12 लाख सैनिकों वाली भारतीय थलसेना को नया सेना प्रमुख मिल गया है। जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को सेना के प्रमुख (आर्मी चीफ) का पदभार संभाल लिया। जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल पूरा होने के बाद एक आधिकारिक समारोह में उन्होंने सेना की कमान जनरल धीरज सेठ को सौंपी। इससे पहले जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद साउथ ब्लॉक के लॉन में उन्हें औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर विदाई दी गई।
इस मौके पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, “आज मैं भारतीय सेना की कमान जनरल धीरज सेठ को सौंप रहा हूं। वह एक सक्षम और अनुभवी सैन्य नेतृत्वकर्ता हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं, उच्च पेशेवर मानकों और अटूट संकल्प के साथ नई ऊंचाइयों को छुएगी। मुझे भरोसा है कि भारतीय सेना अपनी परंपराओं से जुड़ी रहेगी, वर्तमान चुनौतियों के प्रति सतर्क रहेगी और भविष्य की हर परिस्थिति का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहेगी।”
जनरल धीरज सेठ इससे पहले वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने 1 अप्रैल 2026 को सेना के वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का पदभार ग्रहण किया था। करीब 28 सालों के बाद भारतीय सेना को आर्मर्ड कोर से सेना प्रमुख मिला है। इससे पहले वर्ष 1997 में 20 लांसर्स के जनरल शंकर रॉय चौधरी सेना प्रमुख के पद से रिटायर हुए थे।
जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (खड़कवासला) के पूर्व छात्र हैं। दिसंबर 1986 में उन्हें आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था। लगभग 40 साल के अपने सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ नियुक्तियों पर कार्य किया है। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक आर्मर्ड रेजिमेंट तथा जम्मू-कश्मीर में काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स की कमान संभाली। लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर प्रमोट होने के बाद उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर का नेतृत्व किया।
इसके बाद उन्होंने दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, जहां उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का सफल नेतृत्व किया। उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी सेवा दी। पश्चिमी सीमा पर दो ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व करना अपने आप में एक दुर्लभ उपलब्धि माना जाता है।

