छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नियमानुसार उठाया गया सराहनीय कदम, 156 खिलाड़ी हुए शासकीय सेवा के पात्र
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर, रायपुर, छ. ग.
समय के परिवर्तन के साथ मानव सभ्यता ने खेलकूद को कभी मनोरंजन, कभी उत्तम शारीरिक स्वास्थ्य का खजाना माना, तो कभी “खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब, पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब” जैसी कहावत द्वारा शर्मसार किया। आज परिस्थिति बदल चुकी है. यह से as भी स्वीकार करते हैं कि खेलकूद से मनोरंजन, स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है तथा अब खेलने कूदने से भी पढ़ने लिखने के समान नवाब बन सकते हैं। परिवार में समाज में आपका एक ऊंचा स्थान हो सकता है।यह बात अब हवा हवाई न होकर धरातल पर साबित हो गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने 2023 से 2028 तक के कार्यकाल के पहले मध्यांतर में इस प्रदेश के खिलाड़ियों की थमती हुई सांसों में जीवन रूपी हवा भर दिया है। एक नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होकर नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य बना तो इस प्रदेश के खिलाड़ियों, खेल संघों, निर्णायकों, प्रशिक्षकों में एक नया उत्साह भर आया। आंखों में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी, प्रशिक्षक, निर्णायक, बनने का ख्वाब छा गया। पर भारतीय खेल इतिहास का टर्निग प्वाइंट तो तब आया जब वर्ष 2000 के दौरान सिडनी ओलंपिक में भारत की महिला भारोत्तोलक कर्णम मल्लेश्वरी ने कांस्य पदक जीता फिर उन पर मान- सम्मान के साथ धन की वर्षा हुई वह 21 वीं सदी के पहले दशक में जन्में बच्चों व उनके अभिभावकों के मन मस्तिष्क में बस गया कि खेलकूद भी बहुत अच्छा होता है जिसमें बच्चों, किशोरों,युवाओं का भविष्य है इसमें कैरियर बनाने प्रोत्साहन देना चाहिए। दूसरी बात जो खेल आलेख लिखने के दौरान शोध के रूप में मैंने खोज निकाला वह है जबकि वर्ष 2000 में कर्णम मल्लेश्वरी ने ग्रीष्मकालीन आधुनिक ओलंपिक खेलों में कांस्य जीता तो भारत में उभरते हुए खेल प्रतिभाओं को ओलंपिक खेलों के विभिन्न 28 प्रकार के कोर गेम्स में भाग लेना चाहिए। ओलंपिक में मल्लेश्वरी के एक कांस्य पदक से पूरे भारत में खेलकूद की दशा व दिशा बदल गई। खेलसंघ के पदाधिकारियों से लेकर, खेल प्रशासकों, खेल अधिकारियों, पूर्व खिलाड़ियों ने तब ओलंपिक में शामिल 28 कोर गेम्स को बढ़ावा देना आरंभ किया। उसका परिणाम देखिए 1996 से लेकर 2024 तक हमारेदेश के खिलाड़ियों ने प्रत्येक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में भारतीय ध्वज को ओलंपिक खेलों के पोडियम में लहराया है। छत्तीसगढ़ जैसे नवगठित राज्य के खेल प्रेमियों ने भी इसी बात को ध्यान में रखते हुए खेल मैदान, खिलाड़ी तथा टीम बनाना आरंभ किया।
फिर खेलों के प्रति आकर्षण पैदा करने व रोजगार दिलाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों को उचित सम्मान दिये जाने नियम बनाया आखिरकर यह नियम भी आ गया। 2016-17 तक तो ठीक चला परंतु 2018-19 और 2019-20 से उत्कृष्ट खिलाड़ियों की शासकीय सेवा देने के निर्णय के क्रियान्वयन में बाधा आ गई। 2018 से 2023 तक कांग्रेस का शासन रहा जिन्होंने खिलाड़ियों की उपेक्षा की इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया लेकिन अंतत:05 अगस्त 2026 को आठ वर्ष तक लंबित प्रकरण का निपटारा हुआ और 2018-19,2019-20 में घोषित 156 सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का सम्मान उन्हें शासकीय सेवा के पात्र चुनकर हुआ। छत्तीसगढ़ में 5 अगस्त 2026 का दिन न जाने कितने परिवारों के लिए दिवाली,ईद, क्रिसमस या नया वर्ष साबित हुआ परंतु यह सच है कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और खेल मंत्री अरुण साव के ठोस व अडिग निर्णय के कारण न जाने कितने आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों के अभिभावकों, परिवार के सदस्यों के आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। अपने घरों, परिवार समाज में जवानी के समय रोजी रोटी नहीं कमाने परंतु खेलकूद के लिए समय देने वाले अब नौकरी प्राप्त कितनों खिलाड़ियों को नकारा, बेकार, फिजूलखर्जी, नालायक समझकर हंसी उड़ाने वालों की बोलती बंद हो गई। छत्तीसगढ़ के इतिहास में 05 अगस्त एक ऐसा दिन साबित हुआ। इन सरकारी नौकरी प्राप्त खिलाड़ियों को उधारी का जूता, पोशाक, खेल सामग्री वाले दुकान के सामने से मुंह छिपाकर या रास्ता बदलकर जाने को नहीं परंतु सीना तानकर निकलने का मौका मिला।धन्यवाद छत्तीसगढ़ सरकार .

