हमारे देश के खेल इतिहास में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारोत्तोलन खेल में भारत का नाम रौशन करने वाली महिला प्रतिभागियों के राज्य के बारे में जानने की कोशिश की जाए तो हम पाते कि अधिकतर महिला भारोत्तोलक भारत के राज्य विशेष से हैं। भारोत्तोलन के खेल में एक खिलाड़ी को दो तरह से अपने अंदर की खेल शक्ति को दिखाने का अवसर मिलता है, जिसे क्रमशः क्लीन एंड जर्क तथा स्नैच कहते हैं। क्लीन एंड जर्क की विधा में भारोत्तोलक लोहे के राड जिसे बारबेल कहते हैं उसमें निश्चित भार से लदी प्लेट होती है उसको उठाते हैं। इस बारबेल को उठाने का तरीका होता है। इसमें भार को पहले जमीन से कंधों के सामने तक (क्लीन) फिर कंधों से सिर के ऊपर (जर्क) तक ले जाया जाता है। दूसरी विधा स्नैच में भार प्लेट के विभिन्न वजन से लदी हुई बारबेल को एक बार में एक गति से सिर के ऊपर तक उठाया जाता है। दोनों ही विधा में बारबेल को कम से कम तीस सेकंड तक उठाकर रखना पड़ता है। जब निर्णायक हूटर बजाते हैं तब तक बारबेल को फ्लोर में गिराया जाता है। हालांकि आंध्रप्रदेश की रहने वाली भारत की सुश्री कर्णम मल्लेश्वरी ने 2000 के सिडनी ओलंपिक खेलों में पहली बार कांस्य पदक जीतकर इस खेल को भारत में लोकप्रिय बनाया. लेकिन 2000 से 2026 तक के भारतीय खिलाड़ियों के भारोत्तोलन में प्रदर्शन का आकलन किया जाए तो साफ हो जाता है कि हमारे देश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त करने वाले महिला भारतोलको में अधिकांश मणिपुर राज्य से हैं। इनमें से हमारे देश की महान खिलाड़ियों में से एक मीरा बाई चानू हैं उन्होंने 2026 के राष्ट्रमंडल खेलों में 2014 से लेकर 2026 तक चार बार भारोत्तोलन में पदक जीता है। जिसमें 2014 में रजत फिर 2018,2022 व 2026 में अपने वजन वर्ग में तिकड़ी लगाते हुए लगातार तीन स्वर्ण पदक जीता है।19 वर्ष की उम्र से लगातार भोरोत्तोलन के खेल से जुड़े रहना और 31 वर्ष की उम्र में अपने देश के लिए विश्व स्पर्धाओं में पदक जीतना किसी भारतीय महिला को महान खिलाड़ी का दर्जा देने के लिए पर्याप्त है। मणिपुर राज्य पुलिस सेवा में कार्यरत मीराबाई ने अब तक राष्ट्रमंडल खेलों के साथ आधुनिक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों 2020, विश्व चैंपियनशिप 2017, 2022,2025 एशियाई चैंपियनशिप 2020 में पदक हासिल किया है। मीराबाई के अलावा बिंदयारानी देवी, संजीता चानू, एन सोनिया चानू, रेनूबाला चानू, एल.मोनिका देवी, कुंजरानी देवी, सानामाचा चानू ने भी विश्व स्तरीय प्रदर्शन करके अपने देश के लिए पदक हासिल किया है. सौभाग्य से उक्त सभी महिलाएं मणिपुर राज्य से हैं। अब प्रश्न यह
उठता है कि मणिपुर जैसे छोटे राज्य से इतनी प्रतिभाशाली भारोत्तोलक कैसे उभरकर आ सकती हैं। खोज पड़ताल के बाद स्पष्ट है कि ये सभी महिला खिलाड़ी दूरस्थ ग्रामीण व पहाड़ी अंचल में रहती है। इन्हें रोज कई किलोमीटर चलकर स्कूल जाना पड़ता है. रोजमर्रा के जरूरत की सामग्री खरीदने के लिए पहाड़ियों के बीच से रोज गुजरना पड़ता है। कई बार पीने के पानी के लिए पहाड़ियों को पार करके जाना पड़ता है। धार्मिक पूजा पाठ के लिए भी ये कई किलोमीटर पैदल चलते हैं। मीराबाई चानू के जीवन के बारे में अध्ययन करने से पता चला कि वे पहाड़ियों के बीच जंगल जाकर जलाने के लिए लकड़ी बिनती थी और लकड़ी का बड़ा बंडल लेकर घर आती थी, तब घर वालों, शिक्षकों, पड़ोसियों को लगा कि यह इतना वजन उठाकर सब कुछ आसानी से कर सकती है, तब उन्होंने मीराबाई को भारोत्तोलन खेल के लिए प्रोत्साहित किया इस प्रकार जब ग्रामीण पहाड़ी वनांचल क्षेत्र के रहवासी स्वयं होकर आना जाना करते हैं तो उनकी मांस पेशियों में ताकत बढ़ जाती है। इसलिए उत्तर पूर्व की प्रतिभागी भारोत्तोलन में सफल होती है। दूसरी बात जब वे पहाड़ी या जंगल जाती हैं तो कई तरह के वन पक्षियों, वनपशुओं कीड़े मकोड़ों का सामना करती हैं अत: साहसी होती हैं। भारोत्तोलन के खेल में सफलता पाने के लिए शारीरिक शक्ति के साथ साहसी होना जरूरी होता है। ऐसे क्षेत्र के निवासी आज्ञाकारी और मेहनती होते हैं जिसके कारण उन्हें उनके परिश्रम का फल मिलता है वे कामयाब होते हैं। अतः भारत के किसी क्षेत्र के खिलाड़ी की सफलता का आकलन उनके रोजाना की दिनचर्या, गतिविधि से किया जा सकता है . फिर एक खिलाड़ी को प्रतियोगिता के लिए तैयार करने आगे की जिम्मेदारी भारत सरकार के केंद्रीय खेल मंत्रालय के माध्यम से भारतीय खेल प्राधिकरण के अकादमी में सघन प्रशिक्षण द्वारा किया जाता है। छत्तीसगढ़ भी एक अनुसूचित जन जाति बहुल, वनांचल, पहाड़ी, ग्रामीण अंचल में ऊबड़ खाबड़ मार्ग, छोटे छोटे नदी नाले वाला, प्रदेश है . यहाँ पर खेल विभाग और जागरूक नागरिक, मीडिया कर्मी की मदद से खोज की जाए तो एथलेटिक्स, साइक्लिंग, तैराकी, तीरंदाजी , केनोइंग, नौकायन,फुटबाल, कुश्ती,ट्रायथलान, रोलबॉल,स्केटिंग, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, जूडो, मार्शलआर्ट,मलखंभ,
आदि खेलो की विश्व स्तरीय प्रतिभाएं निकल सकती हैं .
परखनेवाले चाहिए भारत में हर खेल में हैं प्रतिभाएं

