अमित शाह ने आचार्य श्री विद्यासागर जी की समाधि स्थली के दर्शन किये |

आज दिनांक 06 फरवरी 2025 को दोपहर 1 बजे माननीय श्री अमित शाह भारत के गृह मंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री श्री विष्णुदेव साय, उपमुख्य मंत्री श्री विजय शर्मा, राज्य मंत्री श्री नवीन जैन, छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी एवं राजनांदगांव सांसद श्री संतोष पाण्डेय सहित श्री दिगम्बर जैन चंद्रगिरी अतिशय महातीर्थ क्षेत्र में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी की समाधि स्थली के दर्शन किये | 108 अष्टधातु से निर्मित आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी के चरण चिन्ह का लोकार्पण किया और वहाँ बनने वाले समाधि स्मारक का भूमि पूजन कर शिला स्थापित की | तत्पश्चात मंच में पहुंचकर उपस्थित मुनि संघ एवं आरियका संघ के दर्शन कर श्रीफल चढ़ाया | अतिथियों का पगड़ी पहनाकर, माला पहनाकर एवं तिलक लगाकर स्वागत किया गया | आचार्य श्री के चित्र वाले 100 रूपए के सिक्के का विमोचन किया गया | आचार्य श्री के नाम एवं चित्र वाला स्पेशल कवर डाक लिफाफे का विमोचन किया गया | एलक धैर्य सागर महाराज जी द्वारा रचित “अंतर्यात्री महायात्रा” नामक पुस्तक का विमोचन किया गया | निर्यापक श्रमण श्री समतासागर महाराज जी द्वारा रचित “समाधि संबोधन” नामक पुस्तक का विमोचन किया गया | डिजिटल माध्यम से प्रतिभास्थली विद्योदय ज्ञानपीठ रोजगारोन्मुखी निःशुल्क कन्या विद्यालय, कारोपानी, डिंडोरी मध्य प्रदेश का लोकार्पण किया | जहाँ छात्राओं को पढाई के साथ – साथ रोजगार की शिक्षा निःशुल्क प्रदान की जाएगी | अमित शाह ने अपने उदबोधन में कहा की आज युगपुरुष को, इश्वर तुल्य महापुरुष के कार्यों को कर्यांजलि देने का दिन है | यह मेरा परम सौभाग्य है की मुझे संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी का पहले 5 बार दर्शन किया हूँ और उनसे काफी चर्चायें भी हुई है | उन्होंने हमेशा सबसे पहले अपने देश की प्रगति के बारे में अपने विचार रखे हैं | उनका व्यक्तित्व इनता प्रभावकारी है की जिससे संयम और त्याग के भाव स्वतः ही होता है | उनका सम्पूर्ण जीवन त्याग, तपस्या और संयम के साथ व्यतित हुआ |


“आचार्य श्री जैनाचार्य ही नही बल्कि युगपुरुष थे उन्होंने नये विचारों के साथ युग का परिवर्तन किया ऐसा उनका जीवन था” उपरोक्त विचार भारत के गृहमंत्री अमितशाह ने डोंगरगढ़ की वह पवित्र भूमी जिसे आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महाराज ने अपनी समाधि के लिये चुना उनकी समाधि के ठीक एक वर्ष बाद आयोजित “विद्यायतन” के भूमी पूजन एवं शिलान्यास समारोह में श्रदांजलि देते हुये व्यक्त किये| उन्होंने लगभग 20 मिनट के उदवोधन में आचार्य गुरुदेव के द्वारा धर्म और संस्कृति की चर्चा करते हुये कहा कि यह उनकी तप साधना का ही प्रभाव है कि जब मै उनसे पहले मिला तो उनके चिंतन में देश की भाषा और संस्कृति की झलक मिलती थी उनका विचार था कि देश की सभी भाषाओं का सम्मान होना चाहिये उन्होने भारत को इंडिया नहीं भारत कहने पर जोर दिया तो हमारे लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने सबसे पहले उसे स्वीकार किया भारत की पहचान इंडिया नहीं भारत होना चाहिये उन्होंने कहा कि जब “जी-20” का निमंत्रण विश्व भर में गया तो “प्राईम मिनिस्टर आफ भारत” के नाम से गया| उन्होने कहा भगवान महावीर के सिद्धांत “अहिंसा परमोधर्म:” के सिध्दांत को मात्र कहा ही नही उसको जिया भी है | उनके लाखों करोड़ों अनुआइओं और भक्तों में से मै भी एक भक्त हुं और आज मै अपने आपको सौभाग्य शाली मानता हूं कि एक वर्ष बाद आयोजित स्मृति महोत्सव में उनको श्रदांजलि देने उपस्थित हुआ हूं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं राज्यसभा सदस्य श्री नवीन जैन ने भी अपना उदबोधन दिया| इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्म सभा में कहा कि “गुरु के चरण इसलिये पूज्यनीय है उन चरणों का आचरण जीवन भर पूज्यनीय और आदर्शमय रहा है संपूर्ण भारत से आज अतिशयक्षेत्र चंद्रगिरी डोंगरगढ़ में भगवान चंद्र प्रभु और गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज को अर्घ्य समर्पित करके सौभाग्यशाली समझ रहे है” आप लोग यह मत समझना कि गुरुवर हमारे बीच में नहीं है,आप जहाँ – जहाँ भी नजर उठाकर देखोगे वही आपको गुरवर के दर्शन मिलेंगे”-मुनि श्री ने कहा कि गुरु की वह ऊर्जा समूचे देश के भक्तों को खींच कर लाई है एवं गुरुदेव के प्रकल्पों को संपन्न करने के लिये दिल का खजाना खोल रहे है क्योंकि वह मानते है कि हमारे खजाने में जो संपदा है वह हमारे गुरुदेव के आशीर्वाद का ही प्रतिफल है| मुनि श्री ने कहा कि आज प्रातःकालीन बेला में आज जब मै उस स्थल की वंदना कर रहा था जहाँ पर गुरुवर ने आज की मध्यरात्रि में अंतिम स्वांस ली थी वहां पर मै स्वंय(मुनि समतासागर) संपूर्ण मुनिसंघ उपस्थित था णमोकार महामंत्र चल रहा था| सभी को ज्येष्ठ मुनिराज, योगसागर जी महाराज सांत्वना दे रहे थे | सभी के अंतरंग से आंसू निकल रहे थे तभी अचानक आचार्य श्री ने अपनी उंगलियों का स्पंदन किया जैसे कह रहे हों कि चिंता मत करो मै पूरी तरह से सजग एवं सावधान हुं| मुनि श्री ने समुचे भारत से उपस्थित भक्तों से कहा कि आप लोग सभी बहूत भावुक होकर यहाँ चंद्रगिरी तीर्थ पर आये है और अपने -अपने नगर में चरण पादुका लेकर जाएंगे | आचार्य श्री के चरण इसलिये पूज्यनीय है क्योंकि उन चरणों का आचरण जीवन भर पूज्यनीय और आदर्शमय रहा है | मुनि श्री ने कुंडलपुर की उन घटनाओं को याद दिलाते हुये कहा कि जब बड़े बाबा को विराजमान किया जा रहा था तो छोटे बाबा आचार्य विद्यासागरजी महाराज ने कहा जैसे हनुमान जी ने अपना सीना खोलकर भगवान राम के दर्शन करा दिये थे उसी प्रकार आचार्य श्री ने कहा यदि आप बड़े बाबा के बारे में जानना चाहोगे और जिस समय हम अपने हृदय को खोलकर दिखाऐंगे तो आपको अपने हृदय में बड़े बाबा नजर आऐंगे | यहाँ पर संपूर्ण भारत से श्रावक श्रेष्ठी मौजूद है जिन्होंने गुरुदेव के प्रति श्रद्धा दिखाई है | इस अवसर पर मुनि श्री पवित्रसागर जी, मुनि श्री आगमसागर जी,मुनि श्री पुनीत सागर जी, वरिष्ठ आर्यिका गुरुमति माताजी ,आर्यिकारत्न दृणमति माताजी, आर्यिकारत्न आदर्श मति माताजी सहित सैकडों की संख्या में आर्यिका माताऐं तथा ऐलक श्री निश्चयसागर जी,ऐलक श्री धैर्यसागर जी, ऐलक श्री निजानंद सागर जी, ऐलक स्वागत सागर जी, क्षु. संयम सागर जी महाराज के साथ सैंकड़ों की संख्या में उदासीन आश्रम इंदौर,जबलपुर, सागर,से साधनारत ब्रहम्चारी एवं साधनारत प्रतिभास्थली की बहनें तथा हजारों की संख्या में अध्यन करने वाली छात्राऐं एवं भारत के प्रमुख नगरों से श्रावक श्राविकाऐं उपस्थित थी।इस अवसर पर ब्र. रेखा दीदी ने सम्वोधन दिया कार्यक्रम का संचालन श्री चंद्रकांत जैन ने किया | राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी, प्रचार प्रमुख निशांत जैन , सप्रेम जैन ने बताया प्रातःकाल भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा निर्यापक मुनि श्री समता सागर महाराज के मुखार विंद से भारत के श्रावक श्रेष्ठी देश के भामाशाह श्री अशोक पाटनी,प्र भात जी मुम्बई के द्वारा संपन्न की गयी एवं मुनि श्री को पड़गाहन कर आहार दैने का सौभाग्य भी मिला| प्रातःकाल से ही समूचे भारत के श्रेष्ठी गण जिसमें अशोक जी पाटनी,प्रभातजी मुम्बई,राज्यसभा सदस्य नवीन जैन, सुधीर जैन दिल्ली, विद्यायतन के अध्यक्ष विनोद बड़जात्या,महामंत्री श्री निखिल जैन, श्री मनीष जैन, दीपेश जैन, अमित जैन, नरेश जैन, चंद्रगिरी तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष श्री किशोर जैन, सुभाष जैन, निर्मल जैन,विनोद जैन कोयला,नवीन जैन दिल्ली, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य प्रकाश मोदी भाटापारा, प्रदीप जैन विश्वपरिवार आदि जैन समाज के गणमान्य उपस्थित थे | उक्त जानकारी निशांत जैन (निशु) द्वारा दी गई है|

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