‘ये देश कोई धर्मशाला नहीं, घुसपैठियों पर सख्ती जरूरी’: शाह

नई दिल्ली। लोकसभा ने ‘आप्रवास और विदेशियों विषयक विधेयक, 2025’ को पारित किया। बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि हमारे देश में कौन आता है और कितने समय के लिए आता है, देश की सुरक्षा के लिए यह जानने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पांच हजार साल से प्रवासियों के बारे में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड बेदाग रहा है, इसलिए किसी शरणार्थी नीति की हमें जरूरत नहीं। उन्होंने कहा कि आप्रवास और विदेशी विषयक विधेयक से भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का हमारा सपना पूरा होने वाला है।
शाह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वालों को देश में घुसने नहीं दिया जाएगा। देश कोई धर्मशाला नहीं है। अगर कोई देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए देश में आता है, तो उसका हमेशा स्वागत है। उन्होंने कहा कि पिछले दस सालों में भारत पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत एक चमकता हुआ केंद्र बन गया है। भारत मैन्यूफैक्चरिंग का हब बन गया है और दुनिया भर से लोगों का भारत आना स्वाभाविक है।

भाजपा नेता ने दावा किया कि निजी लाभ के लिए और देश को असुरक्षित बनाने के लिए भारत में शरण लेने वालों की संख्या भी बढ़ी है। रोहिंग्या हों या बांग्लादेशी, अगर वे भारत में अशांति फैलाने के लिए आते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत एक भू-सांस्कृतिक राष्ट्र है, भू-राजनीतिक राष्ट्र नहीं। फारसी लोग भारत आए और आज देश में सुरक्षित हैं। दुनिया का सबसे छोटा अल्पसंख्यक समुदाय भारत में ही सुरक्षित है। यहूदी इजरायल से भागकर भारत में ही रह गए। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में पड़ोसी देशों के छह उत्पीड़ित समुदायों के लोग CAA के जरिए देश में शरण ले रहे हैं।
अमित शाह ने कहा कि आव्रजन कोई अलग मुद्दा नहीं है। देश के कई मुद्दे इससे जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से यह जानना बहुत जरूरी है कि देश की सीमा में कौन घुसता है। हम उन लोगों पर भी कड़ी नजर रखेंगे जो देश की सुरक्षा को खतरे में डालेंगे। वहीं, भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने लोकसभा में ‘आप्रवास और विदेशियों विषयक विधेयक, 2025’ पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि यह विधेयक समय की मांग है और इसकी सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य अतिथियों का सम्मान करने के साथ सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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