अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने वाले कहावत को किया चरितार्थ

राष्ट्रमंडल खेलों के पहले डोपिंग की शर्मनाक घटना आई सामने

आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार,टीवी कमेंटेटर, रायपुर.

खेलकूद में प्रत्येक खिलाड़ी की कोशिश होती है कि वह राष्ट्रीय,अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगता में पदक जीत सके। इसके लिए खिलाड़ी अपना बचपन, किशोरावस्था यहां तक जवानी के हलचल को भी त्याग कर देता है। सामान्य बालक या बालिका से अलग हटकर एक खिलाड़ी जब 10 से 18 वर्ष तक की उम्र तक सब कुछ भूलकर अपने पसंदीदा खेल में महारत हासिल करने की कोशिश करता है तो वह त्याग और सिर्फ त्याग के अलावा पदक पाने के लिए कुछ और करता। दूसरी तरफ हैसियत से बाहर जाकर उपलब्धि प्राप्त करने की चाहत खिलाड़ी के लिए जी का जंजाल बन जाता है। ऐसी परिस्थिति आती है तो लगता है प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षक, खान-पान विशेषज्ञ, खेल चिकित्सक सहयोगी सब मिलकर यह प्रयास करते होंगे कि जो भी हो देश को पदक दिलाना है तो खान-पान में थोड़ा अंतर आने से क्या फर्क पड़ता है? इतने के उपरांत वह अगर डोपिंग में पकड़ा जाता है तो यहां विचार रखने का अर्थ यही है कि जागरुक इस बात को समझ सके कि अगर डोपिंग का मामला प्रकाश में आया है तो यह सिर्फ दोषी खिलाड़ी की गलती का परिणाम नहीं हो सकता। भारत में इन दिनों खेलों इंडिया कार्यक्रम और भारतीय खेल प्राधिकरण नई दिल्ली( सांई) के सहयोग से या फिर निजी क्षेत्र में किसी खेल अकादमी में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाता है तो उनकी देखभाल के लिए प्रशिक्षक, खान-पान विशेषज्ञ, खेल चिकित्सक मौजूद होते हैं। उन्हीं की देखरेख में खिलाड़ी को विश्व स्तरीय स्पर्धा के लिए कठोर अनुशासन में रखते हुए शारीरिक, मानसिक रूप से तैयार किया जाता है। प्रश्न यह उठता है कि जब केंद्र सरकार का खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण या अन्य कोई सरकारी, गैर सरकारी प्रशिक्षण संस्थान जब खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए विशेषज्ञों की उपस्थिति में आधुनिक यंत्रों,उपकरण तथा अनुशासन के साथ तैयार करता है तो फिर डोपिंग का मामला कैसे आ जाता है?इससे सिर्फ खिलाड़ी का संबंधित खेल ही नहीं परंतु इस तरह की घटना के प्रकाश में आने से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हमारे देश की प्रतिष्ठा पर आंच आती है। ग्लासगो में इन दिनों चल रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 के ठीक पहले भारत के खेल जगत में डोपिंग के दो प्रकरण सामने आये हैं। पहले प्रकरण में जुडो की खिलाड़ी तुलिका मान को राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने पिछले 12 महीनों में तीन बार अपने ठिकाने (वेयर अबाडट्स) की जानकारी न देने के कारण उन पर कार्यवाही करते हुए उन्हें ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों 2026 की भारतीय टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। हमारे देश के खेल भविष्य के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि पिछले 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में जूडोका तुनिका मान ने भारत के लिए एक रजत पदक जीता था। दूसरी घटना में ग्लास्गो 2026 के लिए चयनित पुरुष जूडोका अरुण कुमार को डोप टेस्ट में विफल होने की वजह से प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया है। अरुण कुमार 73 कि.ग्राम वर्ग में भारतीय दल के सदस्य थे। भारत ने जूडो में 12 इवेंट में मुकाबले के लिए जूडोका का चयन किया था। अब 11 इवेंट में हमारे खिलाड़ी अपनी दावेदारी प्रस्तुत करेंगे . परंतु यही नहीं भारोत्तोलन में भी डोपिंग में पकड़ में एक खिलाड़ी आया है जिसके कारण नियमानुसार भारत को एक और इवेंट से रोका गया है। तथा टीम से दिलबाग सिंह को निकाला गया तथा अब भारतीय भारोत्तोलक 12 इवेंट की जगह 11 इवेंट में भाग ले सकेंगे। क्योंकि डोपिंग उल्लंघनों के चलते हमारे देश का भारोत्तोलन का कोटा 12 से घटाकर 11 इवेंट कर दिया गया है। खेल की दुनिया में इस प्रकार की गलती दूसरे लायक प्रतिभागी के हानि को रोकने के लिए 1999 में एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संगठन का निर्माण किया गया था जिसे वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (डब्ल्यू.ए.डी.ए.) कहते हैं यह एजेंसी पूरी दुनिया को एंटी डोपिंग से बचने की सलाह देती है और बताती है कि कौन-कौन की दवाएं या पोषक आहार एक खिलाड़ी के लिए घातक है। भारत में भारतीय खेल प्राधिकरण और कुछ संगठनों द्वारा एंटी डोपिंग दवा या आहार नहीं लेने हेतु पूरे भारत में प्रचार प्रसार किया जाता है।अफसोस है कि खेलों के विश्व व्यापी परिदृश्य में भारत 2022,2023,2024 में भारत डोपिंग में अधिकृत रूप से प्रथम स्थान पर बना हुआ है। जहां क्रमश: 192, 213,260 और 2026 में अब तक 131 प्रकरण दर्ज हुए हैं। जागरूकता लाने की पूरी कोशिश के बावजूद भारत के खेल भविष्य के लिए यह डराने वाले आंकड़े हैं। भारत में सबसे अधिक डोपिंग प्रकरण एथलेटिक्स, भारोत्तोलन और कुश्ती में पाये जा रहे हैं। इस दिशा में रोकथाम के कड़ी उपाय जरूरी है अन्यथा बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के आयोजन की अनुमति मिलना मुश्किल हो जाएगा .

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