की सेवा का संकल्प लेकर आगे बढ़ें
1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों के खातों में डीबीटी से अंतरित हुई 39.67 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि
श्रमिक कल्याण की 67 योजनाओं से मिल रही सामाजिक सुरक्षा, ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि सीधे श्रमिकों के खातों में
रायपुर । श्रमिक प्रदेश के विकास की मजबूत नींव हैं। उनके परिश्रम से सड़कें, भवन, पुल और अनेक विकास संरचनाएं आकार लेती हैं। ऐसे श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगे और अपने सपनों को साकार करेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का संकल्प पूरा होगा।
राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने योजना के विद्यार्थियों से संवाद किया और शिक्षा, खेल, कला एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया। इस अवसर पर विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के तहत 1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 39 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि अंतरित की गई।
200 बच्चों को प्रतिष्ठित विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा
मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 100 बच्चों से हुई थी। इस वर्ष इसका विस्तार करते हुए 200 प्रतिभावान बच्चों को योजना में शामिल किया गया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों से चयनित बच्चे राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाना श्रमिक परिवारों के लिए कभी कठिन सपना था, अब सरकार उस सपने को साकार कर रही है। योजना का उद्देश्य केवल अच्छे विद्यालय में प्रवेश दिलाना नहीं, बल्कि बच्चों को बेहतर वातावरण, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना है।

शिक्षा ही सफलता की मजबूत नींव
मुख्यमंत्री ने बच्चों से अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, शिक्षा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने और देश-प्रदेश की सेवा का संकल्प लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी, उद्यमी या समाजसेवी बनने का लक्ष्य हो, उसकी मजबूत नींव शिक्षा ही है।
उन्होंने यह भी बताया कि श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हेतु ऋण और विदेश में अध्ययन के लिए सहायता जैसी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभावान बच्चे के सपनों में बाधा न बनें।
श्रमिकों के लिए 67 कल्याणकारी योजनाएं
श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व सहायता, पेंशन, कौशल उन्नयन, रोजगार और आवास जैसी सुविधाएं शामिल हैं। पिछले ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के खातों में अंतरित की गई है।
बच्चों के साथ भोजन कर साझा किए जीवन के अनुभव
समारोह में मुख्यमंत्री श्रमिक परिवारों के बच्चों के साथ बैठकर भोजन किया और उनसे खुलकर बातचीत की। बच्चों ने उनके बचपन, पढ़ाई और जीवन के संघर्षों से जुड़े सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने सहजता से जवाब देते हुए बच्चों को मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा दी।
बीजापुर के अतीश ने आईएएस अधिकारी बनकर देश-प्रदेश की सेवा करने का सपना साझा किया, जबकि कबीरधाम की इशिका डाहरे ने बताया कि नए विद्यालय के वातावरण से उनका अंग्रेजी में संवाद करने का आत्मविश्वास बढ़ा है।

