विंबल्डन : 2026, महिला वर्ग में विश्वास भरा प्रदर्शन करके नोस्कोवा बनी विजेता
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर, रायपुर.
दुनिया की सबसे चर्चित एकल, युगल, मिश्रित इवेंट वाला खेल टेनिस है। टेनिस में चार ग्रैंड स्लेम चैंपियनशिप महत्वपूर्ण है। प्रत्येक वर्ष जनवरी/फरवरी में आस्ट्रेलियाई ओपन, मई/ जून में फ्रेंच ओपन, जून/ जुलाई में विंबल्डन और सितम्बर/ अक्टूबर में अमरीकी ओपन चैंपियनशिप क्रमश: मेलबोर्न, पेरिस, लंदन और न्यूयार्क में आयोजित किए जाते हैं। इनमें से कम से से कम एक स्पर्धा में चैंपियन बनने की चाहत, प्रत्येक महिला या पुरुष टेनिस खिलाड़ी में होती है। 2026 के विम्बल्डन टूर्नामेंट में महिला एकल का मुकाबला चेक गणराज्य की दो उभरती हुई प्रतिभाओं लिंडा नोस्कोवा और केरोलीना मुकोवा के बीच हुई। इसमें महिला वर्ग में विश्व की 9वीं वरीयता प्राप्त 21 वर्षीया नास्कोवा ने 10 वीं वरीयता प्राप्त मुकोवा को परास्त करके पहली बार ग्रैंड स्लेम स्पर्धा की विजेता बनने का गौरव प्राप्त किया। और 2011 की विजेता पेट्रा क्वीटोवा के बाद सबसे कम उम्र की विंबलडन खिताब जीतने वाली महिला टेनिस खिलाड़ी बन गई। दोनों खिलाडिय़ों में इस टाइटिल को जीतने के लिए गजब का जोश था। एक बात स्पष्ट रूप से देखने को मिली कि दोनों खिलाडिय़ों ने टाइटिल पर कब्जा जमाने के लिए जी जान की बाजी लगा दी। मजेदार बात तो यह है कि दोनों एक देश के नागरिक होने के साथ साथ दोस्त भी हैं। एक कहावत वर्षों से चली आ रही है खेल के मैदान में जब मैच खेलने के लिए उतरा जाता है तो ना तो कोई अपना /दुश्मन होता है ना ही पराया/ दोस्त होता है .इस कहावत को दोनों खिलाडिय़ों ने चरितार्थ किया और आज की उभरती हुई खेल प्रतिभाओं के समक्ष दोनों दोस्तों ने खेल भावना का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया। वैसे भी चेक गणराज्य का उदय 1 जनवरी 1993 को हुआ जबकि चेकोस्लोवाकिया देश के दो भाग हुए। दूसरे देश को आज स्लोवाकिया के नाम से जाना जाता है। प्रश्न तो आखिर यही उठता है कि कौन है जो नहीं चाहता अपने देश का नाम रौशन करना. आज तीन सेट तक चले मुकाबले में टेनिस के हर विधा को देखने को मिला। जैसे फोरहैंड शॉट, बैक हैंड रिटर्न, ड्रॉप, वाली , डाउन द लाइन शॉट , क्रॉसकोर्ट आदि .पहले ग्रेंड स्लेम की तलाश में दोनों खिलाडिय़ों के सर्विस करने के अंदाज का अद्भुत नजारा देखने को मिला। तीन सेट के 29 गेम में चैंपियन नोस्कोवा अपने सर्विस में 33 एस लगाये जबकि उपविजेता मुकोावा ने 29 एस लगाये। टेनिस में एक खिलाड़ी को एक प्वाइंट पर दो सर्विस करने का अवसर मिलता है। टेनिस के मैच में सर्विस का बहुत महत्व होता है। अच्छी सर्विस विपक्षी पर दबाव बनाती है। इस मैच में दोनों खिलाडिय़ों ने साबित किया कि चेक गणराजय में टेनिस प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। 2-6, 7-5, 6-3 से तीन सेट तक चले मुकाबले में जब मुकोवा 6-2 और 5-2 से आगे थी तब सेंटर कोर्ट में 15000 दर्शकों के साथ इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से मैच देख रहे लाखों लोगों में से शायद किसी ने भी 9 नहीं सोचा होगा कि नोस्कोवा लगातार 5 गेम याने पांच मैच प्वाइंट बचाकर विंबल्डन 2026 की महिला वर्ग की इस प्रतिष्ठित टाइटिल को हथिया लेंगी। ऐसे समय में हमारे देश में कहते हैं जब मदद मांगनी हो तो ईश्वर से मांगो. संभवत: यही किया होगा नोस्कोवा ने और आखिरकार उन्होंने अपनी साहस, शरीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती के कारण हारी हुई बाजी को जीत में बदल दिया। इसके साथ ही मात्र 1 करोड़ 5 लाख आबादी वाले देश चेक गणराज्य की नोस्कोवा अब पांचवी महिला टेनिस खिलाड़ी बन गई है जिन्होंने 1993 में इस देश को अस्तित्व में आने के पश्चात विंंबल्डन महिला का एकल खिताब जीता है। इसके पहले टेनिस की महान महिला खिलाड़ी मार्टिना नवरातिलोवा,
क्वीतोवा, मार्केटा वंडरोवसोवा और बारबोरा क्रेसीकोवा यह कमाल कर चुकी हैं। 1877 से आरंभ विंबल्डन के इतिहास में आज का यह मुकाबला बेदम कठिन, उतार-चढ़ाव, अप्रत्याशित परिणाम के लिए हमेशा याद किया जाएगा। भारतीय टेनिस संघ को ऐसे मैच की वीडियो रिकार्डिंग को भारत में उभरते हुए टेनिस खिलाडिय़ों को उन्हें दिए जा रहे प्रशिक्षण के दौरान अवश्य ही दिखाये जाने की व्यवस्था करनी चाहिए।

