केंद्रीय खेलमंत्री मनसुख मांडविया ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 की तैयारी का लिया जायजा (सब हेडिंग )
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टी वी कमेंटेटर, रायपुर. (छ ग)
स्कॉटलैंड के ग्लास्गो शहर में 2014 के पश्चात एक बार फिर से कामनवेल्थ गेम्स-2026 आगामी 23 जुलाई से 2 अगस्त तक सम्पन्न होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 मई में सत्ता में आने के बाद भारत की आजादी के पिछले 56 वर्ष में प्रतिभागियों के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फीके प्रदर्शन को गंभीरता से लिया। उन्होंने हमारे देश को खेलकूद के क्षेत्र में संसार के प्रमुख देशों में शामिल करने का संकल्प लिया। इसीलिए प्रधानमंत्री ने जमीनी स्तर से खेल प्रतिभाओं की खोज के लिए 2016-17 में खेलो इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की . आज की पीढ़ी को खेलकूद के महत्व समझाने और हमारे देश के गली मोहल्लों तक खेल को पहुंचाने का निश्चय किया। इसी कारण इन दिनों बच्चों, युवाओं तथा जवानों में खेल के प्रति लगाव बढ़ाने के लिए अनेक खेल आयोजन ,ओपन उम्र, विद्यार्थियों, अनुसूचित जनजातियों, पैरा खेल प्रतिभाओं, शीतकालीन खेलों की प्रतिभाओं आदि वर्ग की खेल स्पर्धा नियमित रूप से आयोजित की जा रही है। दूसरी तरफ उदयीमान खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण, पर्याप्त खानपान, अत्याधुनिक खेल अधोसंरचना, खेल मैदान, एरेना की सुविधा दी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक विकसित भारत की कल्पना में भारतीय खिलाडिय़ों को दुनिया में किसी भी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में शीर्ष पांच स्थान पर आने का लक्ष्य दिया है। प्रधानमंत्री के लक्ष्य को पूरा करने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया पूरी निष्ठा व लगन के साथ प्रयासरत हैं। भारतीय खिलाडिय़ों को सबसे पहले ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल में अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिला है। केंद्रीय खेल मंत्री ने खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ और भारतीय खेल प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच आपस में तालमेल बैठाने पर जोर दिया है . उन्होंने उन्हें खेल व खिलाडिय़ों के हित में सकारात्मक निर्णय लिये जाने का निर्देश दिया है। 2026 के राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी की समीक्षा करते हुए खेलमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि एथलीट केंद्रीत दृष्टिकोण अपनाने उत्कृष्ट प्रशिक्षण सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिया है। अर्थात खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने प्रतिभाओं को उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए हर संभव सरकारी मदद और संपूर्ण सहयोग व्यवस्था के लिए उचित कदम उठाना जरूरी बताया है। किसी खिलाड़ी की सफलता के पीछे प्रशिक्षकों के अलावा सपोर्ट स्टाफ बेहद मददगार साबित होता है। अत: खेल मंत्री ने ऐसे सहयोगियों की नियुक्ति और खिलाडिय़ों के विदेश में प्रशिक्षण कार्यक्रम आावश्यकतानुसार तैयार किए जाने पर बल दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 से आरंभ कार्यकाल के पश्चात खेलो इंडिया कार्यक्रम के लिए अब तक लगभग 6200 करोड़ आवंटित किए गए देश के खेल व खिलाडिय़ों तथा संबंधितों पर खर्च किया गया है जिसका पहला परिणाम 2026 के राष्ट्रमंडल खेल में पदक जीत कर आयेगा ताकि आगे सुधार किया जा सके। 2026 के राष्ट्रमंडल खेल पहले आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में होना था लेकिन वहां के प्रशंसकों द्वारा आयोजन के इंकार करने के बाद ग्लास्गो ने इसे अपने यहां करना स्वीकार किया। कम समय में उन्होंने जिम्मेदारी ली अत: ओलंपिक के लिए आवश्कय 31 खेलों में से मात्र 9 खेल एथलेटिक्स (पैरा एथलीट) तैराकी (पैरा स्वीमिंग) आर्टिस्टिक जिमनास्टिक ट्रेक सायकलिंग (पैरा ट्रेक सायकलिंग) नेटबाल नन ओलंपिक भारोत्तोलन (पैरा भारोत्तोलन) मुक्केबाजी, जूडो, लान बाउल्स (पैरा बाउल्स) 3×3 बास्केटबाल (3×3 व्हीलचेयर बास्केटबाल) शामिल है। इस तरह भारत को अधिक पदक दिलाने वाले खेल हाकी, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, निशानेबाजी तथा स्क्वैश नहीं हो रहे हैं। इसी तरह भारत के अहमदाबाद शहर में 2030 में होने जा रहे 24वें राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी पर खेल मंत्री ने कहा कि जबकि अगला राष्ट्रमंडल खेल भारत में हो तो परंपरा अनुसार ध्वज ग्रहण करने की तैयारी पूर्ण कर ली जाए। इस प्रकार भारत में खेल को स्वास्थ्य से जोड़ते हुए अभियान चलाया जा रहा है वह भविष्य के स्वस्थ भारत का प्रमाण साबित होगा।

