किसानों की उपज का मिले सही मूल्य, ऑपरेशन ग्रीन्स को रियल-टाइम और किसान-केंद्रित बनाने की सांसद बृजमोहन की मांग

किसानों की उपज का मिले सही मूल्य, ऑपरेशन ग्रीन्स को रियल-टाइम और किसान-केंद्रित बनाने की सांसद बृजमोहन की मांग

लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने SAMPADA–e-NAM के रियल-टाइम एकीकरण का रखा प्रस्ताव

रायपुर । रायपुर लोकसभा क्षेत्र से वरिष्ठ सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने गुरुवार को संसद में ऑपरेशन ग्रीन्स काके तहत छत्तीसगढ़ सहित देशभर के सब्जी और फल उत्पादक किसानों की आर्थिक सुरक्षा और उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने का मुद्दा उठाया।

सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों का उल्लेख करते हुए ‘ऑपरेशन ग्रीन्स’ योजना और बाजार अंतःक्षेप योजना (MIS) के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए।
सांसद श्री बृजमोहन ने पूछा कि छत्तीसगढ़ के आकांक्षी (Aspirational) जिलों में टमाटर और फलों की कीमतों में गिरावट के दौरान किसान उत्पादक संगठनों (FPO) द्वारा 50% परिवहन और भंडारण सब्सिडी का कितना लाभ उठाया गया है?
APMC के पुराने आंकड़ों पर निर्भरता के कारण मूल्य समर्थन तंत्र में देरी होती है, जिससे किसानों को मजबूरी में कम दामों में उपज बेचनी पड़ती है। ऐसे में सांसद ने मांग की कि संपदा (SAMPADA) पोर्टल को ‘ई-नाम’ (e-NAM) के साथ रियल-टाइम एकीकृत किया जाए तथा देरी से मिलने वाली प्रतिपूर्ति (Reimbursement) के स्थान पर किसानों को तुरंत अग्रिम वित्तीय सहायता/वाउचर प्रदान करने की व्यवस्था बनाई जाए।

जिस पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह ने बताया कि, कृषि और किसान कल्याण विभाग द्वारा संचालित ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ के तहत बाजार अंतःक्षेप योजना (MIS) लागू की गई है।
बंपर पैदावार के समय जब बाजार मूल्य उत्पादन लागत से 10% या उससे अधिक गिर जाता है, तब केंद्र और राज्य सरकार 50:50 के अनुपात में किसानों के नुकसान की भरपाई और परिचालन खर्चों का वहन करती हैं।
साथ ही टमाटर, प्याज और आलू (TOP crops) जैसी नाशवान फसलों के दामों में अंतर होने पर नेफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से अंतर-राज्यीय परिवहन और भंडारण करके किसानों को राहत प्रदान की जाती है।
सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि , “छत्तीसगढ़ का किसान दिन-रात पसीना बहाकर देश का पेट भरता है। जब टमाटर, मिर्च या फलों के दाम अचानक गिरते हैं, तो किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। हमारी प्राथमिकता है कि ‘पीएम-आशा’ और ‘बाजार अंतःक्षेप योजना (MIS)’ का सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, बस्तर व बिलासपुर संभाग सहित सभी जिलों के किसानों तक पहुंचे। राज्य सरकार के समन्वय से इस योजना को धरातल पर और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा ताकि हमारे किसान भाइयों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिले।”

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