सरायपाली। गोंमर्डा अभ्यारण्य से भटक कर दो वन भैंसा अमरकोट गांव पहुंच गया है सुबह से वन भैंसा को गांव के एक किसान टिकेश्वर के बगीचा में देखा गया है। वन विभाग की टीम दिनभर लोगों को वन भैंसा की ओर जाने से रोकते रहे और शाम होने का इंतजार की ताकि वे बगीचा से निकल कर स्वेच्छा से जंगल की ओर जा सके किसी तरह की कोई जनहानि ना हो। हालांकि जंगल से भटक कर गांव पहुंचा वन भैंसा हिंसक हो चुका है। अमरकोट के एक व्यक्ति को बहुत ही जोर से प्रहार भी किया लेकिन वह व्यक्ति चतुराई से प्रहार से बच गया और समय रहते पेड़ में चढ़ गया जिससे वह अपने आप को बचा लिया।
बता दें 17 अप्रैल को गोमर्डा अभ्यारण से 28 हाथियों का झुंड भटक कर नवागढ़ व आसपास के गांव में पहुंच गए थे लेकिन देर शाम तक पुनः अपने ठिकाने पर वापस लौट गए। इसी तरह वन भैंसा भी गोमर्डा अभ्यारण से भटक कर 17 अप्रैल को सुबह दर्राभांठा 132 केव्ही पहुंच गया था,जो शाम तक मोहदा व 18 अप्रैल को वन भैंसा मोहदा से निकलकर रात में अमरकोट और बानीपाली के मध्य पहुँच गया, सुबह अमरकोट के कुछ ग्रामीणों ने वन भैसा को अमरकोट के किसान टिकेश्वर के बगीचा में विचरण करते देखा और ग्रामीणों और वन विभाग को जानकारी दी। जैसे ही वन विभाग को सूचना मिली वन विभाग की टीम दिनभर वन भैंसा पर नजर रखे हुए थे और ग्रामीणों को उसके नजदीक जाने से रोक रहे थे। एक अमरकोट का ग्रामीण किशन सिदार वन भैंसा को देखने के लिए नजदीक जा पहुंचा था जिसे दौड़ा कर एक वन भैंसा ने उस पर हमला किया लेकिन वह उसके हमले से बच गया और बिना समय गंवाय नजदीक के एक पेड़ में चढ़ गया। काफी समय तक वन भैंसा उस ग्रामीण पर हमला करने उसके पेड़ से उतरने का इंतजार कर रहा था। लेकिन पेड़ से काफी समय तक नहीं उतरने पर वह आगे बढ़ गया पेड़ के नीचे से जैसे ही वह वन भैंसा हटा वह व्यक्ति पेड़ से उतरकर गांव की ओर भागा और किसी तरह जान बचाई। जिस बगीचे मे दो वन भैंसा उपस्थित था, वहां हरा चारा तो था, लेकिन पानी की कोई सुविधा नहीं था। वे दिन भर से प्यासे थे। लेकिन वे दोनों वन भैंसा भी ग्रामीणों की आवाजाही से डरे हुए थे और एक पग भी आगे नहीं बढ़ रहे थे। लगभग 10 घंटा से अधिक समय से एक ही स्थान पर अड्डा जमाए बैठे थे और रात होने का इंतजार कर रहे थे वन विभाग की टीम भी ग्रामीण की आवाजाही कम होने रात का इंतजार कर रहे थे,ताकि वन भैंसा से किसी तरह का कोई जनहानि ना हो और वे भी सुरक्षित अपने ठिकाने गोमर्डा अभ्यारण की ओर सुरक्षित पहुंच जाए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जिस स्थान पर वन भैंसा अड्डा जमाए बैठे थे वहां पानी की कोई सुविधा नहीं था दिनभर से प्यासे थे। जाहिर सी बात है वे जैसे ही ग्रामीणों की भीड़ हटेगी और शाम ढलेगी तो वे पानी की तलाश में वहां से निकलकर आगे की ओर बढ़ेंगे।
जंगल से भटक कर गांव पहुंचा दो वन भैंसा

