सफलता में संदेह और अपार कमाई से उभरा विचार

पुरस्कार राशि को लेकर टेनिस खिलाड़ियों में असंतोष
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टी वी कमेंटेटर, रायपुर.छ ग

समय समय की बात है खेल कभी मनोरंजन के लिए, कभी स्वास्थ्य के लिए के लिए खेली जाती थी परंतु धीरे-धीरे अब खेल का व्यावसायिकरण हो गया है। खेल एक उद्योग के रूप में विकसित हो चुका है। आधुनिक काल के खिलाड़ियों के लिए खेल मनोरंजन करने, स्वस्थ रहने और धन कमाने का मार्ग बन गया है। बहुत पहले टेनिस कुलीन वर्ग का खेल था . आज संसार में जगह जगह टेनिस की प्रतियोगिता साल भर कहीं न कहीं होती रहती है . टेनिस में ग्रैंडस्लेम स्पर्धाओं को सबसे अधिक सम्मान दिया जाता है। प्रत्येक टेनिस खिलाड़ी की चाहत होती है कि वह जीवन में कम से कम एक बार ग्रेंड स्लेम जीत ले। टेनिस में ग्रेंड स्लेम याने आस्ट्रेलियाई ओपन (1905 से मेलबॉर्न में ), फ्रेंच ओपन (1891से पेरिस में ),विंबलडन (1877 से लन्दन में ) तथा अमेरिकी ओपन (1881से न्यूयार्क में) प्रत्येक वर्ष इसी क्रम से आयोजित की जाती है। उपरोक्त चारों चैंपियनशिप में आस्ट्रेलिया ओपन जनवरी ( महीने के मध्य से अंत तक) फ्रेंच ओपन मई-जून ( मई के अंत से जून की शुरुवात तक) विबलडंन (जून जुलाई ( जून के अंत से जुलाई के आरंभ तक)यू एस ओपन अगस्त- सितंबर (अगस्त के अंत से सितंबर के प्रारंभ तक) प्रत्येक वर्ष संपन्न होती है।
मुझे खेल पत्रकारिता के 48 वर्ष पूर्ण कर लेने के बाद यह कभी सुनने में नहीं आया कि पुरस्कार राशि को लेकर कभी टेनिस खिलाड़ियों तथा आयोजकों में कोई अनबन हुई. खेलकूद जिसे अनुशासन और समय की पाबंदी का प्रतीक माना गया है, अब ताज्जुब लग रहा है कि उससे जुड़े खिलाड़ी ग्रेड स्लेम में मिलने वाली पुरस्कार राशि को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। टेनिस खिलाड़ियों की पहल को हम अनुशासनहीनता कहे या नहीं? फिलहाल खेल की दुनिया के पत्रकारों, खेल समावलोचको को लिए इसका उत्तर देना होगा। आखिर करोड़ों रुपये कमाने वाले टेनिस खिलाड़ी इनाम में अधिक धनराशि चाहते हैं तो उसकी कुछ ना कुछ तो वजह होगी।
आज के प्रतिष्ठापूर्ण समाज में रहने का स्तर काफी ऊंचा हो गया है।घर, बंगला, आदि जरूरी सुविधा एक खिलाड़ी के पास होनी चाहिए।अब घर में जिम और उसे प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षिक जरूरी है। 20वीं सदी में खेल में स्वयं को फिट रखने के लिए ऐसी आधुनिकतम सुविधा की शायद जरूरत नहीं रही होगी लेकिन आज टेनिस में बनने वाले एक विश्व चैंपियन के लिए सहयोगी स्टाफ के रूप में पर्सनल मैनेजर, ट्रेवल एजेंट को भी रखना पड़ता है . इस प्रकार खान पान, कसरत, स्वास्थ्य आदि की देखरेख के लिए कम से कम 13से 18 स्टाफ की आवश्यकता होती है। घर में लगाने वाले जिम की सामग्री करोड़ों रुपये की आती है जिसमें भी प्रत्येक 3-4 वर्ष में उन्नयन होते रहता है। इसी तरह खाद्य पदार्थ भी कीमती हो गई है। फिर तरह-तरह के कार का शौक भी कम महंगा नहीं है। इन सब बातों को देखते हुए टेनिस खिलाड़ी ग्रेंड स्लेम में अधिक पुरस्कार राशि की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ ग्रेंड स्लेम में नाम से आयोजकों द्वारा मीडिया प्रसारण और होने वाले मैच में प्रवेश टिकिट की दर भी लगातार बढ़ती जा रही है। आस्ट्रेलिया ओपन में पहले दिन के पहले मैच के लिए कई दिनों पूर्व एडवांस बुकिंग के माध्यम से लगभग 30 हजार रुपये एक सेशन के लिए प्रत्येक दर्शक से लिया जाता है। हालांकि फ्रेंच ओपन और अमेरीकी ओपन के लिए एक टिकिट की दर करीब पचास से साठ हजार रुपये लगती है। विंबल्डन में तो और भी महंगा है। वहां स्टेडियम में प्रवेश हेतु निश्चित दौर के लिए एक से डेढ़ लाख तक की टिकिट मिलती है। उपरोक्त चारों ग्रेंडस्लेम के मुख्य स्टेडियम में 14800 से 23700 तक दर्शक एक साथ बैठ सकते हैं। इस प्रकार अनुमानत: प्रत्येक ग्रेंड स्लेम में 80 करोड़ रुपये से लेकर 120 करोड़ रुपये टिकिट विक्रय से प्राप्त होता है। इसके अलावा मीडिया प्रसारण से प्राप्त राजस्व अलग है। अर्थात आज के युग में मीडिया मैनेजमेंट करने वाले स्पष्ट रूप से बता सकते हैं कि ग्रेंड स्लेम का आयोजन करने वाले वस्तुत: सब खर्च के बाद कितनी राशि बचा लेते हैं। 20 वीं सदी के खिलाड़ियों के समक्ष ज्यादा चुनौती नहीं थी और वे अपने आपको किसी चैंपियनशिप के लिए तैयार करने के लिए बड़ी धनराशि खर्च नहीं करते थे और उनका खेल जीवन लंबा होता था। आज के प्रतिस्पर्धा भरे युग में कौन सा खिलाड़ी किस चैंपियन को हरा दे कह नहीं सकते और टेनिस खिलाड़ियों में बढ़ते हुए संघर्ष ने उनके मन में भयऔर शंका को जन्म दे दिया है इसलिए ग्रेंड स्लेम खेलने वाले खिलाड़ी चाहते हैं कि उन्हें मिलने वाली पुरस्कार राशि में बढ़ोत्तरी होनी चाहिए। आज टेनिस में हम जो देख रहे हैं अब ग्रेंड स्लेम टाइटिल किसी एक खिलाड़ी की बपौती नहीं है। इन सब परिस्थितियों में हम स्पष्ट रूप से कह सकते हैं टेनिस खिलाड़ियों की मांग समय के अनुरूप है और इसे अनुशासनहीनता नहीं कहा जा सकता .

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