संस्कार दिये जाये लेकिन किसी के पारिवारिक एवं सामाजिक संस्कारों को ठेस नहीं पहुंचाना
रायपुर/13 जून 2026। स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा स्कूलों में बच्चों के लिए तीन विभिन्न प्रकार के मंत्र का गान अनिवार्य किया जाना बेहद ही आपत्तिजनक है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, राज्यगीत तक का गायन तो उचित है लेकिन दीप मंत्र, सरस्वती मंत्र, भोजन के समय भोजन मंत्र इन सब की अनिवार्यता क्यों की गयी है? सरकार स्कूलों को सरस्वती शिशु मंदिर बनाने पर तुली है। आरएसएस के एजेंडे को सरकारी स्कूलों में थोपा जाना गलत है। सरकारी स्कूलों में देश के हर धर्म, हर जाति और हर साम्प्रदायिक के लोग पढ़ने आते है, हर वर्ग के पढ़ाई करते है। इस निर्णय से कुछ लोगों की आपत्ति होगी, उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होगी। हिन्दुस्तान सर्वधर्म समभाव वाला देश है। संवैधानिक रूप से भारत धर्मनिरपेक्ष देश है। स्कूलों में धर्म विशेष के आधार पर शिक्षा नहीं दी जानी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आजादी के बाद से हमारी शिक्षा प्रणाली में सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार के साथ शिक्षा दी जाती रही है। सामाजिक अध्ययन, संस्कृत एवं मातृभाषा जैसे विषयों में विद्यार्थी सभी सामाजिक एवं धार्मिक परंपराओं का अध्ययन करते रहे है। किसी धर्म के साथ भेदभाव का अध्ययन नहीं कराया गया।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि देश में अलग-अलग धर्मावलंबी अपनी धार्मिकता के आधार शैक्षणिक संस्थान चलाते है, लेकिन सरकारी स्कूलों में मंत्राचार को अनिवार्य करने से दूसरे धर्म के लोगों को ठेस पहुंचेगी। ऐसे में मुस्लिम धर्म के लोग कुरान की आयात तथा सिख धर्म के लोग गुरुवाणी तथा ईसाई धर्म के लोग बाइबल के अंशों को भी वाचन करने की मांग करेंगे।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार शिक्षा को शिक्षा ही रहने दे उसे धार्मिक सांचे में ढालने का प्रयास मत करे। शिक्षा में वैज्ञानिकता एवं आधुनिकता का नवाचार को निश्चित तौर पर बच्चों में सदाचार एवं संस्कार की शिक्षा डालनी चाहिए लेकिन उनके पारिवारिक एवं सामाजिक संस्कारों के खिलाफ कुछ भी थोपा जाना उचित नहीं होगा। सरकार परस्पर विद्वेष फैलाने का प्रयास मत करे।

