फीफा विश्व कप : 2026, स्पेन की टीम की एकजुटता ने बनाया विजेता
आलेख ..जसवंत क्लॉडियस,वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर, रायपुर.
जीवन का चाहे कोई भी क्षेत्र हो लोग कहते हैं मेहनत करोगे, कोशिश करोगे तो सफलता आपके कदम चूमेगी। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत कितनी करनी चाहिए और कोशिश कैसी होनी चाहिए। इस बात की सीख फीफा द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में सम्पन्न फीफा 2026 के अंतर्गत पुरुष वर्ग में फुटबाल का चैंपियन बनने तक के घटनाक्रम से मिलती है . 11 जून 2026 से आरंभ विश्वकप फुटबाल का यह तेइसवां संस्करण था। अपने आयोजन के 96 वर्ष के दौरान यह पहला अवसर था जबकि कोई एक विश्वकप का आयोजन तीन देशों में किया गया। अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल परिषद के पदाधिकारियों के समक्ष फुटबाल के विश्वकप के आयोजन की मांग अपने-अपने देश में करने के लिए रखते हैं। हकीकत में ऐसा कर पाना संभव नहीं है। फुटबाल के मान्यता प्राप्त 206 देशों में से हर बार कम से कम 10 से लेकर 12 देश चाहते हैं कि आयोजन उनके देश में हो। इस समस्या का हल निकालते हुए फीफा ने तीन देशों में आयोजन का फार्मूला निकाला और 2026 में इसे सफलता मिली. 1930 में आरंभ हुए इस चैंपियनशिप के आयोजन का शतक याने 100 वर्ष 2030 में होने जा रहा है। वैसे भी 2026 के फायनल की विजेता स्पेन के गृह देश में जब यह शताब्दी टूर्नामेंट होने जा रहा है तो हम उसे सोने में सुहागा वाला आयोजन भी कह सकते हैं। 2026 का फायनल मैच संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयार्क शहर से 16 किमी की दूरी पर स्थित ईस्ट रदरफोर्ड के 80000 क्षमता वाले न्यूजर्सी स्टेडियम में हुआ। अत्याधुनिक सुविधा से युक्त यह स्टेडियम संसार के खूबसूरत, व्यवस्थित स्टेडियम में से एक है। भारतीय समय व तिथि अनुसार 20 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि का करोड़ों दर्शकों के साथ फुटबाल प्रशिक्षक व खिलाड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. फायनल में जगह बनाने वाली दोनों टीम में से अर्जेंटीना दक्षिण अमेरिका महाद्वीप जबकि स्पेन यूरोप महाद्वीप की चैंपियन टीम थी। कागजों पर अर्जेंटीना की टीम मजबूत लग रही थी क्योकि उसने 23 में से 19 बार इस स्पर्धा में भाग लिया था और वह 1978, 1986 तथा 2022 की विजेता तथा 1930, 1990, 2014 की उपविजेता टीम थी। दूसरी तरफ स्पेन ने 17 बार भाग लिया और एकमात्र 2010 में चैंपियनशिप जीती थी जबकि 1950 में वह चौथे स्थान पर थी। फायनल मैच के पहले अर्जेंटीना की टीम ने बड़ी मुश्किल से अपने प्रतिद्वंदियों को पराजित किया था। उसे केप वर्डे, इजिप्त, स्वीट्जरलैंड और हालैंड के विरुद्ध खेल के अंतिम समय में सफलता मिली थी। दूसरी तरफ स्पेन की टीम ने आस्ट्रिया, पुर्तगाल, बेल्जियम, फ्रांस को हराया था। उपरोक्त चार मैच में अर्जेंटीना के खिलाफ 6 गोल हुए थे जबकि स्पेन ने सिर्फ एक गोल होने दिया। फायनल में समझिए स्पेन के खिलाडिय़ों ने अर्जेंटीना के सभी खिलाडिय़ों को पढ़ लिया था,कहने का तात्पर्य अर्जेंटीना के सभी खिलाड़ी स्पेन के किसी न किसी फुटबाल क्लब से जुड़े हैं और वे उनके खेलने की शैली, आक्रमण के तरीके को जानते हैं। इसी का लाभ स्पेन की टीम ने उठाया। स्पेन का डिफेंस मजबूत दीवार की तरह था। अर्जेंटीना की टीम 4-1-3-2 के आधार पर खेलती है। जबकि स्पेनिश 4-2-3-1 के आधार पर विपक्षी का सामना करते हैं। आज के मैच में अर्जेंटीना की टीम के गोलकीपर इमिलियानों की चपलता गोलपोस्ट में देखने लायक थी. जबकि स्पेनिश डिफेंडर मार्क कुकुरेला, आयमेरिक लापोर्टे, पेड्रो पोरा चीन की दीवार के समान सुरक्षा की मिसाल है। अर्जेंटीना के कप्तान लियोनल मैसी की टीम को इस विश्व कप में मुश्किल से मिल रही एकतरफा सफलता दिलाने के क्रम पर आज स्पेन के खिलाड़ी नकेल डालने में सफल हुए. उन्हें स्पेनिश रक्षापंक्ति के खिलाडिय़ों द्वारा पूरे मैच के दौरान घेरे रखा गया। स्पष्ट है कि मैसी और उनके साथी कुछ कर नहीं पा रहे थे इसलिए उनके खेल में आज न तो दबंगई थी ना ही विश्वसनीयता। मानना पड़ेगा अन्य खिलाड़ियों से परे अर्जेंटीना के गोलकीपर ने आज जादुई खेल का प्रदर्शन करके कम से कम स्पेनिश खिलाडिय़ों के चार-पांच मूव द्वारा निश्चित गोल को नाकाम कर दिया गया। वे प्रत्येक
प्रहार को चीते की तेजी से गेंद पर झपटते हुए गोलपोस्ट के बाहर का रास्ता दिखा देते थे। आज के मैच में स्पेन के 19 वर्षीय खिलाड़ी लामिने यामल सबसे अधिक चर्चा का विषय रहे। अर्जेंटीना की टीम लगातार दूसरी बार यह स्पर्धा इसलिए नहीं जीत सकी कि उनके खिलाड़ी पूरे मैच के दौरान एक समान खेल दिखाने में असफल रहे और जब प्रत्येक मैच के आखिर में हारने लगे तो लगता सोते से जग जाते थे परंतु इस मैच में दुर्भाग्य से स्पेन के खिलाफ उनकी आलस दूर नहीं हो सकी। जिसका परिणाम वे उप विजेता होकर रह गए .

