वृद्धाश्रम में वरिष्ठ नागरिकों के बीच पहुंचीं मातृशक्ति, सेवा और सम्मान का दिया संदेश

पुरुषोत्तम मास में जरूरतमंद बुजुर्गों को दैनिक उपयोग की सामग्री एवं अंगवस्त्र वितरित

तिल्दा-नेवरा।
छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष के मार्गदर्शन तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष यामिनी शर्मा के नेतृत्व में 14 जून को श्यामनगर वृद्धाश्रम एवं सुंदर नगर स्थित प्रशामक गृह में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सेवा भाव को समर्पित विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बुजुर्गों के साथ समय व्यतीत कर उन्हें अपनापन, सम्मान और सहयोग का संदेश देना था।

पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर संगठन की महिला पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्गों से आत्मीय मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और उनके साथ समय बिताया। इस दौरान जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को दैनिक उपयोग की सामग्री, साबुन, सोप डिश, शैंपू, तेल, किट पैक, स्नैक्स तथा अंगवस्त्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के दौरान सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का सुंदर उदाहरण देखने को मिला।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय सचिव यामिनी शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष अंजू पाण्डेय, संरक्षिका शुभा शुक्ला, जिलाध्यक्ष ज्योति शर्मा, संयोजिका गीतांजलि शर्मा, शिक्षा प्रकोष्ठ प्रमुख संगीता तिवारी, उपाध्यक्ष शैलजा शर्मा, बीरगांव अध्यक्ष अन्नपूर्णा शर्मा, मीडिया प्रभारी मंजू चौबे, डॉ. गोपा शर्मा, प्रेमलता शर्मा, अंजू शर्मा, खुशी उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति की गरिमामयी उपस्थिति रही।

सभी ने वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए समाज से भी बुजुर्गों की सेवा और देखभाल के लिए आगे आने का आह्वान किया। कार्यक्रम का वातावरण आत्मीयता, सेवा और मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत रहा।


विशेष : सेवा ही सबसे बड़ा धर्म

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वृद्धजन हमारे परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव, संस्कार और जीवन मूल्यों का सम्मान करना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है। ऐसे सेवा कार्य समाज में संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करते हैं।


विशेष : पुरुषोत्तम मास में सेवा का अनूठा संदेश

पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित इस सेवा अभियान के माध्यम से संगठन की महिलाओं ने जरूरतमंद बुजुर्गों को उपयोगी सामग्री भेंट कर सेवा और समर्पण का संदेश दिया। आयोजन ने यह प्रेरणा दी कि धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन भी उतना ही आवश्यक है।

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