जहां गोलियों की गूंज थी, आज वहां संगीत’: मोदी

‘नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को असम के गुवाहाटी में आयोजित बोडो समुदाय के पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘बागुरुम्बा द्वौ 2026’ में भाग लिया, जहां उन्होंने पारंपरिक वाद्य यंत्र ‘सेर्जा’ बजाने का प्रयास किया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बोडो समुदाय के 10,000 से अधिक कलाकार एक साथ मिलकर बागुरुम्बा नृत्य प्रस्तुत किया। मोदी ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि असम की संस्कृति, यहां की बोडो परंपराओं को करीब से देखने का अवसर मिलता रहा है। प्रधानमंत्री के तौर पर जितनी बार मैं असम आया हूं, पहले कोई और पीएम इतनी बार नहीं आया है। नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरी हमेशा यह इच्छा रही है कि असम की कला और संस्कृति को बड़ा मंच मिले। भव्य आयोजनों के जरिए इसकी पहचान देश और दुनिया में बने। इसके लिए पहले भी लगातार प्रयास होते रहे हैं। बड़े स्तर पर बिहू से जुड़े आयोजन हों, दिल्ली में सवा साल पहले हुआ भव्य बोडोलैंड महोत्सव हो या दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रम हों। असम की कला और संस्कृति में जो अद्भुत आनंद है, उसे पाने का मैं कोई भी मौका नहीं छोड़ता हूं।

मोदी ने कहा कि बागुरुम्बा दहोउ, ये केवल एक उत्सव नहीं है, ये एक माध्यम है, हमारी महान बोडो परंपरा को सम्मान देने का। ये एक माध्यम है, बोडो समाज की महान विभूतियों को याद करने का। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार, असम की हर विरासत, हर गौरव का सम्मान अपना सौभाग्य समझती है। संयोग से आज ज्योति प्रसाद अग्रवाला जी की पुण्यतिथि भी है। मैं उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्होंने कहा कि असम का आत्मविश्वास, असम का सामर्थ्य और असम की प्रगति से भारत की ग्रोथ स्टोरी को नई शक्ति मिल रही है। आज असम तेजी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है। असम की अर्थव्यवस्था गति पकड़ रही है। इस विकास में, इस बदलाव में बोडोलैंड और यहां के लोग अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं यह सोचकर भावुक हो रहा हूं कि मेरा असम कितना आगे बढ़ रहा है। एक समय, जहां आए दिन रक्तपात होता था, आज वहीं संस्कृति के अद्भुत रंग सज रहे हैं। एक समय, जहां गोलियों की गूंज थी.
आज वहां खाम और सिफुंग की मधुर ध्वनि है। पहले जहां कर्फ्यू का सन्नाटा होता था, आज वहां संगीत के सुर गूंज रहे हैं। पहले जहां अशांति और अस्थिरता थी, आज वहां बागुरुम्बा की ऐसी प्रस्तुतियां होने जा रही हैं। ये उपलब्धि सिर्फ असम की नहीं है, पूरे भारत की है। असम के इस बदलाव पर हर देशवासी को गर्व है।
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मोदी ने कहा कि 2020 के बोडो शांति समझौते ने वर्षों से चले आ रहे संघर्ष पर विराम लगाया। इस समझौते के बाद भरोसा लौटा… और हजारों युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा को अपना लिया। प्रतिभाशाली बोडो युवा आज असम के सांस्कृतिक दूत बन रहे हैं। खेल के क्षेत्र में भी बोडो समाज के बेटे-बेटियां नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हम असम की कला, संस्कृति और पहचान का सम्मान करते हैं, तो कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें तकलीफ हो जाती है। असम का सम्मान किस पार्टी के लोगों को अच्छा नहीं लगता — कांग्रेस पार्टी। वो कौन सी पार्टी है, जिसने भूपेन हजारिका जी को भारत रत्न देने का विरोध किया था — कांग्रेस पार्टी। असम में सेमीकंडक्टर यूनिट का विरोध किस पार्टी ने किया था — कांग्रेस के कर्नाटक सरकार के मंत्री ने।

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