ई-गवर्नेंस के तहत जिले के भू-अभिलेख रिकॉर्ड का हो रहा डिजिटलाइजेशन

अब लोगों को चंद मिनटों में उपलब्ध होंगे अपने भू-दस्तावेजों की प्रतियां

भू-अभिलेखागार में 1920 से 1991 तक के भू-अभिलेखों हो चुका डिजिटलाइजेशन

रिकार्डों के डिजिटलाइजेशन के लिए पीएम अवार्ड के लिए जिले का हुआ चयन

 

दंतेवाड़ा,। राज्य शासन की मंशा अनुसार आमजनों की सुविधा के दृष्टि से सभी विभागों को ई-गवर्नेंस प्रणाली के तहत बहुउद्देश्यीय बनाने के लिए विशेष जोर दिया जा रहा है। इस क्रम जिले में भी भू-दस्तावेजों के डिजिटलाइजेषन की प्रक्रिया हेतु विशेष पहल की जा रही है। पूर्व समय में लोगों को अपने भू-अभिलेख की प्रतियां जैसे स्वामित्व अभिलेख, पंजीकरण, कैडस्ट्रल मानचित्र, बी-1, फॉर्म ए, प्लॉट रजिस्टर, फॉर्म सी (अधिकारों का अभिलेख), संशोधन, नामांकन, मानचित्र अभिलेख, मानचित्र स्वामित्व अभिलेख, मानचित्र स्केच, मानचित्र पूर्णता प्रमाणपत्र, मानचित्र पुनः क्रमांक दस्तावेज, मानचित्र स्वामित्व प्रमाणपत्र, मानचित्र अंतिम सत्यापन दस्तावेज आदि प्राप्त करने में बहुत सारा वक्त, संसाधन, और ऊर्जा खपानी पड़ती थी। परन्तु अब कुछ ही क्षणों में भू अभिलेख कार्यालय अथवा किओस्क सेंटरों से लोगों को अपने भू-दस्तावेज की नकल या प्रति प्राप्त हो सकेगी। जो दूर दराज से आने वाले ग्रामीणों के लिए बेहद राहत का सबब होगा। इसके लिए सिर्फ उन्हें अपना नाम और खसरा नम्बर, देना होगा। और उनके भू-अभिलेख से संबंधित सभी डाटा, नक्षा, स्वामित्व प्रमाण पत्र, इत्यादि सिस्टम में उल्लेखित हो जाएगें।

 भू-दस्तावेजों को डिजिटल प्लेटफार्म में उपलब्ध कराना राजस्व विभाग को सशक्त एवं सुव्यस्थित बनाने वाला क्रांतिकारी कदम है। इससे न केवल लोगों के समय और संसाधनों की बचत होगी अपितु प्रशासनिक दृष्टिकोण से विकास के लक्ष्यों को गति देने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। इसके पूर्व भूमि रिकार्ड को सुरक्षित रखना और उन्हें विनष्टीकरण से बचाना राजस्व विभाग के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण रहा है। साथ ही लोगों को अपने भू-अभिलेख प्राप्त करने हेतु आवेदन देने, उन्हें स्थापित करने जैसे विभिन्न प्रशासनिक औपचारिकताओं, नियमों के चलते कम से कम सप्ताह भर का समय लगता था। परन्तु अब इस पारदर्शी, सुरक्षित और सुविधाजनक डिजिटलाइजेशन के चलते लोग परेशानी से बचेगें। इसके अलावा भू-दस्तावेजों में अनाधिकृत फेरबदल जैसी घटनाओं की भी कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। उल्लेखनीय है कि इस परिप्रेक्ष्य में ई-गवर्नेंस के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जिले में किए गए भू-डिजिटलाइजेशन के उत्कृष्ट कार्य के चलते पीएम अवार्ड हेतु जिले का चयन किया गया है। इस संदर्भ में नई दिल्ली से इन कार्यो का निरीक्षण करने हेतु टीम का आगमन हुआ था। इस दौरान कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत द्वारा टीम को जिले में किए जा रहे भू-अभिलेख की डिजिटलाइजेशन करने की विस्तृत जानकारी दी गई। इस मौके पर सीईओ जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा, दिल्ली से आए अंडर सेक्रेटरी सन्तोष कुमार गोड, रोहतास मीना, अपर कलेक्टर श्री राजेश पात्रे, तहसीलदार श्री विनीत सिहं, भू-अभिलेख अधीक्षक श्री गोवर्धन साहू उपस्थित थे।

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