सड़कें ठीक करने के लिए 15 अक्टूबर तक की जो डेडलाइन दी थी, उसका क्या हुआ?
रायपुर/17 अक्टूबर 2026। लोक निर्माण विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली, भ्रष्टाचार, और प्रदेश भर में सड़कों की बदहाली को लेकर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की सड़कों की हालत आज किसी से छिपी नहीं है। प्रदेश की राजधानी से लेकर दूर-दराज के इलाकों तक सड़कें पूरी तरह गायब हो चुकी हैं और सिर्फ जानलेवा गड्ढे बचे हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) विकास का नहीं, बल्कि डामर घोटाले और टेंडर कमीशनखोरी का केंद्र बन चुका है। विष्णुदेव साय की सुशासन की बातें सिर्फ विज्ञापनों में हैं, धरातल पर जनता धूल फांकने और हादसों में जान गंवाने को मजबूर है। कांग्रेस पार्टी जनता के इस दर्द को खामोशी से नहीं देखेगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर और सरगुजा तक राज्य की मुख्य सड़कें और राजमार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। निर्माण के नाम पर सिर्फ टेंडर निकाले जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर काम पूरी तरह ठप है। पीडब्ल्यूडी विभाग में कमीशनखोरी और सिंडिकेट राज हावी हो चुका है। घटिया किस्म के डामर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पहली बारिश भी नहीं झेल पाता। पसंदीदा ठेकेदारों को रेवड़ियों की तरह टेंडर बांटे जा रहे हैं, जबकि कार्य की गुणवत्ता जांचने वाला कोई नहीं है। बजट का एक बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। धूल, गड्ढों और आए दिन हो रहे भीषण सड़क हादसों के कारण जनता और राहगीर अपनी जान गंवा रहे हैं। सड़कों की बदहाली से लॉजिस्टिक्स और व्यापार सुस्त पड़ गया है, वाहनों का मेंटेनेंस खर्च बढ़ गया है। एम्बुलेंस गड्ढों में फंस रही हैं और धूल के कारण सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ के हर कोने में बुनियादी ढांचे और ग्रामीण, शहरी सड़कों का सुदृढ़ीकरण प्राथमिकता पर किया गया था। सड़क सुधार योजना और पीडब्ल्यूडी के कड़े निरीक्षण तंत्र के कारण सड़कों की गुणवत्ता बनी रहती थी, गांव के भीतर किसानों के खेतों तक भी धरसा सड़क की योजना बनाएं गए थे। आज वही छत्तीसगढ़ ‘धूल और गड्ढों का राज्य’ बनकर रह गया है। यह सिर्फ गड्ढे नहीं, भाजपा के भ्रष्टाचार के गड्ढे हैं। भाजपा सरकार ने सड़कों के नाम पर डामर घोटाला और टेंडर कमीशनखोरी का नया रिकॉर्ड बनाया है। छत्तीसगढ़िया जनता गाढ़ी कमाई का टैक्स दे रही है, और भाजपा सरकार उन्हें धूल और मौत के गड्ढे दे रही है। स्थानीय जनता के जान-माल की रक्षा करने में यह सरकार पूरी तरह नाकाम सिद्ध हुई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि सड़क बनने के कुछ हफ्तों के भीतर ही डामर कैसे बह जाता है? घटिया सामग्री की आपूर्ति करने वाली कंपनियों और भ्रष्ट अफसरों पर अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई? क्या यह सच नहीं है कि पीडब्ल्यूडी विभाग में ठेके सिर्फ उन्हीं को मिल रहे हैं जो ‘खास सिंडिकेट’ को तय कमीशन पहुंचा रहे हैं? भाजपा सरकार ने सड़कें ठीक करने के लिए 15 अक्टूबर तक की जो डेडलाइन दी थी, उसका क्या हुआ? क्या सरकार की डेडलाइन सिर्फ कागजी जुमला थी? सड़क हादसों की जिम्मेदारी किसकी? खराब सड़कों और गड्ढों के कारण हो रही मौतों और हादसों की नैतिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और पीडब्ल्यूडी मंत्री कब लेंगे? सड़कों की मरम्मत और पैचवर्क के नाम पर जो करोड़ों रुपये जारी किए गए, वह पैसा किस मंत्री और अफ़सर की जेब में गया?

