संजीव शुक्ला ने संभाला पहले पुलिस आयुक्त का पदभार

रायपुर,23 जनवरी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज से पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू हो गई है. रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर आईपीएस डॉ. संजीव शुक्ला ने आज पदभार ग्रहण किया. जीई रोड स्थित नए कमिश्नर कार्यालय में उन्होंने ज्वाइनिंग दी. इस दौरान सभी एसीपी, डीसीपी समेत आलाधिकारी मौजूद रहे.
रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा है कि यातायात व कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण उनकी प्राथमिकताएं होंगी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग शहरों की अलग-अलग चुनौतियां होती है। राजधानी रायपुर की अलग चुनौतियां हैं। जिन अधिकारियों की रायपुर में पद स्थापना की गई है वह बहुत कुशल हैं। हमारी प्राथमिकता होगी अपराध पर पूरी तरह नियंत्रण हो।
दो बार राष्ट्रपति मेडल से हो चुके हैं सम्मानित -सीआईडी के प्रमुख अधिकारी के रूप में डॉ. संजीव शुक्ला भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं. उन्हें उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें राष्ट्रपति मेडल से सम्मानित किया गया है. डॉ. संजीव शुक्ला को राष्ट्रपति द्वारा दिए जाने वाले पुलिस पदक दो अलग-अलग श्रेणियों में दो बार साल 2010 व साल 2022 में मिले हैं.
21 शहरी थाने कमिश्नरेट में शामिल-अधिसूचना के अनुसार रायपुर नगर पुलिस जिले के तहत आने वाले 21 थाना क्षेत्रों को कमिश्नरेट सीमा में शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से— 1. सिविल लाइन2. देवेंद्र नगर3. तेलीबांधा4. कोतवाली5. गंज6. मौदहा पारा थाना7. गोल बाजार8. पुरानी बस्ती9. डी.डी. नगर10. आमा नाका11. आजाद चौक12. सरस्वती नगर13. कबीर नगर14. राजेंद्र नगर15. मुजगहन16. टिकरापारा17. उरला (नगर निगम क्षेत्र में आने वाला भाग)18. खमतराई19. गुढ़ियारी20. पंडरी21. खम्हारडीह। इन सभी थाना क्षेत्रों की कानून-व्यवस्था अब सीधे पुलिस आयुक्त के अधीन होगी।
मजिस्ट्रेटी अधिकार भी सौंपे गए-अधिसूचना के अनुसार पुलिस आयुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कई मजिस्ट्रेटी अधिकार दिए गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं. धारा 144 लागू करने का अधिकार* जुलूस, धरना और सार्वजनिक सभाओं की अनुमति या प्रतिबंध* निषेधाज्ञा और प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करना* आपात स्थितियों में त्वरित निर्णय लेनापहले ये अधिकार जिला कलेक्टर और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के पास होते थे।पुलिस कमिश्नर को मिलेंगे ये प्रमुख अधिकारपुलिस कमिश्नरी सिस्टम के तहत पुलिस कमिश्नर को विभिन्न कानूनों के अंतर्गत व्यापक अधिकार प्रदान किए गए हैं—कैदी अधिनियम, 1900 – विशेष परिस्थितियों में बंदियों को अल्प अवधि के लिए पैरोल पर रिहा करने का अधिकार.छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम, 2007 – धरना, प्रदर्शन, जुलूस व सभाओं की अनुमति तथा निषेधाज्ञा लागू करने का अधिकार.विष अधिनियम, 1919 – अवैध जहर भंडारण या बिक्री पर तलाशी वारंट जारी करने की शक्ति.जेल अधिनियम, 1894 – जेलों की सुरक्षा व्यवस्था व बंदियों से जुड़े मामलों पर कार्रवाई.अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम, 1956 – देह व्यापार से जुड़े मामलों में छापेमारी व जांच के आदेश.गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1967 – प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन का अधिकार.राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 – असामाजिक तत्वों के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई.मोटर वाहन अधिनियम, 1988 – यातायात संचालन, मार्ग निर्धारण और भारी वाहनों पर नियंत्रण.राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 – सार्वजनिक व्यवस्था या आंतरिक सुरक्षा पर खतरे की स्थिति में निरुद्ध करने का अधिकार.ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 – जासूसी की आशंका पर संवेदनशील सूचनाओं की जांच.विस्फोटक अधिनियम, 1884 एवं पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 – विस्फोटक व ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, परिवहन और उपयोग पर नियंत्रण.

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