जेब में पैसे नहीं, पत्नी को गहने दिलाने की चाहत, 20 रुपये में मिला सोने का मंगलसूत्र

महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से एक दिल को छू लेने वाली कहानी सामने आई है, जो सच्चे प्यार और इंसानियत की मिसाल बन गई। 93 वर्षीय बुजुर्ग निवृत्ति शिंदे अपनी पत्नी शांताबाई के लिए सोने का मंगलसूत्र खरीदने के लिए गोपिका ज्वेलर्स की दुकान पर पहुंचे। उनके पास सिर्फ 1,120 रुपये थे, जो उन्होंने सड़कों पर भीख मांगकर और पाई-पाई जोड़कर जमा किए थे। लेकिन दुकानदार नीलेश खिवंसरा ने उनकी प्रेम भरी भावना से प्रभावित होकर महज 20 रुपये में मंगलसूत्र दे दिया।

प्यार की अनोखी कहानी
निवृत्ति और शांताबाई, जालना जिले के अंभोरा जहांगीर गांव के एक साधारण किसान परिवार से हैं। दोनों गजानन महाराज मंदिर के बाहर भीख मांगकर गुजारा करते हैं। शांताबाई पिछले 10 साल से सोने का मंगलसूत्र पहनने की इच्छा रखती थीं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह सपना अधूरा था। निवृत्ति ने एक महीने तक मेहनत कर 1,120 रुपये जमा किए और पत्नी को खुश करने के लिए ज्वेलरी दुकान का रुख किया।

दुकान पर पहुंचे दंपति को देखकर कर्मचारियों को पहले लगा कि वे मदद मांगने आए हैं। लेकिन जब निवृत्ति ने मंगलसूत्र खरीदने की बात कही और अपनी जमा पूंजी दिखाई, तो दुकानदार का दिल पिघल गया। उन्होंने न सिर्फ मंगलसूत्र दिया, बल्कि पैसे लेने से इनकार कर दिया। दादा-दादी की जिद पर उन्होंने आशीर्वाद के तौर पर सिर्फ 20 रुपये (10-10 रुपये दोनों से) लिए। इस पल ने वहां मौजूद सभी को भावुक कर दिया।

सोशल मीडिया पर वायरल
इस घटना का वीडियो गोपिका ज्वेलर्स के इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया गया, जो अब तक 2 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है। लोग निवृत्ति के प्यार और दुकानदार की दरियादिली की तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “ऐसे लोग समाज की असली दौलत हैं।” वहीं, दूसरे ने कहा, “दुकानदार का दिल सोने का है।”

आज भी जिंदा है इंसानियत
यह कहानी न सिर्फ पति-पत्नी के अटूट प्रेम को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि समाज में अभी भी नेकदिल लोग मौजूद हैं। निवृत्ति और शांताबाई आषाढ़ी एकादशी के लिए पंढरपुर की तीर्थयात्रा पर हैं, और उनकी यह कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई है।

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