सरकार की उपेक्षा और दुर्भावना से शिक्षा के स्तर में बड़ी गिरावट, गरीब बच्चों से छीने जा रहे अधिकार- कांग्रेस

रायपुर/। भाजपा सरकार पर शिक्षा की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार की दुर्भावना के कारण ही छत्तीसगढ़ में शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है, राष्ट्रीय एजेंसी आंकड़ों में एकीकृत जिला सूचना प्रणाली के द्वारा जारी रिपोर्ट में वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ देश में नीचे से तीसरे क्रम पर है, जो इस सरकार के लिए शर्मनाक है, भाषा का स्तर -3 और विज्ञान का -5 है, स्कूलों में नियमित शिक्षकों की भर्तियां रोक दी गई है, अधिकांश स्कूलों में शौचालय नहीं हैं, 5 हजार से ज्यादा कन्या शाला जहां पर बेटियां पढ़ती हैं वहां पर शौचालय नहीं होने की बात हाल ही में उच्च न्यायालय में उजागर हुआ, बिल्डिंगों की मरम्मत नहीं होने से क्लासरूम जर्जर हो गए हैं, अधिकांश स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं है, शिक्षकों से कभी कुत्ते गिनवा रहे, कभी मवेशी, एसआईआर ड्यूटी के बाद अब जनगणना, पेपरलिक के मामले में यह सरकार बदनाम हो चुकी है, 12 वी हिंदी का पर्चा 3 दिन पहले वॉट्सएप पर घूमता रहा, प्राइमरी मिडिल के प्रश्न पत्र कोरे निकल रहे थे, भाजपा की सरकार में शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार के रवैए से प्रतीत होता है कि ये विभाग नहीं वसूली गिरोह चला रहे हैं, पिछले शिक्षण सत्र के छात्रवृत्ति की राशि अब तक छात्रों को नहीं मिली है, किताब, गणवेश और साइकिल योजना केवल कागजों पर है क्योंकि भाजपा सरकार का फोकस विद्यार्थियों के कल्याण के बजाय भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी में है। 50 हजार की टीवी 10 लाख में, 10 करोड़ का जंबूरी घोटाला, तेरहवीं घोटाला, फर्नीचर खरीदी घोटाला, कुकर खरीदी घोटाला, युक्तियुक्तकरण के नाम पर भयादोहन सर्वविदित है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा की सरकार नहीं चाहती कि छत्तीसगढ़ में गरीब बच्चों को समुचित शिक्षा मिल सके, शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश की संख्या घटाई जा रही है, पहले जो क्लास वन के साथ ही नर्सरी और केजी वन में बच्चों की भर्तियां होती थी उसे सरकार ने अब बंद कर दिया है, केवल कक्षा पहली में ही भर्ती होगी, पहले लगभग 80 हजार सीटों में आरटीई के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश होते थे जिसे इस साल काटकर मात्र 19489 कर दिया गया है अर्थात आरटीई की सीटों में 80 प्रतिशत की कटौती की गई है। पहले 10463 स्कूल बंद किया फिर नए सेटअप के नाम पर न्यूनतम पदों की संख्या हर स्कूल में घटाएं, छात्र शिक्षक अनुपात बढ़ाए गए, लगभग 48 हजार पदों को समाप्त कर दिया गया, 56 हजार से अधिक नियमित शिक्षकों के पद रिक्त हैं, लेकिन यह सरकार भर्तियां रोक रखी है, अब शिक्षा के अधिकार पर इस सरकार की बुरी नजर है।

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