चैंपियन अर्जेंटीना की जीत ने बदला नजारा

फीफा विश्वकप 2026

जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर, रायपुर, छ ग .
किसी भी टीम प्रतिस्पर्धा का विजेता कोई एक टीम ही होता है। इन दिनों उत्तरी, मध्य अमरीका महाद्वीप की धरती पर पुरुषों के वर्ग के फुटबॉल विश्वकप पर कब्जा जमाने के लिए 48 देशों के बीच संघर्ष जारी है। अब तो सेमीफायनल दौर में यह चैंपियनशिप पहुंच चुका है। आरंभिक दौर के बाद राउंड आफ 32, फिर राउंड आफ 16 का चक्र समाप्त हो चुका है। क्वार्टर फाइनल में आठ देशों की टीम अंतिम चार में जगह बनाने की रणनीति बना रहे हैं. पहले क्वार्टर फायनल में यूरोप महाद्वीप की टीम फ्रांस ने अफ्रीका महाद्वीप की टीम मोरक्को को 2-0 से पराजित करके सेमीफायनल में जगह बनाई है। अब जबकि फीफा विश्वकप 2026 जो कि पहले 11 जून से आरंभ हुई। धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ती जा रही है। टीम तथा रैफरी के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। इसकी शुरुआत वर्तमान विजेता अर्जेंटीना और मिस्र के बीच राउंड आफ 16 के एक मैच हुए दौरान हुई। मैच के अंतिम 12 मिनट तक मिस्र की टीम 2-0 से आगे थी। 2022 की चैंपियनशिप और वर्तमान फीफा की वरीयता सूची में प्रथम स्थान पर काबिज है .दक्षिण अमेरिका महाद्वीप की अर्जेंटीना की टीम के खिलाडिय़ों ने अंतिम 12 मिनट में मिस्र की टीम पर दनादन तीन गोल करके सबको हतप्रभ कर दिया और मैच जीतकर क्वार्टर फायनल में जगह बना ली। खेल में जब दो टीम खेलती है तो एक की पराजय सुनिश्चित होती है. आमतौर पर टीम अपनी हार को स्वीकार कर लेती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। मिस्र की टीम के कोच होसम हसन ने इस अप्रत्याशित पराजय के पश्चात कहा कि उनकी टीम पक्षपात की शिकार हुई। इस मैच में रेफरी ने मैदान में हो रहे खेल के अनुसार निर्णय नहीं दिये बल्कि अर्जेंटीना जैसी विश्व की नंबर एक टीम तथा महान खिलाडिय़ों से सजी अर्जेंटीना की टीम को हर स्तर पर समर्थन दिया। वस्तुत: मिस्र का इस तरह परास्त होना उनके मुंह से जीत के निवाले को छिन लेना जैसा है। ऐसी आपत्ति को मीडिया ने भी जोर शोर से उछाला। अफ्रीकी देश मिस्र की फीफा द्वारा 11 जून 2026 को जारी रेकिंग के अनुसार विश्व में वे 29 वें स्थान पर हैं। ऐसी स्थिति में पहले स्थान की अर्जेंटीना की टीम के लिए आखिरी 12 मिनट में विपक्षी टीम पर ताबड़तोड़ तीन गोल करना ताज्जुब की बात नहीं है। वैसे भी इस तरह की पुरानी शिकायतों से आपबीती को देखते हुए फीफा ने मैदान के रैफरी को निर्णय देने में मदद करने के लिए रेफरी असिस्टेंट सिस्टम का प्रावधान फीफा के मुकाबलों के लिए किया है। इसका मुख्य कार्य मैदान में कार्यरत रैफरी की मदद करना, गलतियों को सुधार जाना है, ताकि मैच में पूरी पारदर्शिता व निष्पक्षता बनी रहे। आज के आधुनिक युग में जब इस तरह की सुविधा उपलब्ध है तो फिर रैफरी को चूक नहीं करनी चाहिए। मिस्र में खिलाडिय़ों की आपत्ति को नजरअंदाज करना आज फीफा विश्व कप के मुकाबलों की निष्पक्षता पर तरह के तरह के प्रश्न को उठा रहा है। इस आरोप के बाद ईरान,अल्जीरिया, आस्टेलिया,क्रोएशिया, बेल्जियम, दक्षिण अफ्रीका, पुर्तगाल और अमेरिका आदि देशों के खिलाडिय़ों, प्रबंधकों ने उनके साथ हुए अन्याय का पिटारा खोल दिया है। मुझे याद है 1986 याने पिछले चालीस वर्षों से फीफा विश्वकप के मैच की जानकारी में कभी ऐसा अवसर नहीं आया। इस बार फीफा के पदाधिकारियों के समक्ष भी समस्या खड़ी हो गई है। कोई एक टीम रैफरी के निर्णय से असंतुष्ट न हो तो बात समझ में आती है लेकिन 48 में से 8 से अधिक देश रैफरी के निर्णय से असंतुष्ट है तो इसे रैफरी की मानवीय भूल है मानकर और जो हो रहा है उसे खेल भावना से जोड़ कर छोड़ दिया जाता है तो भविष्य में यह फीफा के अन्य आयोजनों के लिए बड़ी समस्या बन जाएगी। अगर ऐसा ही आगे चलकर होता है कि टीम की रेकिंग या खिलाडिय़ों का चेहरा देखकर रैफरी मनमर्जी से निर्णय लेते हैं तो यह किसी और बात की ओर संकेत करता है जिससे मामला बिगड़ सकता है। अत: फीफा को किसी भी स्तर के मैच का न्याय संगत सम्पन्न कराने का जिम्मा लेना चाहिए और खिलाड़ियों की आपत्ति पर ध्यान देने के लिए रेफरी को और अधिक सतर्क रहने का निर्देश देना चाहिए. साथ ही साथ जिन्हें मैदान में उचित न्याय नहीं मिल रहा है उन्हें मैच के दौरान और मैच की समाप्ति के तुरंत बाद अपना पक्ष निर्णायक समिति के समक्ष पूरी शालीनता तथा अनुशासित होकर रखना चाहिए तभी फुटबॉल का, खेल जा भला होगा.

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