
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2047 में देश की आजादी के जब सौ साल होंगे तब भारत एक विकसित राष्ट्र बनकर रहेगा और 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से ही इस लक्ष्य को हासिल किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौके पर लगातार 13वीं बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद इस ऐतिहासिक इमारत की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित होने का संकल्प लेता है तो वह दुनिया की नजरों में भी हमारे साहस का परिचायक बन जाता है।
उन्होंने कहा, “दुनिया को हमारी ओर देखने का अपना नजरिया बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मैं यह बात यूं ही नहीं कह रहा हूं। पिछले 12 वर्षों में देश के करोड़ों नागरिकों चाहे वे दलित हों, पीड़ित हों, वंचित हों, आदिवासी हों, गांवों में रहने वाले हों या शहरों में, गरीब हों या मध्यम वर्ग से, उत्तर से हों, दक्षिण से, पूर्व से या पश्चिम से हर किसी ने एक संकल्प और समर्पण के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में योगदान दिया है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी का परिणाम है की इतने कम समय में 25 करोड़ देशवासी गरीबों को पीछे छोड़कर गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने कहा कि देशवासियों के परिश्रम का ही परिणाम है कि कभी सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में गिने जाना वाला भारत आज सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। उन्होंने कहा कि देश बहुत सारे सपने लेकर आजाद हुआ था लेकिन हम रफ्तार नहीं पकड़ पाए हो क्योंकि जो होगा देखा जाएगा की भावना थी लेकिन पिछले 12 साल में देश ने एक नई रफ्तार पकड़ी है और तेज गति से हम आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा,‘‘अब 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प और सामर्थ्य को रोकना नामुमकिन है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ अब काम हो रहा है क्योंकि भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर रहकर के नहीं जीना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया में बहुत कुछ मिलता है। सस्ता मिलता है। जल्दी मिल सकता है। लेकिन इसमें हमारा सामर्थ्य नजर नहीं आता। इसलिए हमें भी अपनी क्षमताओं को बढ़ाना है। अपने हितों की सुरक्षा हमें खुद करनी है। इसलिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प बहुत दृढ़ता के साथ लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं।’’
प्रधानमंत्री ने भारत में सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आजाद होने के बाद विश्व में तो सेमीकंडक्टर की चर्चा होती थी लेकिन भारत में कोई संयंत्र नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘आज की डिजिटल दुनिया में प्रौद्योगिकी के महत्व को हम समझते हैं। कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान होगा, चिकित्सा उपकरण होगा, हर किसी में चिप अनिवार्य है। चिप के बिना दुनिया थम जाती है।
भारत में आज अपना सेमीकंडक्टर प्लांट है। तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हुए हैं और मुझे बताया गया है वहां जो उत्पादन हो रहा है उसका निर्यात होना शुरू हो गया है।’’ उन्होंने कहा कि आने वाले सात-आठ वर्ष में आठ सेमीकंडक्टर संयंत्र बहुत जल्द शुरू होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर संयंत्र,विकसित भारत की दिशा में जाने का मार्ग है।

