केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने तकनीकी नवाचारों की सराहना की, खनन प्रभावित क्षेत्रों में डीएमएफ राशि के प्रभावी उपयोग पर जोर
रायपुर। छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और राजस्व वृद्धि के साथ देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश को खनिजों से 16,738 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि खनिज संपदा का लाभ स्थानीय लोगों, विशेषकर खनन प्रभावित क्षेत्रों और जनजातीय समुदायों तक पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री निवास में मंगलवार को केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की उपस्थिति में खनन एवं कोयला क्षेत्र की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इसमें खनिज अन्वेषण, खनिज ब्लॉकों की नीलामी, कोयला उत्पादन, क्रिटिकल मिनरल्स, जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) और आधुनिक तकनीक के उपयोग की समीक्षा की गई।
केंद्रीय मंत्री रेड्डी ने खनिज ऑनलाइन 2.0, ड्रोन आधारित निगरानी, खनन गतिविधियों की स्टार रेटिंग और डिजिटल व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों में डीएमएफ राशि का अधिकतम उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं के विकास में करने पर जोर दिया। साथ ही नए खनिज भंडारों की खोज, क्रिटिकल एवं रणनीतिक खनिजों के अन्वेषण और लंबित खनिज ब्लॉकों को शीघ्र संचालित करने की आवश्यकता बताई।
बैठक में लिथियम, ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व, वैनेडियम, गैलियम, फॉस्फोराइट और टिन जैसे खनिजों के विकास पर चर्चा हुई। कोयला उत्पादन बढ़ाने, खदानों के वैज्ञानिक समापन और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खनन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय समुदायों के हित, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। तकनीक आधारित निगरानी से पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाई जा रही है।
खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि
वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को खनिजों से 16,738 करोड़ रुपए का राजस्व मिला। कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर और टिन उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई। खनिज ब्लॉकों की नीलामी और नए संसाधनों के विकास पर भी काम जारी है।
टीआईएन पोर्टल से जनजातीय संग्राहकों को लाभ
बस्तर में टिन अयस्क खरीदी और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए टीआईएन पोर्टल शुरू किया गया है। वर्ष 2025-26 में 20,895 किलोग्राम से अधिक टिन अयस्क के लिए लगभग 3.81 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया, जो पिछले वर्ष के मुकाबले चार गुने से अधिक है।

