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फीफा विश्व का 2026 पुरुष वर्ग में फुटबाल का सरताज बनने की कवायद तेज

आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार,टीवी कमेंटेटर,रायपुर.छग.

खेलों की दुनिया में हार या जीत किसी की बपौती नहीं है। 11 जून 2026 से प्रारंभ फुटबाल के विश्वकप पर कौन सी टीम का कब्जा होगा,अभी भी कहा नहीं जा सकता। जिस तरह फ्रांस के सबसे फुर्तीले खिलाड़ी एम्बाबे की टीम को स्पेन ने सेमीफायनल पछाड़ा है। अब तो लियोनल मैसी वाले अर्जेंटीना की टीम भी सकते में आ गई होगी। वैसे भी टीम खेल जिसमें चार से अधिक खिलाड़ी होते हैं उसमें किसी एक खिलाड़ी निर्भर नहीं होना चाहिए। स्पेन और फ्रांस दोनों ही फुटबाल के यूरोप महाद्वीप के अंतर्गत आते हैं। दोनों टीम साल भर में आपस में कई मैच खेलते हैं। दोनों एक दूसरे के खिलाड़ियों की अच्छाई और कमजोरी दोनों पक्ष से अवगत होते हैं। खिलाड़ियों को सही प्रशिक्षण मिला हो तो उन्हें यह भी मालूम होता है कि विपक्ष के किस खिलाड़ी में कितनी शारीरिक क्षमता है। इसके पहले कि वह आक्रमण की बागडोर संभाले उसकी घेराबंदी करके उसे छकाया जा सकता है। 11 जून 2026 को फीफा द्वारा 206 मान्यता प्राप्त देशों की वरीयता क्रम जारी की गई थी।
उसके अनुसार एक से लेकर दस तक क्रमश: अर्जेंटीना, स्पेन, फ्रांस, इंग्लैंड, पुर्तगाल, ब्राजील, मोरोक्को, नीदरलैंड, बेल्जियम, जर्मनी की टीम थी। गौर करने वाली बात यह है कि फीफा द्वारा किया गया आकलन बिलकुल सही साबित हुआ है और 2026 के विश्व कप के सेमीफायनल में पहुंचने वाली चारों टीम की रेकिंग वास्तव में एक से चार तक ही है। इस विश्वकप में यूरोप और दक्षिण अमेरिका महाद्वीप ने अपनी श्रेष्ठता साबित की है। पहली बार 48 देशों के बीच खिताबी संघर्ष जारी है। फीफा द्वारा मान्यता प्राप्त 206 देशों में से यूरोप महाद्वीप के 54 देशों को जबकि दक्षिण अमेरिका महाद्वीप की 10 टीम को मान्यता दी गई है। मुख्य स्पर्धा में शामिल 48 देशों में यूरोप की 54 में से 16 टीम को दक्षिण अमेरिका की 10 में 06 टीम को मुख्य ड्रा में जगह मिली। एक सेमीफायनल हो चुका है।जिसमें स्पेन ने फ्रांस को पराजित किया। एक बाकी है। जिसमें वर्तमान विजेता अर्जेंटीना का सामना इंग्लैड से होगा। अर्थात अब यूरोप की 16 में से 14 जबकि दक्षिण अमेरिका की 06 में से 05 टीम प्रतियोगिता से बाहर हो गई है। 48 टीम को शामिल किए जाने की वजह से चैंपियनशिप कई दौर से गुजर रहा है जिसमें आरंभिक चक्र, राऊंड आफ 32, राउंड ऑफ 16, क्वार्टर फायनल, सेमीफायनल फिर फायनल के दौर से गुजरते हुए टूर्नामेंट में कुल 104 मैच खेला जाना तय हुआ है। अभी तक 101 मैच संपन्न हो चुके हैं। अब सिर्फ तीन मुकाबला एक सेमीफायनल एक फायनल और एक तीसरे स्थान के लिए एक भिड़ंत होना बाकी है।
दूसरे सेमीफायनल में वर्तमान विजेता अर्जेंटीना के सामने इंग्लैड की टीम होगी। इंग्लैड की टीम ने विश्वकप में पहली बार 1950 में योग्यता हासिल की थी। उसके बाद वह तीन बार छोड़कर 17 बार विश्वकप के प्रमुख दौर में पहुंची तथा एक बार 1966 में विजेता बनी। दूसरी तरफ अर्जेंटीना की टीम 1930 के पहले फीफा विश्वकप में शामिल रही और अब तक 19 बार मुख्य दौर में प्रवेश कर चुकी है। जिसमें वह तीन बार 1978,1986 तथा 2022 में फीफा विश्वकप विजेता रही है। खेलों की दुनिया का कोई भी विश्वकप इतने व्यापक स्तर पर नहीं होता है। तीन देशों में 11 जून से लगातार मुकाबले जारी है। किसी तरह की अव्यवस्था की बात सामने नहीं आई है। यह फीफा के पदाधिकारियों के मेहनत और दूरदर्शिता का परिणाम है। आयोजकों ने अपनी अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन किया है। खिलाड़ियों की भूमिका की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। किसी ने भी खान पान, परिवहन, आवास व्यवस्था पर ऊंगली नहीं उठाई। खेल के दौरान रैफरी के कुछ एक निर्णय पर टीम के मैनेजर या कोच ने आपत्ति जरूर दर्ज कराई लेकिन सब कुछ अनुशासन की सीमा के भीतर रहकर किया गया. भारत में आने वाले 2038 तक जिस तरह करीब 29 अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा के आयोजन की संभावना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया के मार्गदर्शन में होने की व्यक्त की गई है तब तो 2026 का फीफा विश्वकप पुरुष वर्ग के आयोजन की सभी बारीकियों का अध्ययन हमारे देश के खेल प्रशासकों, आयोजनकर्त्ताओं को अभी से करना चाहिए ताकि भारत का नाम दुनिया में सर्वश्रेष्ठ आयोजक के रुप में स्थापित हो सके।

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