युवाओं से बड़ा छल, 57 हजार शिक्षक भर्ती के वादे के बीच 2582 शिक्षक घटे? यू डायस के आंकड़ों से विश्वासघात का खुलासा – दीपक बैज

रायपुर। प्रदेश के डीएड, बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों तथा टीईटी पास बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा ने चुनाव के दौरान 57 हजार शिक्षकों की भर्ती का ढिंढोरा पीटा था, लेकिन सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार की ही UDISE + रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 2,582 शिक्षक कम हो गए हैं। साय सरकार रोजगार देने वाली नहीं, बल्कि रोजगार छीनने वाली सरकार साबित हो चुकी है। छत्तीसगढ़ के लाखों डीएड-बीएड पास बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों पर विष्णुदेव साय सरकार ने पानी फेर दिया है। कांग्रेस पार्टी युवाओं के इस अधिकार की लड़ाई सड़क से लेकर विधानसभा तक लड़ेगी।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि एकल-शिक्षक और शिक्षक-विहीन स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भर्ती प्रक्रिया के नाम पर केवल समितियाँ गठित करने और बयानों का झुनझुना थमाने का काम हो रहा है, वित्तीय प्रावधान में कटौती की जा रही है। सालों से कोचिंग और तैयारी कर रहे लाखों बेरोजगार युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है। स्कूली छात्र विशेषकर ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्र बस्तर, सरगुजा और मैदानी इलाकों के सरकारी स्कूलों में विषय-विशेषज्ञ शिक्षक न होने से शिक्षा का स्तर गिर रहा है। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था पर साय सरकार का यह सर्जिकल स्ट्राइक है, युवाओं के साथ ऐतिहासिक धोखा कर रही है सरकार।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी व हिंदी माध्यम विद्यालय योजना के तहत 20,000 से अधिक पद स्वीकृत कर रिकॉर्ड नियुक्तियाँ की गईं। 27,069 नियमित शिक्षक भर्ती (14,580 एवं 12,489 पद) प्रक्रिया को तेज गति से पूरा कर युवाओं को रोजगार और स्कूलों को शिक्षक दिए गए थे। भाजपा की सरकार आने के बाद स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूल बदहाल हो गए, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बढ़ने के बजाय कम हो गई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि केंद्र के ही रिपोर्ट कार्ड ने साय सरकार के शिक्षा विरोधी और युवा विरोधी चेहरे को नंगा कर दिया है। यू-डायस प्लस रिपोर्ट में वर्ष 2023-24 में छत्तीसगढ़ में कुल सरकारी शिक्षकों की संख्या 1,88,721 थी जो 2024-25 में 1,88,578 हो गई और 2025-26 में यह आंकड़ा घटकर 1,86,139 रह गया अर्थात दो साल में 2582 शिक्षक कम रह गए। आदिवासी और छत्तीसगढ़िया गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश की जा रही है। जब सरकारी स्कूलों में शिक्षक ही नहीं होंगे, तो गांव और गरीब के बच्चे आगे कैसे बढ़ेंगे? क्या साय सरकार जानबूझकर भर्ती प्रक्रिया को लटकाकर सरकारी शिक्षा तंत्र को कमजोर कर रही है ताकि निजी शिक्षा माफियाओं को फायदा पहुंचाया जा सके? यह सुशासन वाली सरकार नहीं, छत्तीसगढ़ के युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेलने वाली ‘विश्वासघाती सरकार’ है।

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