किसानों की मेहनत, बहनों की उद्यमशीलता और सुगंधित विष्णुभोग चावल ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को दिलाई नई पहचान
रायपुर । छत्तीसगढ़ का 25वां नवगठित जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ अब विशिष्ट कृषि उत्पाद सुगंधित विष्णुभोग चावल के लिए भी नई पहचान बना रहा है। भारत सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत विष्णुभोग चावल को जिले के प्रमुख उत्पाद के रूप में चुना गया है। मनमोहक सुगंध, बेहतरीन स्वाद और पारंपरिक खेती की विशेषताओं से भरपूर यह चावल अब जीपीएम की विशिष्ट पहचान बन चुका है।
विष्णुभोग की महक अब खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच रही है। पेंड्रा क्षेत्र में करीब 1,500 किसान लगभग 600 एकड़ भूमि में विष्णुभोग धान की खेती कर रहे हैं। किसानों की मेहनत, सामूहिक प्रयास और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदमों ने इस पारंपरिक धान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
बहनों की मेहनत को मिल रहा बाजार
विष्णुभोग की सफलता में महिला शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। खेती से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन तक महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इसे आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी बना रही है। मलनिया महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, पेंड्रा द्वारा किसानों से विष्णुभोग धान खरीदा जाता है। इसके बाद मिनी राइस मिल में धान का प्रसंस्करण कर आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ बाजार में पहुंचाया जाता है।
इस पहल से समूह की 15 महिला सदस्यों को स्थायी रोजगार मिला है। महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। समूह द्वारा अब तक करीब 2 टन विष्णुभोग चावल की बिक्री की जा चुकी है, जिससे लगभग 1 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हुआ है।
स्थानीय उत्पाद से राष्ट्रीय पहचान की ओर
विष्णुभोग की कहानी बताती है कि स्थानीय संसाधनों, किसानों की मेहनत और महिला शक्ति को बाजार से जोड़कर पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान दी जा सकती है। ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के माध्यम से विष्णुभोग को उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन के लिए बेहतर मंच मिल रहा है।
विष्णुभोग की बढ़ती मांग किसानों और महिला उद्यमियों के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर पैदा कर रही है। आने वाले समय में उत्पादन, ब्रांडिंग और विपणन को और प्रोत्साहन मिलने से यह चावल छत्तीसगढ़ की कृषि विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला सकता है।
जीपीएम की धरती पर उग रहा विष्णुभोग आज किसानों की मेहनत, बहनों के स्वावलंबन और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनकर अपनी सुगंध दूर-दूर तक पहुंचा रहा है।

