स्वस्थ तन ,मन हेतु भारतीय साधना पद्धति हुई विश्वव्यापी

21 जून: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसार को बताया इसका महत्व
आलेख . जसवंत क्लॉडियस,वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर,रायपुर.

शरीर का स्वस्थ होना समाज के प्रगति की पहली शर्त है। मानव सभ्यता के आरंभ में जब ध्वनि,वायु, जल प्रदूषित नहीं होते थे तब मानव जीवन सरल व शांत था। शारीरिक रूप से जब मनुष्य चुस्त दुरुस्त रहता है तो उसके द्वारा किसी भी कार्य के निष्पादन की गति बढ़ जाती है। सच है जब लक्ष्य ठीक समय पर प्राप्त होता है तो स्वभावत: समाज की प्रगति तेजी से होती है। पुरातन भारत से आगे बढ़ते हुए मानव सभ्यता में समय के परिवर्तन के साथ साथ खान-पान, रहन-सहन, कार्य शैली में बदलाव होते चला गया। उसी समय के महान ऋषि मुनियों, संतों को आभास हो गया था कि आधुनिकता की ओर मानव जाति के बढ़ने के साथ- साथ उन्हें अपने दैनिक क्रियाकलाप में परिवर्तन करना पड़ेगा। पहले शारीरिक शक्ति से जो कार्य निपटाये जाते थे समय के आगे बढ़ने के साथ औजारों से, फिर मशीनों से संपन्न होंगे। इस तरह हजारों वर्ष पूर्व के हमारे देश के महान विभूतियों को लगने लगा कि आने वाले समय में मनुष्य को शारीरिक व मानसिक संतुलन बनाए रखने में कठिनाई होगी तो उन्होंने दूरदशिता से निर्णय लेते हुए आलस्य, बीमारी, कमजोरी को दूर करने के उपाय सुझाये। इसे ही योग कहा गया। इस शब्द का संबंध शारीरिक पहलुओं, आसनों और प्राणायाम से है। योग का सबसे पहला उल्लेख भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में मिलता है। उपनिषद में विशेष रूप से कठोपनिषद, श्वेताश्वतरोप निषद और योगोपनिषदों में योग का गहरा आध्यामिक और दार्शनिक उल्लेख है। हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता नामक ग्रंथों में योग के शारीरिक पहलुओं, आसनों तथा प्राणायाम का विस्तृत वर्णन बतलाया गया है। भगवद् गीता में योग को जीवन जीने की कला और मोक्ष का मार्ग बताया गया है।जिसमें कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्ति योग प्रमुख है। दूसरी तरफ भारत के प्राचीन ग्रंथों में से एक पतंजलि योगसूत्र योग का सबसे प्रमुख और व्यवस्थित मूलग्रंथ है। इस ग्रंथ को महर्षि पतंजलि द्वारा संकलित किया गया। जिसमें योग को चित्त वृत्तियों का निरोग बताया गया है तथा अष्टांग योग ( यम, नियम, आसन ,प्राणायाम,
प्रत्याहार , धारणा, ध्यान और समाधि का विस्तार से वर्णन किया गया है। इस प्रकार अगर हम योग को अभिव्यक्त करना चाहें तो ठोस प्रमाणिकता के साथ कह सकते हैं कि योग पुरातन भारतीय ऋषिमुनियों और तत्ववेत्ताओं द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है।
पतंजलि ने चित्त की वृत्तियों के निरोध को योग कहा है और इसके आठ अंग बताए हैं। यम, नियम, आसन, प्राणायाम,प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि। इस तरह प्राचीन भारत में स्वस्थ तन एवं मन की प्राप्ति हेतु भारतीय साधना पद्धति ही योग है। भारतीय परंपरा व ज्ञान को देश विदेश तक पहुंचाने की आवश्यकता को समझते तो सभी भारतीय हैं लेकिन
योग के महत्व को इस जगत को बताने की दिशा में 15 अगस्त 1947 को भारत को मिली स्वतंत्रता के पश्चात किसी भी व्यक्ति या संस्था ने प्रयास नहीं किया। मई 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में महान राष्ट्रवादी माननीय नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदारी मिली तो उन्होंने अपना पक्ष विश्व व्यापी संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ के समक्ष रखा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पहल को संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्यों ने गर्व के साथ स्वीकार किया और सारे जगत में संयुक्त राष्ट्र संघ के 193 देशों ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने के निर्णय 11 दिसंबर 2014 को स्वीकार किया। इस प्रकार 21 जून 2015 से प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा योग दिवस मनाये जाने की परंपरा आरंभ हुई। यही नहीं माननीय प्रधानमंत्री द्वारा भारत की इस साधना पद्धति को संयुक्त राष्ट्र संघ के पदाधिकारियों के समक्ष विनम्रता लेकिन मजबूती द्वारा प्रस्तुत करने से योग के महत्व को अत्यंत गंभीरता से लिया गया. इस बात का प्रमाण यह है कि 2015 से लगातार प्रत्येक वर्ष पृथक पृथक विषय के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है . निर्धारित विषय 2015 में सद्भाव और शांति के लिए योग, 2016 में सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए योग ( युवाओं को जोड़े) 2017 में स्वास्थ्य के लिए योग, 2018 में शांति के लिए योग,2019 में हृदय के लिए योग, 2020 में घर पर योग, परिवार के साथ योग, 2021 में कल्याण के लिए योग,2022 में मानवता के लिए योग,2023 में वसुधैव कुटुंबकम के लिए योग,2024 में स्वयं और समाज के लिए योग,2025 में एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य के लिए योग और अब इस वर्ष 2026 में स्वस्थ आयु के लिए योग विषय दिया गया है . अब तो योग को खेल के रूप में मान्यता दे दी गई है .और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक खेल संघों ने योग को योगासन नाम देकर स्पर्धा आयोजित करना शुरू कर दिया है .

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