भारत के खेल राजदूत बनेंगे ये उदयीमान खिलाड़ी
जसवंत क्लाडियस
एक सच्चे देशभक्त के लिए उचित है कि वह अपने वतन को मानव सभ्यता के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ता हुआ देखे। विज्ञान, कृषि, साहित्य, संचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, संगीत, नृत्य आदि क्षेत्रों में भारत ने स्वतंत्रता के पश्चात बहुत कुछ पाया है। लेकिन अभी बहुत कुछ पाना बाकी है। विशेषकर खेलकूद क्षेत्र में भारत को अभी विश्व स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदेश करना बाकी है। हमारे देश में खेल व खिलाडिय़ों के हित में कई योजनाएं, नीतियां लाई गई है परंतु उससे गिनी चुनी विश्व स्तरीय खेल प्रतिभाएं ही निकल सकी। मुझे यह लिखते हुए गर्व हो रहा हे कि खेलकूद को उचित सम्मान देने और भारत को विश्व मंच पर स्थापित करने का बीड़ा अगर किसी ने उठाया है तो वे हैं हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी। इसका प्रमाण है कि उन्होंने मई 2014 में प्रधानमंत्री के पद पर आसीन होते ही भारत के खेलकूद मंत्रालय की जिम्मेदारी खेलकूद की दुनिया से पहली बार राजनीति में कदम रखने वाले 2004 के ओलंपिक खेलों में भारत के लिए निशानेबाजी में रजत पदक जीतने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर जैसे व्यक्तित्व को सौंप दिया। हो सकता है उस समय तो इस निर्णय को बहुत ही हल्के में लिया गया होगा और कई लोग यह सोचते रह गए होंगे कि उनकी नियुक्ति से कुछ नहीं होने वाला लेकिन समय, विचार तेजी से बदलते हैं। केंद्र में 21वीं सदी में सत्ता में पहली बार आए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने आज पूरे भारत में खेल व खिलाडिय़ों की तकदीर व तस्वीर बदल दी है। भारत के पूर्व महान खिलाडिय़ों में से एक राज्यवर्धन राठौर के नेतृत्व साथ ही भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2017/18 से खेलो इंडिया नामक एक कार्यक्रम शुरू किया गया जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर से खेल प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें राष्ट्रीय-अतर्राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं के लिए तैयार करना और खेलों के लिए बुनियादी अधोसंरचना तैयार करना है. अब तक केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय द्वारा 6200 करोड़ रुपये खेलों इंडिया कार्यक्रम आबंटित किए जा चुके हैं। इन दिनों पूरे भारत में खेल का माहौल बन रहा है। माननीय प्रधानमंत्री के 2036 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों के भारत में आयोजन को ध्यान में रखते हुए ओलंपिक में शामिल 28 खेल और कुछ लुप्तप्राय, प्राचीन खेलों की प्रतियोगिताएं भारतीय खेल प्राधिकरण की देखरेख में पूरे देश में इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, विंटर गेम्स, बीच गेम्स आदि का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए विगत 25 मार्च से 3 अप्रैल तक छत्तीगसढ़ में प्रथम खेलों इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन हुआ। इसमें तैराकी, फुटबाल, हाकी, तीरंदाजी, भारोत्तोलन, कुश्ती, मलखंब, एथलेटिक्स के मुकाबले, रायपुर, जगदलपुर तथा अंबिकापुर में संपन्न इस स्पर्धा में देश के विभिन्न राज्यों के अनुसूचित जनजाति वर्ग के अनेक खिलाड़ी उभरकर आये हैं। अभी स्पष्ट नहीं है कि विजेता प्रतिभागियों में कितने खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर के कीर्तिमान के कितने करीब हैं पंरतु ऐसे खिलाड़ी ज़रूर हैं जिनको उचित देखभाल, सुविधा और प्रशिक्षण मिलने से वे विदेश में भारत का नाम रौशन करने की क्षमता रखते हैं। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्ण देव साय ने घोषणा की है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स अगले तीन वर्षों तक छत्तीसगढ़ में ही सम्पन्न होंगे। इस निर्णय से छत्तीसगढ़ प्रदेश में खेलकूद का वातावरण नये सिरे से बनेगा तथा बस्तर व सरगुजा जैसे अनुसूचित क्षेत्रों से खेल की ऐसी प्रतिभाएं निकलेंगी जो राज्य का नाम विश्व स्तर पर कर सकेंगी।

