पदक जीतते ही ईनाम देने में हम कब होंगे परिपक्व?

राष्ट्रमंडल खेल 2026, राजनांदगांव की ज्ञानेश्वरी यादव ने रजत पदक जीतकर इतिहास रचा
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस,वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर, रायपुर. छ ग

2026 में ग्लास्गो स्काटलैंड में जारी राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ी अपनी चुनौती पेश कर रहे हैं। भारत ने 1930 से आरंभ इन खेलों में अब तक आयोजित 22 संस्करणों में से 1030,1950,1962,1986 में भाग नहीं लिया। भारोत्तोलन में हमारे भारोत्तोलन ने 46 स्वर्ण, 36 रजत तथा 36 कांस्य पदक जीते हैं। 20 वीं सदी में भले ही सुविधा,प्रशिक्षण, खेल सामग्री का अभाव रहा हो परंतु 21वीं सदी में केंद्र सरकार ने महिला खिलाड़ियों को धीरे-धीरे प्रोत्साहित करना शुरू किया। आखिरकार 21 वीं सदी के पहले राष्ट्रमंडल खेल 2002 में सबका भ्रम टूटा और पहली बार भारतीय महिला भारोत्तोलक कुंजरानी देवी ने 48 किग्रा. वजन वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत के खेल इतिहास में एक नये अध्याय की शुरुवात की। हालांकि इसके पहले सिड़नी 2000 के ओलंपिक खेलों में भारत की कर्णम मल्लेश्वरी ने 67 कि.ग्राम वजन वर्ग में भारत के लिए किसी महिला खिलाड़ी द्वारा किसी भी खेल में किसी अंतरराष्ट्रीय बहु खेल स्पर्धा में पहली बार कांस्य पदक जीता। कुंजरानी देवी ने भारत के लिए नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए भारोत्तोलन के 49 कि.ग्रा. वर्ग में के तीनों इवेंट ओवर आल, क्लीन एंड जर्क तथा स्नेच का स्वर्ण भारत माता की झोली में ला दिया। फिर तो महिलाओं द्वारा भारोत्तोलन में पदक प्राप्त करने का सिलसिला आरंभ हुआ .2014 के पुरूष भारोत्तोलन दल में रायपुर छत्तीसगढ़ के रूस्तम सारंग ने 62 कि.ग्रा वर्ग में भाग लिया। और वे सातवें स्थान पर थे। 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के दल के प्रमुख विक्रम सिसोसिदया थे जो कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव है। वर्तमान में 2026 के राष्ट्रमंडल खेलों के 22 वें संस्करण में मीराबाई चानू ने लगातार तीसरी बार और 2014 से निरंतर चौथी बार पदक हासिल कर न सिर्फ महिलाओं बल्कि भारत का मान बढ़ाया है।2026 के राष्ट्रमंडल खेलों में अब तक की बिंदयारानी देवी ने कांस्य पदक प्राप्त कर लिया है। जबकि राजनांदगांव छत्तीसगढ़ की ज्ञानेश्वरी यादव ने 53 कि.ग्रा. वर्ग में रजत पदक जीतकर छत्तीसगढ़ जैसे वनांचल, अनुसूचित जनजाति बहुल साथ ही साथ सर्वांगीण विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ते हुए राज्य के निवासियों को गौरवान्वित किया है। छत्तीसगढ़ पुलिस में एएसआई के पद पर कार्यरत ज्ञानेश्वरी ने पिछले सात वर्षों से भारोत्तोलन खेल भी के लिए अपने आपको समर्पित कर दिया है। साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में जन्मी ज्ञानेश्वरी के पिता बिजली मेकेनिक हैं और पूर्व में भारोत्तोलक रह चुके हैं। वे राजनांदगांव से 8 कि.मी. दूर बोडि़या गांव के रहने वाले हैं। बिटिया के खेल भविष्य को संवारने के लिए गांव से राजनांदगांव आकर उन्होंने अपनी लाडली को स्व. पुरुषोत्तम आजमानी द्वारा स्थापित जयभवानी व्यायाम शाला में भर्ती किया जहां पर ज्ञानेश्वरी को राष्ट्रीय स्तर पर भारोत्तोलक स्थापित करने में उनके शुरुवाती, स्थानीय कोच अजय लोहार और खानपान महंगा होने के कारण आर्थिक मदद करने वालों का महत्वपूर्ण योगदान था। राष्ट्रीय चैंपियन होने पर 2022 से भारत सरकार द्वारा संचालित पटियाला स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के अकादमी में उन्हें निरंतर गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसका पहला परिणाम बेहद सुखद रहा .ज्ञानेश्वरी ने जूनियर विश्व भारोत्तोलन प्रतियोगिता में दुनिया भर की उभरती हुई प्रतिभाओं को पछाड़ते हुए देश के लिए रजत पदक हासिल किया तथा अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।ज्ञानेश्वरी छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के रजत जयंती वर्ष में किसी छत्तीसगढ़िया द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर की किसी बहुखेल स्पर्धा के एकल खेल में पदक जीतने वाली पहली प्रतिभागी हो गई है . इतनी बड़ी सफलता मिलने पर दूसरे राज्यों में सरकारी नौकरी, नगद राशि, भूखंड आदि पुरस्कार देने की परंपरा रही है परंतु छत्तीसगढ़ के किसी सरकारी या गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा अब तक ज्ञानेश्वरी की उपलब्धि को गंभीरता से नहीं लिया गया है। छत्तीसगढ़ में एन.एम.डी.सी. एस.ई.सी.एल. एस.ई.सी. रेलवे भिलाई इस्पात संयंत्र, एनटीपीसी और जिंदल का इस्पात संयंत्र है। सभी को ऐसे लाजवाब खिलाड़ी के लिए आगे बढ़कर ईनाम देना चाहिए। छत्तीसगढ़ सरकार को ज्ञानेश्वरी की पदोन्नति उपपुलिस अधीक्षक(डी.एस.पी.) में करने का निर्णय लेने में विलंब नहीं करना चाहिए। ऐसे निर्णय प्रदेश की युवा पीढ़ी के साथ नए खिलाड़ियों के लिए प्रेरणाश्रोत होंगे तथा छत्तीसगढ़ में खेल का माहौल बनेगा।

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