सदगुरु कबीर आश्रम में मिली 326 वर्ष पुरानी पाण्डुलिपि

“ज्ञानभारतम” एप से किया गया डिजिटल संरक्षण,कलेक्टर ने क़ी जनभागीदारी व सहयोग क़ी अपील

बलौदाबाजार. कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत जिले में व्यापक सर्वेक्षण कार्य संचालित है। इस दौरान के दौरान विकासखंड सिमगा के कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा स्थित सदगुरुदेव कबीर आश्रम में सर्वेक्षण के दौरान सन 1700 ईस्वी की लगभग 326 वर्ष पुरानी हस्तलिखित प्राचीन पांडुलिपियाँ प्राप्त हुईं, जिनका डिजिटल संरक्षण “ज्ञानभारतम” एप के माध्यम से किया गया। इसके साथ ही सोनाखान स्थित संग्रहालय में 10 दिसम्बर 1857 को अंग्रेजी सरकार द्वारा जारी शहीद वीर नारयण सिंह के फांसी के आदेश क़ी पाण्डुलिपि भी प्राप्त हुई है।

इस अभियान के अंतर्गत दामाखेड़ा में कुल 4 प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उनका डिजिटलीकरण सरपंच क़ी उपस्थिति में पूर्ण किया गया। इन पांडुलिपियों में अनुरागसागर,अम्बूसागर,दीपकसागर एवं ज्ञान प्रकाशशामिल है। इन ग्रंथो को 9 वे आचार्य प्रगट नाम साहब ने लिखा है। ये सभी दुर्लभ पांडुलिपियाँ देवनागरी लिपि में लिखी गई हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम सिमगा अतुल शेट्टे ने सरपंच क़ी उपस्थिति में दयाशंकर कबीर पंथी का श्रीफल दे कर सम्मानित किया।

कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत जिले में व्यापक सर्वेक्षण कार्य संचालित है। इस अभियान अंतर्गत भारत क़ी समृद्ध ज्ञान परम्परा एवं बौद्धिक विकास के साक्ष्य के रूप में प्राचीन पाण्डुलिपियों, ताम्रपत्र, ताड़पत्र को भावी पीढ़ी के लिये संरक्षित व सुरक्षित किया जा रहा है। आपके पास कोई भी हस्तलिखित प्राचीन ग्रन्थ हो तो उसे सर्वे टीम को जानकारी दें। इस कार्य में ग्रन्थ का केवल फोटो लेकर अपलोड किया जाएगा, मूल प्रति आपके पास ही रहेगा। आप सभी इस राष्ट्रीय अभियान में भागीदारी बने और सहयोग प्रदान करें।

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