19वीं एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने दिखाया दम, पदक तालिका में चौथे स्थान पर कायम
2010 में नई दिल्ली में संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में हुए भ्रष्टाचार के कारण भारत की छवि धूमिल हुई थी। भारत के खिलाड़ियों में निराशा का माहौल था। तत्कालीन राजनेताओं और खेल प्रशासकों की गलती का असर भारत के उदयीमान, प्रतिभाशाली खिलाड़ियों पर पड़ रहा था। ठीक ऐसे समय में केंद्र में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता संभाली,उसके पश्चात जिस ढंग से उन्होंने भारत के खेल वातावरण में बदलाव लाने की कोशिश की उसका सकारात्मक परिणाम अब चाहे ओलंपिक खेल हो, चाहे राष्ट्रमंडल खेल हो, चाहे एशियाई खेल हो उसमें देखने को मिल रहा है। इसकी वजह प्रधानमंत्री द्वारा खेलकूद में जनता की भागीदारी बढ़ाने, खेल अधोससंरचना के निर्माण, अत्याधुनिक खेल अकादमी की स्थापना, उच्च शिक्षा प्राप्त प्रशिक्षकों की उपलब्धता और केंद्रीय बजट में 2014-15 से 2026-27 तक बढ़ते बजट का प्रावधान है। आज भारत की बहु खेल स्पर्धाओं में मिल रही सफलता के पीछे भारत सरकार के खेल मंत्रालय द्वारा खेलों इंडिया कार्यक्रम की 2017/18 से शुरुवात करना है। साथ ही भारतीय खेल प्राधिकरण (सांई) और राष्ट्रीय खेल फेडरेशन के माध्यम से खेलकूद में व्यवस्थित प्रशिक्षण आरंभ करवाना है। उपरोक्त तीनों मद में 2014-15 से लेकर 2026-27 तक केंद्र सरकार द्वारा क्रमश: 7144.77 करोड़ रुपये,7350.32 करोड़ तथा 3598.08 अर्थात कुल 18092.87 करोड़ रुपये आबंटित किया गया है। प्रधानमंत्री की मंशा है कि खेलों के विकास/ विस्तार में पैसों की कमी नहीं आनी चाहिए ताकि 2047 का विकसित भारत खेलकूद के विश्व मंच पर पहले पांच स्थान पर आ सके। भारत को खेलों की दुनिया में अग्रणी राष्ट्र बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ना सिर्फ धन से मदद की जा रही है बल्कि वे विजयी खिलाड़ियों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका उत्साहवर्धन भी करते हैं। खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के दौरान तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतने पर नकद राशि, नागरिक सम्मान और राष्ट्रीय खेल पुरस्कार बड़ी संख्या में दी जा रही है। इस तरह के प्रयास से खेलकूद भारत के गांव- गांव तक पहुंच रहा है। साथ ही खिलड़ियों के माता-पिता/3 अभिभावक भी अपने नन्हें मुन्नों को खेल में भाग लेने हेतु प्रोत्साहित कर रहे हैं। खेलकूद को अपनाने से शरीर स्वस्थ होता है। अत: स्पष्ट है कि नरेन्द्र मोदी के प्रयास से भारत में स्वस्थ नागरिक, स्वस्थ देश का निर्माण हो रहा है। परंतु दुर्भाग्य की बात है कि खेलों के संसार में भारत की बढ़ती शक्ति का सही अनुमान लगाने में आजकल मीडिया भी सफल नहीं हो सकी है। 2026 के राष्ट्रमंडल खेलों और अभी अभी संपन्न एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धि की चर्चा कम करके खिलाड़ियों की असफलता को ज्यादा उछाला जा रहा है। भारतीय खेल जगत के लिए भारत के ही खेल मीडिया की नकारात्मक टिप्पणी को अब कोई स्थान नहीं देना चाहिए। भारत की जनता के सबसे पसंदीदा प्रधानमंत्री जब स्वयं ही भारत को खेलकूद में विश्व शक्ति बनाने के लिए प्रयासरत है तो भारतीय खेल मीडिया को संयम से काम लेना चाहिए। अगर कहीं कमी नजर आती है तो अपनी बात को सार्वजनिक ना करके उसे संबंधित खेल के फेडरेशन, भारतीय ओलंपिक संघ या भारत के खेल मंत्रालय या भारतीय खेल प्राधिकरण को सूचित करना चाहिए। इन दिनों 2026 के एशियाई खेलों की तुलना 2022 से करते हुए जिस ढंग से वर्तमान खेल मीडिया निराशाजनक माहौल बना रही है इस पर सबको नियंत्रण करना चाहिए क्योंकि इससे न सिर्फ खिलाड़ियों बल्कि प्रशिक्षकों और अभिभावकों के मन में निराशा हो सकती है।

