नई दिल्ली,26 सितंबर। भारत के पड़ोसी देशों श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल से होता हुआ अब Gen-Z का विद्रोह दक्षिण-पूर्वी एशिया के छोटे से देश तक जा पहुंचा है। यह देश है पूर्वी तिमोर, जहां युवाओं के प्रदर्शन के आगे वहां की संसद और सांसद ने घुटने टेक दिए हैं। सांसदों ने युवाओं के गुस्से और प्रदर्शन को देखते हुए संसद में उस कानून के खिलाफ मतदान किया है, जो पूर्व राष्ट्रपतियों, पूर्व प्रधानमंत्रियों-मंत्रियों और सांसदों के आजीवन पेंशन का हकदार बनाता था। अब सांसदों ने Gen-Z के विरोध प्रदर्शन के सामने नतमस्तक हो उस कानून को संसद में प्रस्ताव पारित कर रद्द कर दिया है।
पूर्वी तिमोर एक गरीब देश है लेकिन पूर्व राष्ट्रपतियों, पूर्व प्रधानमंत्रियों-मंत्रियों और पूर्व सांसदों को भारी भरकम राशि आजीवन पेंशन और भत्ते के रूप में दी जा रही थी। युवाओं ने इसका विरोध किया था। इतना ही नहीं सरकारी अधिकारियों को मिलने वाले भारी भरकम भत्तों पर भी कैंची चलाई गई है। युवाओं का तात्कालिक विरोध इस बात पर था कि मौजूदा सांसदों की गाड़ियों के लिए 42 लाख डॉलर की राशि खर्च की गई थी।
इसके बाद छात्रों के एक वर्ग ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह विरोध पूर्व राष्ट्रपतियों, पूर्व प्रधानमंत्रियों-मंत्रियों और पूर्व सांसदों को मिलने वाले आजीवन पेंशन तक जा पहुंचा, जिसके लिए हर साल लाखों डॉलर सरकार को खर्च करने पड़ रहे थे। पूर्व संसद सदस्यों और सरकारी अफसरों को आजीवन पेंशन देने का नियम 2006 में बनाया गया था। इस नियम के अनुसार उन्हें अंतिम वेतन के बराबर आजीवन पेंशन देने की व्यवस्था थी जो अब युवाओं के विरोध-प्रदर्शन के बाद रद्द कर दिया गया है।
शुक्रवार को संसद के कुल 65 में से 62 सांसदों ने इस कानून के खिलाफ एकमत होकर वोट डाले। संसद में प्रस्ताव पारित होने के बाद खुंटो पार्टी के सांसद ओलिंडा गुटुरेस ने यूनिवर्सिटी छात्रों से अपील की कि आपकी मांगें पूरी कर दी गई हैं, इसलिए अपना आंदोलन वापस ले लें और विरोध-प्रदर्शन बंद कर दें। अब यह कानून राष्ट्रपति जोस रामोस होर्ता के पास जाएगा, जो स्वतंत्रता सेनानी और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता हैं। उनके दस्तखत करते ही पूर्व राष्ट्रपतियों, पूर्व प्रधानमंत्रियों-मंत्रियों और पूर्व सांसदों समेत अधिकारियों के पेंशन पर पाबंदी लग जाएगी।
Gen-Z का एक और देश में बवाल

