रसोई ही है आपका पहला उपचार केंद्र
प्राकृतिक चिकित्सा, योग और स्वस्थ जीवनशैली पर विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण संदेश
आनंद सरोवर में वर्ल्ड नेचुरोपैथी आर्गेनाइजेशन की ओर से आज गोष्ठी एवं सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें प्राकृतिक चिकित्सा, योग और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, चिकित्सकों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि माननीय योग गुरु श्रीमती ममता साहू जी ने अपने उद्बोधन में बताया कि नाभि हमारे शरीर का मुख्य केंद्र है, जहां लगभग 72,000 नाड़ियां मिलती हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रतिदिन नाभि में तेल डाला जाए तो शरीर स्वस्थ रहता है और अनेक रोगों से बचाव संभव है। अपने संबोधन के पश्चात उन्होंने उपस्थित जनों को योगाभ्यास भी कराया, जिसमें भस्त्रिका प्राणायाम, विभिन्न आसन, सूर्य नमस्कार एवं अन्य योग क्रियाएं शामिल थीं।
प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. मेहराज साहू ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने किडनी, शुगर और ब्लड प्रेशर से संबंधित अनेक मरीजों को प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लाभ पहुंचाया है। उन्होंने यह भी बताया कि 10 वर्ष पुराने माइग्रेन का उपचार उन्होंने मात्र एक माह में संभव किया, जिसके लिए रोगी को पेट की सफाई और अंगूर के रस का सेवन करने की सलाह दी गई थी।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में आर्य समाज के वैदिक विद्वान आचार्य डॉ. अजय आर्य जी ने कहा कि आनंद सरोवर जैसे स्थान पर पहुंचना सौभाग्य की बात है। उन्होंने शरीर और मन को स्वस्थ रखने के महत्व पर बल देते हुए कहा कि “प्रकृति” का अर्थ ही स्वभाव है, और जब व्यक्ति अस्वाभाविक भोजन एवं दिनचर्या अपनाता है, तब रोग, तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने सभी को सलाह दी कि जल्दी सोएं, जल्दी उठें तथा रात्रि भोजन सोने से 3–4 घंटे पहले कर लें। नियमित व्यायाम, योग और प्राणायाम से जीवन सरल, संतुलित और स्वस्थ बनता है।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष वर्ल्ड नेचुरोपैथी आर्गेनाइजेशन द्वारा “मड थेरेपी” को थीम बनाकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्राकृतिक चिकित्सक ब्रह्माकुमारी डॉ. निर्मला गुप्ता जी द्वारा मुल्तानी मिट्टी से फेस पैक बनाने एवं लगाने का प्रदर्शन किया गया। इस प्रयोग के बाद प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि साबुन एवं फेस वॉश की तुलना में मुल्तानी मिट्टी अधिक प्राकृतिक और लाभकारी प्रतीत हुई।
कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक चिकित्सकों द्वारा कुछ आश्चर्यजनक दावे भी प्रस्तुत किए गए। चिकित्सक मेघराज एवं निर्मला वर्मा जी ने बताया कि कुछ स्थानों पर तुलसी और गोबर का उपयोग भी चिकित्सा में किया जा रहा है। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर बताया कि कैंसर जैसे रोगों में भी इस प्रकार के प्रयोगों से लाभ देखने को मिला है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि त्वचा संबंधी रोगों में छने हुए गोबर का सीमित उपयोग लाभकारी हो सकता है।
उन्होंने आधुनिक जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आजकल लोग टाइल्स वाले घरों में रहने लगे हैं, जिससे प्रकृति से संपर्क कम हो गया है। उन्होंने सलाह दी कि प्रतिदिन 5 से 10 मिनट नंगे पैर मिट्टी पर खड़े रहने का अभ्यास करें, जिससे शरीर की कई बीमारियों में राहत मिल सकती है।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बी. के. गीता बहन जी द्वारा की गई, जो प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय केंद्र, बघेरा से संबद्ध हैं। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. डॉ. अमरनाथ शर्मा जी (डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर, INO) उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक मनोज ठाकरे जी (स्टेट को-ऑर्डिनेटर, INO, छत्तीसगढ़) ने आयोजन का सफल संचालन सुनिश्चित किया।
आयोजन में सहयोग हेतु डॉ. निर्मला गुप्ता (नेचुरोपैथिस्ट) सक्रिय रहीं। प्रेरक अतिथि के रूप में डॉ. प्रमोद नामदेव (वरिष्ठ नेचुरोपैथिस्ट) एवं डॉ. मेहराज साहू (नेचुरोपैथिस्ट) की उपस्थिति रही। सेमिनार का संचालन नीता चौरसिया (आई.टी. को-ऑर्डिनेटर, INO) द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में प्रशांत क्षीरसागर, किशोर कन्नौजे सहित सैकड़ों ब्रह्माकुमार एवं ब्रह्माकुमारी बहनों ने भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया। अंत में संयोजक मनोज ठाकरे एवं नीता चौरसिया ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
मनोज ठाकरे ने बताया कि मिट्टी में आश्चर्य जनक रूप से जीवनी शक्ति विद्यमान है। अगले सप्ताह मड स्नान, तथा मड थेरेपी पर प्रयोग कार्यक्रम आयोजित करने जा रहे हैं।
आपकी रसोई ही आपकी क्लीनिक है
वक्ताओं ने बताया कि आपका पहला क्लिनिक आपकी अपनी रसोई ही है, जहां मौजूद साधारण मसाले असाधारण औषधि का काम करते हैं। अजवाइन पाचन तंत्र को मजबूत बनाकर गैस, अपच और पेट दर्द में राहत देती है, वहीं जीरा भूख बढ़ाने, एसिडिटी कम करने और शरीर को ठंडक देने में सहायक होता है। सरसों का उपयोग सर्दी-खांसी, दर्द और सूजन में लाभकारी माना जाता है, जबकि हल्दी प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक के रूप में कार्य करती है, जो घाव भरने, इम्युनिटी बढ़ाने और शरीर को रोगों से बचाने में मदद करती है। यदि इन घरेलू चीजों का सही और नियमित उपयोग किया जाए, तो कई सामान्य बीमारियों का उपचार घर पर ही संभव है।

