जीत की राह दिखाकर, जाने कहां चल दिए आप

भारत के महान निशानेबाज स्व. जसपाल राणा की यादें शेष…

विगत दिनों जब मैं साहित्य के क्षेत्र से जुड़े अपने मित्रों के साथ सिंगापुर की यात्रा पर था तभी मुझे भारत के महान निशानेबाज जसपाल राणा के 50 वर्ष की उम्र में मृत्यु की जानकारी प्राप्त हुई। यह मेरे लिए बहुत दुखदायी था। 1979 से प्रिंट मीडिया के लिए पत्रकारिता करते हुए पिछले 47 वर्षों से खेलों के महाकुंभ ओलंपिक स्पर्धा में भारत के जिन खिलाड़ियों ने मेरे मन मस्तिष्क में अपनी छाप छोड़ी उनमें जसपाल राणा प्रमुख थे।

Jaswant Claudius
Jaswant Claudius

सिर्फ 12 वर्ष की उम्र में निशानेबाजी में अपने से कई वर्ष बड़े निशानेबाजों, खुद का शूटिंग रेंज रखने वाले निशानेबाजों , आर्थिक रूप से मजबूत निशानेबाजों के बीच एक सामान्य परिवार के होनहार निशानेबाज जसपाल राणा ने 31वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी प्रतियोगिता 1993 के एक इवेंट में जब जूनियर वर्ग में रजत पदक पर निशान साध लिया तब भारत के खेल परिदृश्य में तहलका मच जाता है। थोड़े ही अंतराल के पश्चात 1994 में 46 वीं विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में जसपाल राणा फिर अपने इवेंट में स्वर्णपदक पर निशाना लगाकर अपनी श्रेष्ठता साबित करते हैं साथ ही विश्वविजेता बन जाते हैं .इस धमाकेदार प्रदर्शन ने उन्हें आसमान का सितारा बना दिया।
जसपाल राणा का बचपन उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के जौनपुर जैसे वनाआच्छादित, पहाड़ियों के बीच स्थित गांव में हुआ। उनके पिता नारायण सिंह राणा बी.एस.एफ के एक अधिकारी थे।उन्होंने ही जसपाल के अंदर के निशानेबाजी के गुण को पहचाना और जसपाल को निशानेबाजी के गुर सिखाए। पिता की उम्मीद के अनुसार भारत का यह सपूत जसपाल खरा उतरा. अपने सक्रिय खेल जीवन में निशानेबाजी की चैम्पियनशिप में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में भाग लेते हुए भारत माता की झोली में 600 से अधिक पदक जीतकर डाल दिए. वस्तुतः इसी कारण व्यक्तिगत खेल में ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाले वे भारत के टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस, मुक्केबाज एम.सी. मेरीकाम, पहलवान सुशील कुमार, शटलर पी.व्ही. सिंधु, शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद , तीरंदाज दीपिका कुमारी , हाकी के ध्यान चंद, लेस्ली क्लॉडियस , पी आर श्रीजेश जैसे महान खिलाड़ियों के साथ अपना नाम लिखा लिया। भारत में खेलकूद को बढ़ावा देना के लिए जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2014 में देश की बागडोर संभालते ही प्रयास शुभारंभ किया है उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। सामूहिक खेलों में याने टीम खेलों में सफलता प्राप्त करने के लिए तो कई खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है परंतु एकल, युगल, मिश्रित युगल में चैंपियन बनने के लिए स्वयं का प्रदर्शन मायने रखता है। भारत के खेल इतिहास को खंगालने से स्पष्ट हो जायेगा कि आज लिएंडर पेस, विश्वनाथन आनंद. एम.सी. मेरीकाम, दीपिका कुमारी, पी.व्ही. सिंधु, जसपाल राणा जैसे कुछ महान खिलाड़ियों को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना भारतीय खेल जगत के उज्जवल भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। निशानेबाजी में राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 600 पदक जीतना आम खिलाड़ी के बस की बात नहीं है। निशानेबाजी में त्वरित निर्णय सही पूर्वानुमान, समर्पण,त्याग,
ईमानदार मेहनत की जरूरत होती है। इसके अलावा आयोजक देश का मौसम, वातावरण, खान-पान आदि से निशानेबाजी में लक्ष्य को प्राप्त करने में कठिनाई पैदा होती है। शांत मन मस्तिष्क के लिए निशानेबाजी में योग का भी महत्व होता है। जसपाल राणा का हमारे बीच से चले जाना उभरते हुए निशानेबाजों के लिए बड़ा आघात है। मनु भाकर जैसे शिष्य को ओलंपिक पदक के लिए तैयार करना एक कठिन काम था। जिसे जसपाल ने अपने अनुभव से आसान किया। जसपाल की मृत्यु हृदय रोग से हुई यह भी दुर्भाग्य की बात है कि हमारे खिलाड़ी ,कोच अत्यधिक व्यस्त होने के कारण नियमित स्वास्थ्य परीक्षण नहीं करा पाते अतः स्वयं ही आगे बढ़कर खिलाड़ियों के स्वास्थ्य परीक्षण हो इस दिशा में भारतीय ओलंपिक संघ और खेल मंत्रालय को कुछ ठोस कदम उठाना चाहिए .

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