जिहादी नेता संग ट्रंप की चाय पार्टी, उसके सिर अमेरिका ने ही रखा था 83 करोड़ का इनाम

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है उनकी ‘टी-पार्टी’! ये कोई आम मुलाकात नहीं थी, बल्कि चाय की यह चुस्की उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति के साथ ली, जिसके सिर पर कभी अमेरिका ने 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा था। साथ में सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भी मौजूद थे। इस जिहादी नेता ने कई साल अमेरिका के खिलाफ युद्ध लड़ा।

सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा को दुनिया अबू मोहम्मद अल-जोलानी के नाम से एक खूंखार जिहादी के तौर पर जानती है। वे अब ट्रंप के साथ मुस्कुराते हुए कैमरों में कैद हुए। ये वही जोलानी हैं जो एक समय अल कायदा के सीरियाई फ्रंट अल-नुसरा के सरगना थे और अमेरिका ने उन्हें 2013 में ग्लोबल आतंकी घोषित किया था।

धमाकों का मास्टरमाइंड, अब सीरिया का राष्ट्रपति

जोलानी ने अमेरिका और इराकी फौजों के खिलाफ युद्ध लड़ा, फिर सीरिया लौटकर बशर अल-असद की सरकार के खिलाफ इस्लामी विद्रोह की अगुवाई की। छह महीने पहले जोलानी ने ईरान समर्थित समूहों को सीरिया से खदेड़कर असद सरकार को गिरा दिया और खुद को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित कर दिया।
कहां हुई ट्रंप और जोलानी की मुलाकात

ट्रंप और जोलानी की यह ऐतिहासिक मुलाकात रियाद में हुई। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की पहली मध्य पूर्व यात्रा के दौरान पहुंचे थे। यह 25 सालों में पहली बार है जब किसी अमेरिकी और सीरियाई राष्ट्रपति के बीच आमने-सामने बातचीत हुई है।
सीरिया पर लगी वर्षों पुरानी पाबंदियां भी हटाई

इस मुलाकात से एक दिन पहले ट्रंप ने सीरिया पर दशकों से लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने की घोषणा की। जैसे ही उन्होंने यह ऐलान किया, पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। यहां तक कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भी खड़े होकर ताली बजाने लगे। ट्रंप ने मुस्कराते हुए कहा — “ओह, यह कदम मैं सऊदी अरब के लिए कर रहा हूं।” यह कदम साफ तौर पर सीरिया में आर्थिक निवेश का रास्ता खोलता है, खासकर उन खाड़ी देशों के लिए जो अब तक अमेरिकी पाबंदियों से डरे हुए थे।
सीरिया: युद्ध, भूख और तबाही की धरती

सीरिया की अर्थव्यवस्था पहले से ही बर्बाद है। विश्व बैंक के अनुसार, 2010 से 2020 के बीच सीरियाई अर्थव्यवस्था आधी से भी कम रह गई और 2022 तक देश की 69% आबादी गरीबी में थी। 2023 के विनाशकारी भूकंप ने हालात और बिगाड़ दिए। अब जबकि अमेरिका ने पाबंदियां हटाई हैं, अरब देश अरबों डॉलर का निवेश करने को तैयार बैठें हैं और इसमें सबसे आगे सऊदी अरब है।

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