खेलो इंडिया योजना की यह है आरंभिक झलक

राष्ट्रमंडल खेल 2026: ग्लास्गो,स्काटलैंड में संपन्न,भारत चौथे स्थान पर.
आलेख.. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर .रायपुर, छ. ग.

हमारे देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 से कार्यभार ग्रहण करने के बाद वैसे तो कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय विषय चर्चा के केंद्र में रहे परंतु भारत में खेलकूद की जड़ को फिर से मजबूत करने के प्रधानमंत्री के संकल्प ने युवा वर्ग का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया .लगभग 147 करोड़ की आबादी वाले देश के प्रतिभागियों द्वारा विश्व स्तर पर किए गए प्रदर्शन का परिणाम आते ही उसका पोस्टमार्टम होता था. ये अलग बात है और पूछियेगा नहीं कि भारत में खेल की स्थित के बारे में जो वर्ग, समूह, व्यक्ति अपने विचार व्यक्त कर रहे है उनका खेल से कोई क्या लेना देना है भी या नहीं। फिर भी लोकतंत्र है तो विचार व्यक्त करने की आजादी का लाभ नागरिक उठा लेते हैं .
कुल मिलाकर हमारे देश के खिलाड़ियों के चयन को कोसा जाता है। लेकिन सही बात तो यह है कि बहुत कम समीक्षा, विचारक इस बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते रहे हैं
कि अधिकांश गलती हमारे तरफ से रही है। हमने खिलाड़ियों को जमीनी स्तर से चुनकर उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण नहीं दिया। हमारे पास अत्याधुनिक खेल सामग्री और अधोसंरचना की कमी है। विश्व स्तरीय प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं है। हमारे खिलाड़ियों को तैयारी के लिए विदेश की प्रतियोगिताओं में अपनी क्षमता के आंकलन के लिए नहीं भेजा जाता आदि। लेकिन उपरोक्त कमियों के बारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पहले ही पता था क्योंकि प्रधानमंत्री बनने से पहले वे 2002 से लेकर 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री थे अत: वे प्रधानमंत्री की शपथ लेते ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को मजबूत करने के इरादे से सक्रिय रहे। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री का पद ग्रहण किया उनके सामने कई समस्याएं थी वे उसे सुलझाने में लग गये . खेलकूद में भारत को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए उनके पास अलग ही योजना थी। उन्होंने खिलाड़ी से राजनेता बने ओलंपियन लेफ्टिनेट कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर को भारत के खेल मंत्रालय की कमान सौंप दी और खेलों के क्षेत्र में भारत को प्रमुख देश बनाने की दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया। आखिरकर 2017-18 में उन्होंने खेलो इंडिया नामक कार्यक्रम पूरे देश में लागू किया। जिसके लिए केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय ने 6200 करोड़ रुपए जारी है और अंत में हम कह सकते हैं जो परिणाम 2026 ग्लास्गो में संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों का आया है वह इसी खेलो इंडिया कार्यक्रम को लागू करने का परिणाम है।2017-18 के खेलो इंडिया के लागू होने के पश्चात भारतीय खिलाड़ियों की तैयारी की जांच के लिए इस खेल स्पर्धा के परिणाम को हम पहला अवसर कह सकते हैं। 2026 की इस प्रतियोगिता में सिर्फ दस खेलों को शामिल किया गया था. इसमें 75 पुरुष,47 महिला खिलाड़ियों सहित 122 सामान्य व पैरा वर्ग के प्रतिभागी थे। हमारे खिलाड़ियों को भले ही 3×3 बास्केटबाल, आर्टिस्टक, जिमानस्टिक, बोल्स, साइक्लिंग, जैसे खेल में कोई पदक नहीं मिला लेकिन मुक्केबाजी में सर्वाधिक 7 स्वर्ण,03 रजत जीता। इसी तरह भारतीय जुडो के इतिहास में नया द्वार खुला जबकि हमारे जूडोकाओ ने 2 स्वर्ण,एक-एक रजत व कांस्य सहित चार पदक जीते। हमारे दिव्यांग खिलाड़ियों ने पैरा पावर लिफ्टिंग में एक कांस्य, पैरा एथलीटों ने तीन स्वर्ण, दो रजत व एक कांस्य पदक जीतकर यह बताया कि भारत में उनके वर्ग के खिलाड़ियों को भूरपूर सुविधा दी जाए तो वे अपने देश के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। भारत ने कुल 39 पदक जीते जबकि 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में 61 पदक हासिल किये थे। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल बैडमिंटन, क्रिकेट, हाकी, टेबल टेनिस और कुश्ती में 31 पदक जीते थे। जबकि बाकी खेलों एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, जिम्नास्टिक, जूडो, पैरा पावरलिफ्टिंग, तैराकी, टेबल टेनिस,भारोत्तोलन को मिलाकर 30 पदक जीते थे। 2022 में भारत के 210 खिलाड़ी जबकि 2026 में सिर्फ 122 खिलाड़ियों ने भाग लिया। अत: हम कह सकते हैं कि 2026 के परिणाम में खेलो इंडिया की झलक है और अब जबकि आगामी 2030 के राष्ट्रमंडल खेल अपने 100 वें वर्ष में भारत के अहमदाबाद में होंगे तो यही नतीजे हमारे खिलाड़ियों को शानदार प्रदर्शन करने के लिए प्रेरणा देंगे।

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