छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा को नई रफ्तार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा विभाग को अधोसंरचना विकास, भर्ती और शैक्षणिक सुधारों के क्षेत्र में लगातार मजबूती मिल रही है। विभाग के बजट में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2023-24 में उच्च शिक्षा विभाग का बजट ₹1212.75 करोड़ था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹1822.75 करोड़ हो गया है। इस प्रकार विभागीय बजट में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
07 विश्वविद्यालयों में लागू हुई राष्ट्रीय शिक्षा नीति
-प्रदेश में सत्र 2024-25 से कुल 09 राजकीय विश्वविद्यालयों में से 07 विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन प्रारंभ किया गया है। नीति के तहत गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत 42 स्किल एन्हांसमेंट कोर्स जैसे गार्डनिंग, मल्टीमीडिया एवं एनिमेशन तथा 108 जेनेरिक इलेक्टिव एवं एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स तैयार किए गए हैं। इंडस्ट्री सहयोग और शोध गुणवत्ता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रुसा कार्यालय में दो सदस्यीय रिसर्च क्वालिटी इंडस्ट्रियल–अकादमिक कोलेबोरेशन सेल का गठन भी किया गया है। पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा के विषयों को शामिल कर स्थानीय संस्कृति और विरासत को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
पदोन्नति और भर्ती प्रक्रिया में तेजी-वर्ष 2025 में 366 सहायक प्राध्यापकों को प्राध्यापक के पद पर पदोन्नत किया गया है। साथ ही 151 स्नातक प्राचार्य एवं 07 स्नातकोत्तर प्राचार्यों को भी पदोन्नति प्रदान की गई है।
शासकीय महाविद्यालयों में सीधी भर्ती प्रक्रिया को गति देते हुए प्राध्यापकों के 595 पदों पर भर्ती की कार्यवाही आरंभ की गई है। इस वर्ष सहायक प्राध्यापक के 625, ग्रंथपाल के 50 और क्रीडाधिकारी के 25 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। प्रयोगशाला तकनीशियन के 233 पदों पर नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि प्रयोगशाला परिचारक के 430 पदों पर व्यापम द्वारा परीक्षा परिणाम जारी कर भर्ती प्रक्रियाधीन है।
नैक मूल्यांकन में बेहतर प्रदर्शन-प्रदेश के कुल 343 शासकीय महाविद्यालयों में से 254 महाविद्यालय नैक मूल्यांकन के लिए पात्र हैं, जिनमें से 200 महाविद्यालयों का मूल्यांकन पूरा हो चुका है। 09 विश्वविद्यालयों में से 05 विश्वविद्यालय नैक से मूल्यांकित हो गए हैं। कई विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों ने उत्कृष्ट ग्रेड हासिल कर प्रदेश का मान बढ़ाया है।
कनेक्टिविटी बढ़ाने विशेष अभियान-वर्तमान सकल नामांकन अनुपात 27.5 प्रतिशत है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसे बढ़ाने के लिए पोषक शाला संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।

सत्र 2024-25 और 2025-26 में प्रदेश में 8 नए शासकीय और 11 नए निजी महाविद्यालय प्रारंभ किए गए हैं, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में भी उच्च शिक्षा के अवसर बढ़े हैं।

पीएम-उषा योजना से मिला बड़ा अनुदान

प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM–USHA) के अंतर्गत शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर को बहु संकायी शिक्षा एवं शोध विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने हेतु ₹100 करोड़ का अनुदान स्वीकृत किया गया है।
इसी योजना के तहत पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर और पं. सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर को 20-20 करोड़ तथा 12 शासकीय महाविद्यालयों को 5-5 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया है।

एनएसएस में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

प्रदेश में राष्ट्रीय सेवा योजना की 1083 अनुदानित इकाइयाँ संचालित हैं। वर्ष 2024-25 में राज्य की 02 स्वयंसेवक छात्राओं को राष्ट्रीय एनएसएस पुरस्कार प्राप्त हुआ, जबकि वर्ष 2025-26 में 01 कार्यक्रम अधिकारी एवं 01 स्वयंसेवक छात्रा को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है।

विद्यार्थियों की वर्तमान स्थिति

सत्र 2024-25 में शासकीय महाविद्यालयों में कुल 2,95,743 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें 2,44,072 विद्यार्थी स्नातक स्तर पर तथा 51,671 विद्यार्थी स्नातकोत्तर स्तर पर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। प्रथम वर्ष के लिए प्रदेश में कुल 1,46,492 सीटें उपलब्ध हैं।

प्रशासनिक सुधारों पर जोर

विभाग द्वारा ई-ऑफिस प्रणाली लागू कर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को पारदर्शी और त्वरित बनाया गया है। छात्रवृत्तियों का वितरण भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है।
डिजिटल अध्ययन और शोध सामग्री उपलब्ध कराने हेतु केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए विद्यार्थियों और शिक्षकों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ा जा रहा है।

आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना
अधोसंरचना और शोध को बढ़ावा

छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन योजना के तहत गुड गवर्नेस, अधोसंरचना, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष 2025-26 के बजट में ₹50 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन (शोध प्रोत्साहन) योजना प्रारंभ कर प्राध्यापकों को शोध कार्यों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कौशल विकास पर विशेष फोकस

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के संचालन हेतु राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठानों से एमओयू किए जा रहे हैं। अब तक नंदी फाउंडेशन और नेसकॉम से अनुबंध हो चुका है।
इलेक्ट्रॉनिक्स, सेरिकल्चर, फिशरीज, टसर टेक्नोलॉजी जैसे रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम आरंभ किए जा रहे हैं। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति प्रक्रिया भी प्रक्रियाधीन है।

नए पाठ्यक्रमों का संचालन

आगामी वर्षों में चार वर्षीय बी.एड./आईटीईपी, बी.पी.एड. तथा अन्य व्यावसायिक एवं बहु संकायी पाठ्यक्रमों का संचालन कर स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा।
औद्योगिक प्रतिष्ठानों और शैक्षणिक संस्थानों के मध्य समन्वय स्थापित कर युवाओं के लिए रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम आयोजित करने की योजना तैयार की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *