सरायपाली। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जा रही है जंगलों में पानी की कमी होने लगी है जंगली जानवर पानी की तलाश में जंगल से भटक कर गांव पहुंच रहे हैं। 4 मई को एक वयस्क नर हिरण जंगल से भटक कर बगईजोर गाँव पहुंच गया। जिसे ग्रामीणों ने उसे पकड़कर सुरक्षित वन विभाग के सुपुर्द किया। कुत्तों के द्वारा दौडाये जाने से हिरण पूरी तरह से थक चुका था ग्रामीणों के बीच पहुंचने से वह काफी डर गया था। ग्रामीणों के द्वारा पुलिस विभाग को व वन विभाग दोनों को सूचित किया गया था। 112 की टीम भी मौके पर पहुंच गई थी,वहीं वन विभाग की टीम भी सूचना के आधा घंटा के अंदर ही पहुंच गई। और हिरण को लेकर सकुशल जंगल में छोड़ा गया है।
ग्राम पंचायत प्रेतेनडीह के आश्रित ग्राम बगईजोर में 4 मई को सुबह लगभग 8:00 बजे प्रेतेनडीह की ओर से दौड़ते भागते हांफते हुए एक नर हिरण बगईजोर के जुनाडीह मोहल्ला पहुंचा। जिसे पूर्व सरपंच नरेंद्र साहू के सहयोग से ग्रामीण के द्वारा रस्सी से बांधकर वन विभाग व 112 वाहन की टीम को सूचित किया। मौके पर 112 वाहन की टीम व वन विभाग की टीम भी सूचना के आधा घंटा में ही पहुंच गई। जिससे ग्रामीणों ने सुरक्षित वन विभाग के सुपुर्द किया। वन विभाग के द्वारा उसे ले जाकर पंचनामा बनाकर कक्ष क्रमांक 353 में छोड़ गया। संभावना जताई जा रही है कि मेदिनीपुर गिरना जंगल की ओर से भटक कर हिरण आया होगा, ग्रामीण सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार विगत 10-15 दिन पूर्व भूकेल के पास एक हिरण को रोड क्रॉस करते कुछ वाहन चालकों के द्वारा देखा गया था संभावना है कि वहीं हिरण खेत-खार में भटकते हुए बगईजोर जा पहुंचा था। जिसे देखने के लिए लोगों को कानन पेंडारी बिलासपुर,जंगल सफारी रायपुर,नरसिंहनाथ, हरिशंकर आदि स्थानो की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। वह हिरण एकाएक ग्रामीणों के बीच पहुंच गया जिससे छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक टकटकी लगाकर देखते रहे। गांव में हिरण को देखने के लिए भारी भीड़ इकट्ठा हो गई,जंगल से भटक कर पहली बार ग्रामीणों के बीच पहुंचने से हिरण काफी डर गया था,इस कदर उसके शरीर में डर समा गया था कि उसके शरीर से पसीना निकल रहा था वह डर से कंपकंपा रहा था। और पसीने से पूरा शरीर भीग गया था ऐसे लग रहा था मानो वह तालाब से डुबकी लगाकर आया हो। एक ओर वह कुत्तों से बचने जान बचाकर भाग रहा था और ग्रामीणों के बीच पहुंच गया। लेकिन अपनी तेज रफ्तार के कारण कुत्तों के चंगुल से भागने में सफल रहा जिसे कुत्तों ने भी नुकसान नहीं पहुंचा पाया और ना ही वह अन्य किसी हिंसक जानवर या ग्रामीणों के संपर्क में आया। ऐसे स्थान पर जाकर रुका जहां के ग्रामीणों ने उसे सुरक्षित जंगल भेजने वन विभाग को तुरंत सूचित किया। 10 से 15 दिनों तक ग्रामीण क्षेत्रों में वह खेतों-खारो में रहने के बावजूद भी वह अपने आप को सुरक्षित रखा था ना तो शिकारी की नजर उन पर पड़ी और ना ही हिंसक जानवरों की।
जंगल से भटककर बगईजोर गांव पहुँचा हिरन,ग्रामीणों ने वन विभाग को किया सुपुर्द

